20 February 2026

WISDOM ------

    बंगाल  के  विख्यात शिक्षाविद्  पंडित  मुखोपाध्याय   से  मिलने  संस्कृत  महाविद्यालय  के शिक्षक  पहुंचे  l  उन्होंने  पंडित जी  से  कहा  ---- "  आप  संस्कृत  के  प्रकांड  विद्वान हैं  ,  फिर  आप  अन्य  की  तरह  दुर्गापूजा  महोत्सव  धूम -धाम  से क्यों  नहीं  मनाते  ?  "  पंडित जी  ने  उस  समय  तो  उनके  प्रश्न  का  कोई  उत्तर  नहीं  दिया  ,  पर  इस  वार्तालाप  के  कुछ  दिन  बाद  उन्होंने  शिक्षा  तथा  संस्कृत  के  प्रचार -प्रसार  के  लिए  निर्मित  विश्वनाथ  संस्कृत  ट्रस्ट  को  डेढ़  लाख  रूपये  दान  में  दिए  l  वे  शिक्षक  इसी  ट्रस्ट  द्वारा  निर्मित  महाविद्यालय  में कार्यरत  थे  l  पंडित जी   उन्हें  संबोधित  कर  के  बोले  ---- " मैंने  दुर्गा  पूजा   महोत्सव  में  धूम -धाम  न   कर  के   जो  पैसे  बचाए  हैं  ,  ये  वही  धन  है  l  संस्कृत  देववाणी  है   और  माँ  दुर्गा के  महत्त्व  को  सामने  लाने  का   श्रेय    भी  संस्कृत  को  है  l  यदि इस  धन  से   संस्कृत  की  सेवा  हो  जाये  ,  तो  मेरे  लिए  वही  दुर्गा  पूजा  है  l  

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