18 November 2018

WISDOM ----- अकेलेपन का सार्थक उपयोग करें

  दुनिया में  जो  भी  उपलब्धियाँ हैं ,  सिद्धियाँ  हैं , वे  भले  ही  संसार  के  सम्मुख  हों  , लोगों  से  घिरी  हों  , लोग  उनका  उपभोग  करते  हों  , लेकिन  उनकी  उत्पति  एकांत  के  माहौल  में  ही  होती  है  l 
 हमारे  अन्दर  की  प्रतिभा , क्षमता , रचनात्मकता  का  विकास   हमारे  स्वयं  के  पुरुषार्थ  से  होता  है   और  इसके  लिए  हमें  एकांत  की  आवश्यकता  होती  है  l  शोर - गुल  में  हम  पूरी  तरह  एकाग्र  नही  हो  पाते,  एकांत  में  ही  मन  शांत  और  स्थिर  होता  है   जिससे  साधना  के  मार्ग  पर  आगे  बढ़ने में  मदद  मिलती  है  l      एक    चीनी  साहित्यकार   हैं ---- मो  यान  l  वे  चीन  के  पहले  ऐसे  लेखक  हैं  जिन्हें  साहित्य  के  लिए  नोबेल  पुरस्कार   प्राप्त  हुआ  है  l   वे  कहा  करते  थे  एकांत  मेरे लेखन  का  अभिन्न  एंग  है   l   आर्थिक  तंगी  के   कारण  उन्हें   वीद्दालय  छोड़कर  मवेशी  चराना पड़ा   l  मवेशियों  के  बीच  वे  अकेले  होते  थे  l  यह  एकांत  उन्हें  इतना   पसंद  आया   कि  उन्होंने  अपना  नाम   ' ग्वान  मोए '  से  बदलकर   ' मो  यान  रख  लिया  , चीनी  भाषा  में  इसका  अर्थ  होता  है  मत  बोलो   l 
  एकांत   में  हम  अपनी  उर्जा  का  सकारात्मक  उपयोग कर  उसे  सार्थक  करें   l  

16 November 2018

WISDOM ------ प्रत्येक श्रेष्ठ और महान कार्य की सफलता में गंभीर मौन सहायक रहा है l

  सार्थक  मौन  उसे  कहते  हैं  जब   मन  में  श्रेष्ठ  चिंतन  और  ईश्वर  स्मरण  चलता  रहे   l
 जब  व्यक्ति  बोलता  है   तो  जिह्वा  हावी  रहती  है   लेकिन  मौन    की    अवस्था में  अंतर  बोलता  है  ,  हमें  अपने  अंतर  को  बोलने  का  मौका  देना  चाहिए  क्योंकि  इसी  में  जीवन  का  सारा  मर्म    छुपा   है   l 
   गांधीजी  के  मौन  का   प्रभाव   ऐसा  विलक्षण  और  अद्भुत  था   जिसने  कभी  न  अस्त  होने  साम्राज्य  को  पराजय  का कडुआ  घूंट  पिला  ही  दिया   l 
 अरुणाचलम  के  महर्षि  रमण  सदैव  मौन  रहते  थे  l  परन्तु  उनका  मौन  उपदेश  आत्मा  की  गहराई   में  उतर   जाता  था  l  हर  कोई उनसे  अपनी  गंभीर  समस्या  का  समाधान   अनायास  ही  पा  जाता  था  l   अंग्रेजी  साहित्य  के  महान  कवि   वर्ड्सवर्थ    अपने  काव्य  को   मौन  और  नीरवता  का  वरदान   कहा  करते  थे  l 
  जीवन  में  श्रेष्ठ  एवं  सार्थक  कार्य   के  लिए   मौन  को  एक  व्रत  मानकर  अपनाना  चाहिए   l  

15 November 2018

WISDOM ------

 एक  मिटटी के  ढेले  से  सुगंध  आ  रही  थी  तथा  दूसरे  से  दुर्गन्ध   l  दोनों  जब  मिले  तो  आपस  में  विचार  करने  लगे   कि  हम   दोनों  एक  ही  मिटटी  के  बने  हैं  ,  फिर  इतना  अंतर  क्यों   ?  सुगन्धित  ढेले  ने  कहा ---- ' यह  संगति  का प्रतिफल  है   l  मुझे  गुलाब  के  नीचे  पड़े  रहने  का  अवसर  मिला   और  तुम  गोबर  के  नीचे  दबे  रहे  l  '  यह  संगत  का  असर  है   l  

14 November 2018

WISDOM ------ सच्चा अध्यात्म

  पं.  श्रीराम  शर्मा   आचार्य जी  ने  अपने  प्रवचनों  में  यह  स्पष्ट  रूप  से  कहा  कि --"  अध्यात्म  किसी  जादूगरी  का  नाम  नहीं  ,  बल्कि  श्रेष्ठ  विचारों ,  ऊँचे  विचारों ,  आदर्श  विचारों  और  सही  विचारों  को  जीवन  में  उतारने  का  नाम  है  l  "  उनका  कहना  है  कि   मनुष्य  सारी  संपदाओं  का  स्वामी  होते  हुए  भी  विपन्नताओं  से  इसलिए  घिरता  है  ,  क्योंकि  उसने  अपने  जीवन  में  असंयम  को  स्थान  दे  दिया  l  वे  जीवन  में  संयम  और  अनुशासन  लाने  को  अध्यात्म  घोषित  करते  हैं  और  कहते  हैं  कि   सच्चा  अध्यात्म  आने  पर  मनुष्य  का  आहार  और  विहार  दोनों  परिष्कृत  होते  हैं  और  उसके  व्यक्तित्व  के   प्रत्येक  आयाम  में  उत्कृष्टता  की  छाप  दिखाई  पड़ती  है  l 
    जब  अध्यात्म  का  जीवन  में  प्रवेश  होता  है   तो  जीवन  कैसे  रूपांतरित  हो  जाता  है  ,  एक   उदाहरण  है --------    कर्नाटक  के  एक  छोटे  से  गाँव  में   एक  साधारण  गृहस्थ  के  घर  एक  कन्या  जन्म  लिया , जो  बड़ी  सुंदर  युवती  बनी ,  नाम  था ---- अक्का  महादेवी  l  इस  साधारण  ग्राम बाला  ने  प्रतिज्ञा   की   कि  वह  आजीवन  ब्रह्म्चारिणी  रहकर   ईश्वर - उपासना   और  राष्ट्र सेवा  करेगी ,  कभी  भी  विधर्मियों  को  अपने  देश  में  घुसने  नहीं  देगी  l  संयम   की   तेजस्विता  ने   उसकी  कांति  में  और  वृद्धि  कर  दी  l  तत्कालीन  मैसूर  के  राजा  कौशिक  ने   अद्वितीय  सौन्दर्य  की  धनी   अक्का महादेवी  से  विवाह  का  प्रस्ताव  रखा  l  वे  अपनी  अति  कामुकता  और  ढेरों  उप पत्नियों  के  लिए  प्रसिद्ध  थे  l अक्का महादेवी  ने  मना  कर  दिया  l  कौशिक  ने  उसे  अपमान  मानकर  अक्का  के  माता - पिता  को  बंदी  बनाकर  पुन:  प्रस्ताव  भेजा  l  अक्का   ने  माता - पिता  की  खातिर   प्रस्ताव  मान लिया  , लेकिन  एक  शर्त  पर  कि  वे  समाज  सेवा , संयम - साधना  का  परित्याग  नहीं  करेंगी  l   राजा  कौशिक  ने  यह  बात  मान  ली  l
      विवाह  के  बाद   अपनी   निष्ठा  से   उन्होंने  कामुक  पति  को  संत  बनाकर  सहचर  बना  लिया   l  अक्का  और  कौशिक  दोनों  ने   कन्नड़  संस्कृति  की  रक्षा  के  ढेरों  प्रयास  किए  ,  जिनकी  विरुदावली  आज  भी   गाई  जाती  है   l 

13 November 2018

WISDOM -----

महाभारत  में  धर्मराज    युधिष्ठिर   और  यक्ष  के  मिलने   का  प्रसंग  है  l  यक्ष  उनसे  कई  प्रश्न  पूछता  है   ,   इसी  क्रम  में  यक्ष  ने  उनसे  पूछा ---- " इस  संसार  का  परम आश्चर्य  क्या  है   ?  किमाश्चर्य  परम  ? "
  युधिष्ठिर  ने  उत्तर दिया ------ " सबसे  बड़ा आश्चर्य  है  कि   मृत्यु   को   सुनिश्चित  घटना  के  रूप  में  देखकर  भी   मनुष्य  इसे  अनदेखा  करता  है   l  वह  मृत्यु  की  नहीं ,  जीवन  की  तैयारी  कुछ  इस  अंदाज में  करता  है  ,  जैसे  विश्वास  हो  कि  वह  कभी  मरेगा  ही  नहीं  l  उसे  सदा - सदा  जीवित  रहना  है   l  " 
  मृत्यु  का  अनुभव  सिर्फ  उन्ही  को  होता  है,  जिनकी  मृत्यु  होती  है   l
  मृत्यु  का  बोध  हो  जाये   तो  जीवन  सार्थक  हो  जाता  है   l 
    ' जब  आया  था  इस  दुनिया  में ,  सब  हँसते  थे  तू  रोता  था  l
      अब  ऐसी  करनी  कर  जग  में  सभी  रोयें  तू  हँसता  जा   l   

12 November 2018

WISDOM ------

   एक  राज्य  में  एक  दानी  राजा  था  l  उसके  महल  में  हर  समय   याचकों  की  भीड़  लगी  रहती  थी  l  एक  बार  एक  संत  उस  राज्य  में  पधारे   l   उन्हें  राजा  की  दानी  प्रवृति  के  बारे  में  पता  चला  तो  वे  राजा  से  मिलने  पहुंचे  l  राजा ने  उनका  यथोचित  स्वागत - सत्कार  किया  और  पूछा ---- " महात्मन  !  मैं  आपकी  क्या  सेवा कर  सकता  हूँ  ? " संत  बोले ---- "  राजन  ! आप  दानवीर हैं  l  लेकिन  आपसे  बिना  परिश्रम  का  धन  पाकर   आपकी  प्रजा  श्रम  से  विमुख   हकर  आलसी  बन  गई  है  और  यों  ही  दान  पा  लेने  से   उनके  जीवन  में  कोई   सार्थक  परिवर्तन  भी  नहीं  आ  रहा  है   l  I इससे  अच्छा है   कि  आप  उन्हें   रोजगार  के  साधन  उपलब्ध  कराएँ   l  "  राजा  को  संत  का  कथन  सही  लगा   और  उसने  वहि  पथ  अपना  लिया   l   

9 November 2018

WISDOM----- अनीति और अधर्म का अंत अत्यंत त्रासदीपूर्ण और वीभत्स होता है l

 अनाचारी और  अधर्मी  स्वयं को  सबसे  अधिक  शक्तिशाली  मानते  हैं  , उन्हें  यह  गलतफहमी  हो  जाती  है  कि  उनका  कोई  बाल-बांका  भी  नहीं  कर  सकता  l   ऐसे  लोग  अपने  से  अधिक  सामर्थ्यवानों  से  नहीं  टकराते ,  ये  ऐसे लोगों  को  सताते  हैं  जो  पहले  से  ही हैरान , परेशान  और  पीड़ित  होते  हैं  l  कमजोर  और  दुर्बल जन   जब  इस  अत्याचार  का  प्रतिरोध  नहीं  कर  पाते  तो  इनका  हौसला  बढ़  जाता  है  और  ये  और अधिक  अत्याचार  करने  पर  उतारू  हो  जाते  हैं  l 
  अत्याचारी  और  अनाचारी  ह्रदयहीन  और  कायर  होते  हैं  ,  ये  अशक्त ,  निरीह  ,   बूढ़े  और  बच्चों  पर  भी  निर्ममता  से  वार  करते  हैं   किन्तु  इन्हें  स्वयं  पर  विश्वास  नहीं  होता  , इनका  अंतर  भय  और  अविश्वास  से  परिपूर्ण  होता  है  l  ये  सदा  डरते  रहते  हैं  कि  कोई   अधिक  बलशाली  इनके  वर्चस्व  को  समाप्त  न  कर  दे  l 
  हमारे  धर्मग्रंथों  में  इसके  उदाहरण  हैं --- वानरराज  बाली  स्वयं  बहुत  बलवान  था  और  उसे  यह  वरदान  था  कि  जो  भी  उसके  सामने  आयेगा  उसका  आधा  बल  उसके ( बाली ) पास  आ  जायेगा  ,  किन्तु  फिर  भी  वह   भयभीत  रहता  था  उसने  अजन्मे  हनुमान , जो  माता  अंजनि  के  गर्भ  में  पल  रहे  थे  ,  को  भयानक  विष  देकर  मारने  का  उपक्रम  किया   और  इसमें  असफल  होने  के  उपरांत   उसने  हर  वह  षड्यंत्र  किया  ,  जिससे  नवजात  हनुमान  समाप्त  हो  जाएँ   l
इसी  तरह  अधर्मी  मामा  कंस  ने  अपनी  ही  बहन   की  सात  नवजात  संतानों  को  मौत  के  घाट  उतार  दिया   l  आखिर  इन  अत्याचारियों  का  अंत  हुआ  l  इनके दुष्कर्मों  का  परिणाम   आने  में  देरी  भले  ही  हो  ,  परन्तु  जिस  अज्ञात  भय  , असंतोष  और  अशांति  की  पीड़ा  से   इनका  समय  गुजरता  है  , वह  बड़े - से - बड़े  दंड  से  कम  नहीं  होता  है  l   कर्मफल  से  कोई  नहीं  बचा  है  l