22 November 2022

WISDOM -----

 हम  अपने  कष्टों  के  लिए  हमेशा  दूसरों  को  दोष  देते  हैं   लेकिन  सच   ये  है  कि  व्यक्ति  की  अपनी  ही  कमजोरियां  हैं  जिनकी  वजह  से  वह  कष्ट  भोगता  है  l   ' मोह ' के  कारण  कैसे   व्यक्ति  बंधनों  में  बंध  जाता  है  , इसे  समझाने  के  लिए  आचार्य जी  ने  एक  कथा  कही  है --- ' वैसे  तो  भँवरे  को  सभी  फूलों  से  प्यार  होता  है  , पराग  रस  के  लोभ  में   हर  बाग़  में  प्रत्येक  फूल  पर  मंडराता  घूमता  है  l  यह  भंवरा  सबसे   अधिक    कमल  के  फूल   को  प्यार  करता  है   और   अपने  इस  अतिमोह  में  कभी -कभी  वह  अपने   प्राण  ही  गँवा  देता  है  l  सुबह  से  साँझ  तक   कमल  के  सौन्दर्य  और   स्वाद  में  खोया  हुआ  भँवरा  साँझ  होने  पर  भी   उसके  मोह  से  नहीं  निकल   पाता  l  साँझ  होने  पर  सूर्य अस्त  की  वेला  में   कमल  की  पंखुडियां  बंद  होने  लगती  हैं  ,  पर  कमल  के  मोह  में  बंधा  भंवरा   वही  जस -का -तस  बैठा  रहता  है   और  कमल  के  पूरी  तरह  बंद  होने  पर   वह  भ्रमर  उसी  में  कैद कैद  हो  जाता  है  l  जो  भ्रमर  अपने  पराक्रम  से   कठोर  कष्ट  को  भी   काटकर  चूर -चूर  कर  देता  है  ,  वही  मोह  विवश  होने  पर  कोमल  पंखुड़ियों  को  नहीं  काट  पाता  l  उन्ही  के  बीच  सिकुड़ा  बैठा  रहता  है  l  उसे  प्रतीक्षा  रहती  है  सुबह  होने  की  , परन्तु  वह  सुबह  उसके  जीवन  में  कभी  नहीं  आती  l  कमल  के  अन्दर  प्राणवायु  के  अभाव  में  उसके  प्राण  निकल  जाते  हैं   अथवा  सरोवर  में  स्नान  करने   आए   हाथी  उस  समूची  कमलनाल  को  ही   उखाड़  कर  खा  जाते  हैं  l  उस  भ्रमर  के  भाग्य  में  मृत्यु  के  अलावा  और  कुछ  नहीं  होता  l    इसी  तरह  मनुष्य  मोहजाल  में  फंसकर   अपने    अस्तित्व  को  भुला  बैठता  है  l