20 July 2018

WISDOM ------

  संकल्प  शक्ति  के  अभाव  में  लोग  असफलता  का  दोष   भाग्य  पर  मढ़ते  हैं   और  अकर्मण्यता  की  चादर  ओढ़   जीवन  भर  को  सो  जाते  हैं   l  मनुष्य  का  कर्तव्य  है  कि  वह  अपने  जीवन  की  प्राथमिकतायें  तय  करे   ताकि  दिशाहीन  विचारों  को    संगठित  कर  संकल्प  का  रूप  दिया  जा  सके   एवं  उच्च  उद्देश्यों  को  पूरा  किया  जा  सके   l   भगवान  राम  के  संकल्प  बल  ने  समुद्र  को  राह  देने  पर  मजबूर  किया  l  दुबले - पतले  महात्मा  गाँधी   की  संकल्प  शक्ति   अंग्रेजों  की  विशाल  हुकूमत  को  नाकों  चने  चबवा  दिए   l 

19 July 2018

WISDOM ---- मूर्द्धन्यजनों की ईर्ष्या अन्यों की अपेक्षा अधिक घातक और व्यापक परिणाम प्रस्तुत करती है

  एक  बार  वैशाली  क्षेत्र  में  दुष्ट - दुराचारियों  का  आतंक  इतना  बढ़ा  कि  उस  प्रदेश  में  भले आदमियों  का  रहना  कठिन  हो   गया  l  लोग  घर  छोड़कर  अन्यत्र  सुरक्षित  स्थानों  के  लिए  पलायन  करने  लगे  l   इन  भागने  वालों  में  ब्राह्मण  समुदाय  का  भी  बड़ा  वर्ग  था   l  वैशाली  के  ब्राह्मणों  ने  महर्षि  गौतम  के  आश्रम  में  रहना  उचित  समझा  l  वे  पहुंचे ,  आश्रय  मिल  गया  l वहां  न  कोई   कष्ट  था , न  भय  l 
   एक  दिन  महर्षि  नारद  उधर  से  निकले  ,  कुछ  समय   महर्षि  गौतम  के  आश्रम  में  रुके  l  इस  समुदाय  के  संरक्षण  की  नयी  व्यवस्था  देखकर  वे  बहुत  प्रसन्न  हुए  और   महर्षि  गौतम  की  उदारता  की  बहुत  प्रशंसा  करने  लगे   l 
  नारदजी   द्वारा    महर्षि  गौतम   की  इतनी  प्रशंसा   ब्राह्मण  समुदाय  से  देखी    न  गई  l  वे  ईर्ष्या  की  आग  में  जलने  लगे  l   आपस  में  यह  चर्चा  करने  लगे  कि  हमने  ही  उन्हें  यह  यश  दिलाया ,  हम  लोगों  के  यहाँ  आकर  रहने  से  ही  गौतम  ने  इतना  यश  कमाया  ,  अब  हम  ही  अपना  पुरुषार्थ  दिखाकर   उन्हें  नीचा  दिखायेंगे  l  
  षड्यन्त्र  रचा  गया   l  रातोंरात  मृत  गाय   आश्रम  के  आंगन  मे  डाली  गई   l  कुहराम  मच  गया  l  यह  गौतम  ने   मारी  है  l  हत्यारा  है ,  पापी  है  ,इसका  भंडाफोड़  करेंगे   l 
  गौतम  योग  साधना  से  उठे   और  यह  कुतूहल  देखकर   अवाक्  रह  गए  ,  उन्होंने  इन  आगंतुकों  को  विदा  करने  का  निश्चय  किया  और  कहा ----  " आप  लोग  जहाँ  रहते  थे  वहीँ  चले  जाएँ  l  अपनी   ईर्ष्या  से  जिस  क्षेत्र  को  कलुषित  किया   था  ,  उसे  स्नेह - सौजन्य  के  सहारे  सुधारने  का  नए  सिरे  से  प्रयत्न  करें   l  "  समुदाय  ने  ऋषि  की  बात  मानी   और  कलुषित  क्षेत्र  पुन:  पवित्र  हो  गया   l   

18 July 2018

WISDOM ----- सार्थक मौन उसे कहते हैं जब मन में सद्चिन्तन होता रहे

   चुप  रहकर  मन  में   ईर्ष्या - द्वेष  का  बीज  बोते  रहने  को  मौन  नहीं  कहा  जाता  l   यह  तो  और  भी  खतरनाक   व  हानिकारक    सिद्ध  हो  सकता  है   l   मौन  के  साथ  श्रेष्ठ  चिंतन  और   ईश्वर  स्मरण  आवश्यक  है  तभी  मौन  की  सार्थकता  है   l    ऐसे  सार्थक  मौन  से  आत्मशक्ति     उत्पन्न   होती  है   l   मौन  रहकर  श्रेष्ठ  चिंतन  करने  से  आंतरिक    ऊर्जा    व्यर्थ  के  नकारात्मक  विचारों   में  नष्ट  नहीं  हो     पाती   l   प्रत्येक  श्रेष्ठ  और   महान  कार्य  की   सफलता   में    गंभीर  मौन  सहायक  रहा  है   l 
  अरुणाचलम  के  महर्षि  रमण  सदैव  मौन  रहते  थे   l  बिना  बोले  वह  हरेक  की   जिज्ञासा  को  शांत  करते  और हर  कोई  उनसे  अपनी  गंभीर  समस्या  का  समाधान  अनायास  पा  जाता  था  l 
  महात्मा  गाँधी  के  मौन  का  प्रभाव  विलक्षण  और  अद्भुत  था  l   अत:  सप्ताह  में  एक  निश्चित  दिन  कुछ  घंटे  मौन  अवश्य  रहना  चाहिए   l    

16 July 2018

WISDOM ----- मनुष्य जब तक स्वयं बदलना न चाहे , तब तक उसे कोई भी शक्ति बदलने में समर्थ नहीं हो सकती l

   मनुष्य  स्वयं  का   सबसे  बड़ा  और  बुरा  दुश्मन  है  l  इसने  काल  और  इतिहास से   कुछ  नहीं  सीखा   l  इसने  आदिम  पशुता  और   दुष्टता  को  अभी  भी  जीवन्त  बनाये  रखा l
  अपने  पिता  बिन्दुसार  से     सम्राट   अशोक  को   सुविस्तृत  राज्य  प्राप्त  हुआ  l  परन्तु  उसकी  तृष्णा  और  अहंकार  ने   उसे  चैन  नहीं  लेने  दिया   l  आस - पास  के  छोटे - छोटे  राज्यों  को  जीतकर   उसने  अपने  राज्य  में  मिला  लिया  l   अब    उसने  कलिंग  राज्य  पर  आक्रमण  किया   l  वहां  की  सेना  तथा  प्रजा  ने   अशोक  के  आक्रमण  का   पूरा  मुकाबला  किया   l  उसमे  प्राय:  सारी   आबादी  मृत्यु  के  मुख  में  चली  गई   l  अब  उस  देश  की  महिलाओं  ने  तलवार  उठाई   l  अशोक  इस  सेना  को  देखकर  चकित  रह  गया   l  वह  उस  देश  में  भ्रमण  के  लिए  गया  ,  तो  सर्वत्र  लाशें  ही  पटी  थीं   और  खून  की  धारा  बह  रही  थी   l  अशोक  का  मन  पाप  की  आग  से  जलने  लगा  l  उसने  बौद्ध  धर्म  की  दीक्षा  ली   और  जो  कुछ  राज्य  वैभव  था  ,  उस  सारे  धन  से   बौद्ध  धर्म  के  प्रसार   तथा  उपयोगी  धर्म  संसथान  बनवाये   l   अपने  पुत्र  और  पुत्री  को    धर्म  प्रचार  के  लिए  समर्पित  कर  दिया  l
 परिवर्तन  इसी  को  कहते  हैं  l  एक  क्रूर  और  आततायी  कहा  जाने  वाला   अशोक  बदला  ,  तो  प्रायश्चित  की  आग  में  तपकर   एक  संन्यासी   जैसा  हो  गया ,  सच्चे  अर्थों  में  प्रजापालक  सम्राट  हो  गया  l  

15 July 2018

WISDOM ----- चिंता नहीं विचार करें

 ' सारे  दिन  चिंता  के  बाद    भी   कुछ  हाथ  न   लगेगा   l  पर  जब  कभी  भी   समस्या  का  समाधान  हाथ  लगा  है  ,  वह  ठीक  ढंग  से  सोचने  और  करने  से  ही  लगा  है   l  समस्या  की  चिन्ता  न  कर  समाधान  खोजें  l  
    जेम्स  मिचनर  नामक  अमरीकी  नागरिक    द्वितीय  विश्व युद्ध     में    अमरीका  में    नौसैनिक  अधिकारी  था   l  एक  बार  सुरक्षा  की  द्रष्टि    वह  प्रशान्त   महासागर  में    मोटरबोट  में   घूम  रहा  था    कि रास्ता   भटक  कर  एक  बिलकुल  निर्जन  द्वीप  में    पहुँच  गया  l   बहुत  सोच विचारकर  उसने  निश्चय  किया   कि  क्यों    कुछ  लिखा  जाये  l  अपने  सैन्य   जीवन    में   उसने    जो  कुछ  देखा  ,  सुना  और  अनुभव  किया  था  ,  उसे  कहानियों  के   कथानक  के  रूप  में    अपनी  मोटरबोट  में   मौजूद   पोर्टेबल   टाइपराइटर  में   उतारना  आरम्भ   कर  दिया   l   बाद  में    यही  उसकी  प्रथम  पुस्तिका   " टेल्स   ऑफ  दि  साउथ   पैसिफिक "  के  नाम  से  प्रख्यात  हुईं   l  अपनी  पांडुलिपि  लेकर   वह  वापस  बाहर  आने   और  अपने  शहर  पहुँचने  में    सफल  हुआ   l  अपनी  इस  कृति  पर   उसे  पत्रकारिता   का  सर्वोच्च    पुलित्जर  पुरस्कार  मिला  ,  इसके  बाद  उसकी  लेखन  प्रतिभा  विकसित  होती  गई   l  

14 July 2018

WISDOM -----

 संसार  में  जितने  भी  प्रतिभाशाली  महापुरुष  हुए   हैं ,  अत्यंत  निर्धनता  की  स्थिति  में  रहते  हुए  भी  वे   धन  का  लालच , पद  का  प्रलोभन   और  उच्च  वर्ग  के  दबाव  के  सामने  झुके  नहीं  ,  जीवन  भर  उसका  साहस पूर्वक  सामना  करते  रहे    और  समाज  सेवा  के , पीड़ा  निवारण  के  कार्यों   को  करते  रहे   l 
                    अंग्रेज  शासक  चार्ल्स  द्वितीय   के  सांसदों  में    मार्वल  एक  ऐसा  प्रतिभाशाली  सदस्य  था   जिससे  निरंकुश  शासक  को   अपनी  सत्ता  छीन  जाने  का  सतत  भय  बना  रहता  था  l  जनता  उसके  विरुद्ध  थी   और   मार्वल  को  अपना  नेता  मानती  थी  l   राजा  ने  सभी  प्रमुख  व्यक्तियों  को   कामिनी - कांचन  का  प्रलोभन  देकर   अपने  पक्ष  में  कर  लिया   फिर  भी  मार्वल  को  वह  अपनी  मुट्ठी  में  न  ले  सका  l  चार्ल्स  के  लाखों  प्रयत्न  भी  उसे  उसके  पथ  से  डिगा  न सके  l    उसका  कोषाध्यक्ष  डेनवी   जब  एक  लाख  पौंड    लेकर    सांसद  के  पास  पहुंचा   तो  उसने  यह  कहते  हुए वापस कर  दिया  कि---- " मैं  यहाँ  उन  लोगों  की  सेवा   करने  आया  हूँ   जिन्होंने  मुझे  चुन कर  भेजा  है   l  अपनी  स्वार्थ पूर्ति  के  लिए  राजा    और  किसी  , मंत्री  को  चुन  ले  ,  मैं  उनमे  से  नहीं  हूँ   l "  
  मार्वल  की  सादगी  और  चरित्र  निष्ठा  आज  भी  लोगों  के  लिए  प्रेरणास्रोत  बनी  हुई  है  l   उसकी  समाधि  पर     अंकित   ये  शब्द   आज  भी  सार्थक  हैं  ----- " अच्छे  लोग  उससे  प्यार  करते  थे  ,  बुरे  लोग  उससे  डरते  थे  ,  कुछ  लोग  उसका  अनुकरण  करते  थे    परन्तु  उसकी  बराबरी  करने  वाला  कोई  न  था   l  "

13 July 2018

WISDOM ---- संगठन की शक्ति

  संगठन  में  शक्ति  होती  है  ,  लेकिन  यह  भी  जरुरी  है   कि   वे  नैतिकता  ,  मर्यादा  के  आधार  पर  संगठित  हों   l  अनैतिकता  और  अधर्म न  हो  l
    पांडवों  के  अज्ञातवास  से  लौटने   के  बाद  भगवान  श्रीकृष्ण  ने  उनकी  मन:स्थिति  परखी  और  परिस्थिति  को  देखते  हुए   कौरवों  से  संघर्ष  हेतु   उन्हें  महाभारत  में  प्रवृत  किया   l  असमंजस  को  देखते  हुए   उन्होंने  कहा  -- तुम्हारा  विजयी  होना  सुनिश्चित  है  ,  क्योंकि  तुम  पांच  होते  हुए  भी  एक  हो   और  कौरव गण  सौ  होते  हुए  भी  अलग - अलग  मत  वाले  हैं   l  संघ  शक्ति  के  कारण  ही  नीति - पक्ष  की  विजय  होती  है   l  
  हुआ  भी   यही  l  पांडवों  में  कोई  सेनापति  नहीं  था   l  प्रतीक  रूप  में  पांच  पांडवों  को  छोड़कर 
 धृष्टद्दुम्न  को  सेनापति  पद  दे  दिया  गया  l  संगठन  - शक्ति ,  सहयोग - सहकार  के  कारण  वे  विजयी  हुए   , परन्तु  कौरव गण  सेनापति  पद  के  लिए  ही  लड़ते  रहे  ,  परस्पर  विरोध - विग्रह  ही   उनकी  हार  का  मूल  कारण  बना   l