9 April 2023

WISDOM -----

   पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " किसी  को  ईश्वर  संपदा  , विभूति  अथवा  सामर्थ्य  देता  है   तो  निश्चित  रूप  से   उसके  साथ  कोई  न  कोई   सद्प्रयोजन  जुड़ा  होता  है  l  हमें  यह  देखना  चाहिए  कि  उसका  लाभ  गलत  व्यक्ति  तो  नहीं  उठा  रहे  हैं  l  नहीं  तो  ये   अच्छाइयाँ   व्यर्थ  चली  जाएँगी   l  "  श्री  हनुमान जी  के  चरित्र  से  हमें  यही    सीख    मिलती  है   कि   सद्प्रयोजनों  के  लिए , अत्याचार  व  अन्याय  के  अंत  के  लिए  जब   अपनी  शक्ति  और  विभूतियों  का  सदुपयोग  किया  जाता  है   , तब  असंभव  भी  संभव  हो  जाता  है   l  श्री  हनुमान जी   भगवान  श्रीराम  के  प्रिय  भक्त  और  उनके  सबसे  बड़े  सेवक  हैं  l  भगवान  के  कार्य  को  पूरा  करना  ही  उनका  लक्ष्य  था  l  अत्याचारी , अन्यायी   कितना  भी  शक्ति संपन्न  क्यों  न  हो , उन्होंने  उसका  साथ  नहीं  दिया  ,  उन्होंने  बाली  को  छोड़कर  सुग्रीव  का  साथ  दिया  l  जब  समुद्र  को  पार  कर  श्री  हनुमान जी  लंका  पहुंचे  , तो  लंका  के  द्वार  पर   लंका  की  रक्षा  करने  वाली  लंकिनी  नामक  राक्षसी  मिली  , उसने   उन्हें  रोकने  का  प्रयास  किया  l  श्री  हनुमान जी  ने  देखा  कि  यह  लंकिनी  अत्याचारी  और  अन्यायी  रावण  की  सेवा  में  है  , जिसने  छल  से  माता  सीता  का  हरण  किया  है  ,  एक  गलत  व्यवस्था  की  रक्षा  कर  रही  है   इसलिए  उस  पर  प्रहार  करना  चाहिए  , तब  उन्होंने  मुक्का  मारकर  लंकिनी  को   घायल  कर  दिया      l