16 January 2019

WISDOM ------- ईश्वर सत्य है

  मनुष्य  जैसे - जैसे  बड़ा  होता  है  ,  ज्ञान  प्राप्त करता  है  तो  तर्क - कुतर्क  करता  है  l  बच्चों  में  छल - कपट  नहीं  होता   l   जो  सत्य  है  , वही  कहते  हैं  l  एक  कथा  है -----
  एक   बहुत  विद्वान्  व्यक्ति  था  ,  उसने  सभी  धर्म  व  दर्शन  के  ग्रन्थ  पढ़े  थे   l  लेकिन  वह  नास्तिक  था  ,  अपने  तर्कों  से  ईश्वर  के  अस्तित्व  को  नकार  देता  था  l  उससे  कोई  जीत  नहीं  पाता  था  l   उसने  बड़े - बड़े  अक्षरों  में  अपने  घर  की   दीवार  पर लिख  रखा  था --- ' गॉड  इज  नो  व्हेयर ' l    अर्थात  ईश्वर  कहीं  नहीं  है   l     लोगों  को  ऐसा  बताकर  उसे  बड़ी  प्रसन्नता  होती थी  l
 कुछ  समय  बाद  उसका  विवाह  हुआ   l  उसके  एक  पुत्र  हुआ  l  वह  बालक  बहुत  भोला   व  मासूम  था  l  जब  उसने  पढ़ना सीखा    तो  दीवार  पर  लिखे इतने  बड़े वाक्य  ' गॉड  इज  नो  व्हेयर '  को  पढ़ना  उसके  लिए कठिन  था  l  वह  बच्चा  ' गॉड  इज '  तो  आसानी  से  पढ़  लेता  था ,  लेकिन   ' नो  व्हेयर ' पढ़ने  में  अटक  जाता  था  l  उसके  लिए  यह  बड़ा  शब्द  था  ,  एक  साथ  उसका  उच्चारण  कठिन  था   l  इसलिए बच्चे  ने  उस  शब्द  को  दो  भागों  में  तोड़  दिया  --- 'नाउ - हियर '   l  अब  वह  बच्चा  उस वाक्य  को  ऐसे  पढ़ता  था ---- ' गॉड  इज  नाउ  हियर  '  l      वह   बच्चा  दिन - भर ,  जब - तब   बोलता  रहता --- ' गॉड  इज  नाउ  हियर '  ---  गॉड  इज -----  --- ' l   ईश्वर  अब  यहीं  है  '  l 
  बच्चे  के  पास  कोई  तर्क  नहीं  था ,  कोई  बहस  नहीं ,  वह  तो  अपनी   तोतली  भाषा  में   बोलता  था   l
  बच्चे  के  मुँह  से  सुनते - सुनते   कि  ' गॉड  इज  नाउ  हियर '   ,   पिता  का  भी  विवेक  जाग  गया  l  अब  उसके  पास  कोई  तर्क  नहीं  था ,  कोई  विवाद  भी  नहीं   l   उसके  पास अनुभूति  थी  l   ईश्वर  को हम  इन  आँखों  से  देख  नहीं  सकते  ,  केवल  अनुभव कर  सकते  है  ,  उनकी  कृपा  से  आनंदित  हो  सकते  हैं  l  

15 January 2019

WISDOM ---- आशावादी सोच हो , सकारात्मकता अपनाई जाये तो फिर हमें कोई भी निराश नहीं कर सकता

  विश्वकवि  रवीन्द्रनाथ  टैगोर  की  बढ़ती  हुई  प्रतिभा  व  लोकप्रियता  से  लोग  ईर्ष्या  करने  लगे  l उन्होंने  गुरुदेव  की  छवि  को  धूमिल  करने  के  लिए   विभिन्न  पत्र - पत्रिकाओं  के  माध्यम  से   अपने  कलुषित  प्रयास  आरम्भ  कर  दिए   l  परन्तु   वे  समभाव    से  सब  सहन  करते  रहे  तथा  तनिक  भी  विचलित  नही  हुए   l  श्री  शरतचंद्र  को  जब  यह  आलोचना  सहन  नहीं  हुईं  तो  उन्होंने  गुरुदेव  से  कहा  कि  वे  इन  आलोचकों  को  रोकने  का  कुछ  प्रयास  करें  l  गुरुदेव  रवीन्द्रनाथ  टैगोर  ने  उन्हें  शांत  भाव  से  समझाया  ,  प्रयास  क्या  करूँ  ?  मैं उन  जैसा  नहीं  बन  सकता  व  उन्होंने   जो  मार्ग  अपनाया  है  ,  वह  भी मैं  नहीं  अपना  सकता   l 
  महाकवि  रवीन्द्रनाथ  ने  अपनी  रचनाओं   द्वारा   संसार  में  भारतीय  संस्कृति  का  मान  बढ़ाया  l  उन्होंने  विश्व  भ्रमण  किया  l  वे  जहाँ   भी   गए  उन्हें  बहुत  सम्मान  मिला  l   नोबेल  पुरस्कार  और  विश्व भ्रमण   आदि  से  उन्हें  जितना  भी  धन  मिला  उसे    शान्ति  निकेतन  की  स्थापना  में  लगाया  l

14 January 2019

WISDOM ---- ----- विभूति योग ---- श्रीमद्भगवद्गीता

ईश्वर  ने  मनुष्यों  को   अनेक  विभूति  सौंपी  है ,  आवश्यकता  है  उनको  विकसित  करने  की   l
  स्त्रियों  में  भगवान  की  सर्वाधिक  विभूतियाँ  हैं  ,  इन  विभूतियों  के  विकसित  होने  पर  ही  दुनिया  में  संतुलन  व  सौन्दर्य  प्रकट  होगा  l ----
  भगवान  कहते  हैं ----- स्त्रियों  में  मैं  कीर्ति  हूँ   l  कीर्ति  का  मतलब  ऐसी   नारी ,  जिसके  व्यक्तित्व  से  वासना  की  झंकार  नहीं  निकलती  l  ऐसा  होने  पर  उसे  एक  अनूठा  सौन्दर्य  उपलब्ध  होता  है   और  वही   सौन्दर्य  उसका  यश  है , उसकी    कीर्ति  है   l
  इसके  बाद   भगवान  कहते  हैं ---- स्त्रियों  की  श्री  मैं  ही  हूँ   l   श्री   स्त्री  का  आत्मिक  सौन्दर्य  है  ,  उसकी  दिव्यता  की  अभिव्यक्ति   l    श्री  का  सौन्दर्य  अलौकिक  है ,  अपार्थिव  है   l 
   इसके  बाद  स्त्रियों  के  एक   अन्य   गुण   ' वाक् '  को  भगवन  अपना  स्वरुप  बताते   हैं  l   जब  स्त्री  अपने  अस्तित्व  में परम  मौन  को  उपलब्ध  होती  है  तब  उसकी वाणी  ' वाक् ' बनती  है  , जिससे  मन्त्र  प्रकट  होते  हैं   l  यह  मौन  की   गरिमा  है   l
  वाक्  के  बाद   स्त्री  के  एक  अन्य  गुण  को  भगवन  अपना  स्वरुप  कहते  हैं   ,  वह  गुण  है ---- स्मृति   l
 स्त्री  के  लिए  स्मृति  उसकी  बुद्धि  का  हिस्सा  नहीं  है  ,  बल्कि  अस्तित्व  की सम्पूर्णता  है   l 
  इसके बाद  ' मेधा  '  को  भगवन   अपनी  विभूति  बताते   हैं   l  मेधा  के  बल  पर  ही   संवेदना  और  सृजन  को  स्त्री  धारण  करती  है   l 
  इसके  पश्चात्   धृति  को  भगवन  अपना  स्वरुप  बताते  हैं  l  धृति  का  अर्थ  है --- धीरज , धैर्य , स्थिरता  l  स्त्री  का  धैर्य ,  उसकी  सहने  की  क्षमता  अनंत  है  ,  इसलिए  प्रकृति  ने  उसे  माँ  का  गौरव  दिया  है  l 
  इसके  पश्चात्  स्त्री  का  अगला  गुण  है -- क्षमा ,  जिसे  भगवन  अपनी  विभूति  कहते  हैं   l  स्त्री  में  जितना  प्रेम  है ,  उतनी  ही  क्षमा  है   l 
  ये  सब  विभूतियाँ  जब  तक  विकसित  नहीं  होती  ,  तब  तक  दुनिया  असंतुलित  रहेगी   l   

13 January 2019

WISDOM ---- सकारात्मक सोच से मन प्रसन्न रहता है

 हर  स्थिति में  सुखी   रहना  या  दुःख  मनाना  व्यक्ति  पर  निर्भर  है   l  दुःख उन्हें  होता  है  , जो  हर  स्थिति  में  अपनी  मनमरजी  चलाना  चाहते  हैं  ,  हर  परिस्थिति  को  नियंत्रित  करना   चाहते  हैं   l 
 जो  परिस्थिति  के  साथ  अपनी  मन:स्थिति  बदल   लेते  हैं,  वे  ही  सुखी  रहते  हैं   l  जिसका    अपनी  मन: स्थिति  पर  नियंत्रण  होता  है   वह  कभी  किसी   परिस्थिति  का  प्रतिकार  नहीं  करता   और    उससे  उलझ  कर  अपनी  ऊर्जा  और  समय  भी   नहीं  गंवाता      l   अपने  मन  को  समझाकर  उस  परिस्थिति  का  समुचित  लाभ  भी  उठा  लेता  है   l   
  जो  हर  परिस्थिति  में  अपने  मन   की  सकारात्मकता  बनाये  रखते  हैं  उन्हें  कोई   दुःखी    नहीं  कर  सकता   l    एक  प्रसंग  है ----  एक  दिन  एक  शिष्य  ने   अपने   गुरु  से  कहा --- " गुरुदेव  !  एक  व्यक्ति  ने  आश्रम  के  लिए  गाय  भेंट  की  है  l  "  गुरु  ने  कहा --- " अच्छा  हुआ  !  दूध  पीने  को  मिलेगा  l  "
एक  सप्ताह  बाद   शिष्य  ने  आकर  फिर  गुरु  से  कहा --- " गुरूजी  !  जिस  व्यक्ति  ने  गाय  दी  थी  ,  वह  अपनी   गाय  वापस  ले  गया  l "
गुरु  ने कहा --- " अच्छा  हुआ  !  गोबर  उठाने  के  झंझट  से  मुक्ति  मिली  l  "
बदलती  परिस्थिति  के  साथ  सकारात्मकता  बनाये  रखना  ही  जीवन  में   सफलता  का  एकमात्र  सूत्र  है   l  

12 January 2019

WISDOM ----- विषाद और अवसाद से उबरकर कर्मपथ पर चलने के लिए गीता के ज्ञान की जरुरत है

 गीता  हमें  जीवन  जीने  की  कला  सिखाती  है    l  आज  के  युग  में    लोगों  में  तनाव , अवसाद और मनोरोग  बढ़  रहे  हैं  , इसका  कारण  दूषित  मानसिकता  है  l  लोग  अपने  सुख  से  सुखी  नहीं  हैं ,  दूसरे  का  सुख  देखकर  दुःखी   हैं  l  प्रत्येक  व्यक्ति  इसी  प्रयास  में  अपनी   ऊर्जा   गंवाता  है  कि  कैसे  किसी  को  अपमानित  करें , नीचा  दिखाएँ   l  आज मनुष्य  अपनी  तरक्की  के  प्रयास  कम  करता  है  ,  उसका  सारा  प्रयास   केवल  यही  होता  है कि   कैसे  अपने  प्रतिद्वंदी  को  आत्महीनता  की  स्थिति  में  धकेल  दें  और  उसकी  तुलना  में  स्वयं  को  श्रेष्ठ  साबित  करें  l  इस  वजह  से  संसार  में   तनाव ,  आत्महत्याएँ,  अपराध  तेजी  से  बढ़  रहे  हैं  l
 यह  एक  विडम्बना  है   कि   उजाला  हमारे  पास  है  और  हम  अँधेरे  में  भटक  रहे  हैं   l  ईर्ष्या , द्वेष ,  लोभ , लालच , वासना , षड्यंत्र  रचने  की  प्रवृति --- ये  सब  मानसिक  विकार  हैं   ,  इन  विकारों  से  ग्रस्त  व्यक्ति  एक  प्रकार  के   मनोरोगी  हैं   और  आज   की  परिस्थितियों  में   ऐसे  ही  मनोरोगियों  से   हमारा  सामना  होता  है  l  ऐसे  लोगों  के  बीच  रहकर   अपने  मन  को  कैसे   शांत  और  तनावमुक्त  रखा  जाये ,  यह  ज्ञान  गीता  से ही मिलता  है  l  गीता  को  धर्म  और  मजहब  के  दायरे   से  बाहर  रखकर   पढ़ा  और  समझा  जाना  चाहिए  l  इससे  हमारा  द्रष्टिकोण  ,  सोचने - विचारने  का  तरीका  परिष्कृत  होगा  तो  अधिकांश  समस्याएं   स्वत:  ही  समाप्त  हो  जाएँगी  l  

11 January 2019

WISDOM ----- जो स्वावलंबन और आत्मविश्वास के साथ बढ़ता है , उसकी योग्यता , कर्मठता , साहस और कर्तव्य भावना अदम्य होती है ---- लाल बहादुर शास्त्री

 शास्त्री  ने    कहा  था --- "  फूल  कहीं  भी  हो  खिलेगा  ही  l  बगीचे  में  हो  या  जंगल  में  ,  बिना  खिले  उसे  मुक्ति  नहीं  है  l  बगीचे  का  फूल पालतू  फूल   है  ,  उसकी  चिंता  स्वयं  उसे  नहीं  रहती  l    जंगल  का  फूल  इतना  चिंता मुक्त  नहीं  ,  उसे  अपना  पोषण  आप  जुटाना  पड़ता  है ,  अपना  निखर  आप  करना  पड़ता  है  l  कहते  हैं  कि  इसीलिए  वह  खिलता  भी  मंद  गति  से  है   l  सौरभ  भी  धीरे - धीरे  बिखेरता  है  l  किन्तु  उसकी  सुगंध  बड़ी  तीखी  होती  है  l  काफी  दूर  तक  वह  अपनी  मंजिल   तय    करती  है  l
  यही  बात    मनुष्य  के  विकास  में  भी  लागू  है  l  सफलता  की  मंजिल  भले  ही  देर  से  मिले  ,  पर अपने  पैरों  की  गई  विकास  यात्रा    अधिक  विश्वस्त  होती  है  l   अपने  आप  बढ़ने  में  सच्चाई  और  ईमानदारी  रहती  है  l   संसार  में  कार्य  करने  के  लिए  स्वयं  का  विश्वासपात्र  बनना  आवश्यक  है   l  आत्मशक्तियों  पर  जो   जितना  अधिक  विश्वास  करता  है  ,  वह  उतना  ही  सफल   होता  है   l 
    

10 January 2019

WISDOM ----- कठिनाइयाँ और विपरीत परिस्थितियां उपलब्धि तभी बनती है जब हम उन परिस्थितियों में मनोबल बनाये रखते हैं , हिम्मत नहीं हारते हैं

   अनुकूल परिस्थितियों  में  सुख  और  यश  की  ललक  इतनी  प्रबल  होती  है   कि  उन्हें  प्राप्त  करने  में  ही  पूरी  उर्जा  चली  जाती  है  l   विपरीत परिस्थितियां  हमें  सजग ,  सतर्क  और  सावधान  बनाती  हैं   l   अपने - पराये  का  परिचय  इसी  अवस्था  में  होता  है  l जिन्हें  हम  अपना  मान  के  जान  छिडकते  हैं ,  वे  कितने अपने  हैं  , इसी  दौरान  इसकी  परीक्षा  हो  जाती  है  l  विपरीत परिस्थितियां  हमें  वास्तविकता  का  बोध  कराती  हैं  l 
बुद्धिमान  व  समझदार  व्यक्ति   ऐसे  समय  में  हिम्मत  और  हौसला  नहीं  हारते  ,  चुनौती  समझकर  उनका  सामना  करते  हैं   और  जीवन  में  सफल  होते  हैं   l   भगवन  राम  यदि  अयोध्या  में  ही  रहते , चौदह  वर्ष  का  वनवास   संपन्न  नहीं  करते  तो  असुरों  का  नाश  कैसे  होता  l  इस  अवधि  के  संघर्ष  ने  ही  उन्हें  मर्यादा  पुरुषोतम  राम  बनाया  l 
  इसी  तरह  पांडवों  को  बारह  वर्ष  के  वनवास  और  एक  वर्ष  के  अज्ञातवास  में  अनेक  कठिनाइयों  का  सामना  करना  पड़ा  l  इसी  अवधि  में  अर्जुन  को अनेक  दिव्यास्त्र  प्राप्त  हुए  l  बलशाली  भीम  जो  गदा  युद्ध में  दक्ष  थे  उन्हें  नौकर  बनकर  खाना बनाना  पड़ा  l  सम्राट  युधिष्ठिर  को  दास  बनना  पड़ा ,  अर्जुन  को  एक  वर्ष  तक  ब्रह्न्न्ला  का  जीवन  बिताना  पड़ा  l  वे  इन  सब  से  हारे - घबराये  नहीं   और  भावी  महाभारत  युद्ध  और  राज्य  सम्हालने  की  तैयारी  कर  ली   l 
  यदि  हम  में  साहस ,  धैर्य  और  दूरदर्शिता  हो  तो  कठिनाइयाँ  हमें  बहुमूल्य  उपलव्धियों  और  वरदानो  से  भर  सकती  हैं   l