इस संसार में अँधेरे और उजाले का निरंतर संघर्ष है l अंधकार की शक्तियां निरंतर सामूहिक रूप से उजाले को रोकने का भरसक प्रयास करती हैं l ये प्रयास हर युग में हुए हैं , बस ! उनका तरीका अलग -अलग है l रावण अपने राक्षसों को आदेश देता था कि जाओ , कहीं भी यज्ञ , हवन आदि पुण्य कार्य हो रहे हों तो उन्हें नष्ट करो , उनमें विध्न , बाधाएं उपस्थित करो , ऋषि -मुनियों को मार डालो , कोई संकोच नहीं l हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान कहता था , जो उसे न पूजे , उसे फिर अपनी जिन्दगी जीने का कोई हक नहीं l महाभारत काल में अत्याचार , अन्याय और षड्यंत्रों की विस्तृत श्रंखला के रूप में अंधकार की शक्तियां प्रबल रहीं l महारानी द्रोपदी को अपमानजनक शब्दों का सामना करना पड़ा l कलियुग आते -आते लोगों की मानसिकता विकृत होने लगी l वीरता का स्थान कायरता ने ले लिया l जो आसुरी प्रवृत्ति के हैं , उनमें निहित दुर्गुण इतने प्रबल हो गए कि उन दुर्गुणों के भार ने असुरों के मनोबल को बिलकुल समाप्त कर दिया , उन्हें कायर बना दिया इसलिए अब ऐसे असुर उजाले को मिटाने के लिए अनेक कायराना तरीके अपनाते हैं l चाहे भगवान बुद्ध हों , स्वामी विवेकानंद हों या अध्यात्म पथ को कोई भी पथिक हो , उसके चरित्र पर प्रहार करते हैं ताकि उसका मनोबल टूट जाए , वह अपने पथ से भटक जाए l उनके जीवन में आँधी -तूफ़ान लाने का भरपूर प्रयास करते हैं लेकिन अंत में जीत सत्य की होती है l ऐसे कायर असुरों के प्रहार से अपने आत्म बल को मजबूत बनाए रखने का एक ही तरीका है कि ईश्वर के विधान पर अटूट आस्था और विश्वास हो , वार चाहे कितना ही गहरा हो अपने मन को न गिरने दें l दुनिया क्या कहती है , इस पर ध्यान न दें l उस परम सत्ता की निगाह में श्रेष्ठ बनने का प्रयास करें l