11 May 2024

WISDOM -----

   दो  बन्दर  एक  दिन  घूमते -घूमते  एक  गाँव  के  समीप  पहुंचे  l  उन्होंने  वहां  फलों  से  लदा    पेड़  देखा  l  एक  बन्दर  ने  दूसरे  से   कहा ----"  इस  पेड़  को  देखो  l  ये  फल  कितने  सुन्दर  दिख  रहे  हैं  l  ये  अवश्य  ही  स्वादिष्ट  होंगे  l  चलो  हम  दोनों  पेड़  पर  चढ़कर  फल  खाएं  l  ये  अवश्य  ही  स्वादिष्ट  होंगे  l "  दूसरा  बन्दर  बुद्धिमान  था  , उसने  कहा---- " नहीं , नहीं  , जरा  ठहरो  l  यह  पेड़  गाँव  के  समीप  है  ,  यदि  ये  फल  अच्छे  होते  तो  गांववाले  इन्हें  तोड़कर  खा  लेते  , इन्हें  पेड़  पर  नहीं  लगे  रहने  देते  l  हमें  जल्दबाजी  में  कोई  भी  निर्णय  नहीं  लेना  चाहिए  l  अचानक  कहीं  से  भी  मिली  भोजन  सामग्री  को  देख -परख  कर  ही   इस्तेमाल  करना  चाहिए  l "  पहले  बन्दर  को  फलों  को  देखकर  लालच  आ  गया  था  , स्वयं  पर  नियंत्रण  नहीं  रख  पा  रहा  था  ,  वह  तेजी  से  पेड़  पर  चढ़  गया   और  फल  खाने  लगा  l   वह  फल  उसका  अंतिम  भोजन   बन  गए  क्योंकि  वे  जहरीले  थे  l  दूसरा  बन्दर  जब  पेड़  के  समीप  पहुंचा  तो  उसने  अपने  साथी  को  मरा  पाया  l  उस  बन्दर  ने  अपने  अन्य  साथियों  को  इकट्ठा  किया  और  समझाया   कि  बाहर  से  अच्छा  दिखने  वाला   भीतर  से  हमारे  लिए  जहरीला   और   घातक  हो  सकता  है  l  हर  चमकने  वाली  चीज  सोना  नहीं  होती  l  जल्दबाजी  न  करें  , सोच -समझकर  ही  निर्णय  लें  l " 

WISDIM --------

  कहते हैं  एक  बार  गोस्वामी  तुलसीदास जी   रात्रि  को  कहीं  से  लौट  रहे  थे   कि   सामने  से  कुछ  चोर  आते  दिखाई  दिए  l  चोरों  ने  तुलसीदास जी  से  पूछा  --- " कौन  हो  तुम  ? "  तुलसीदास जी  तो  ईश्वर  के  परम  भक्त  थे   और  हर  जीव  को   ईश्वर  का  अंश  मानते  थे  , इस  द्रष्टि  से  उन्होंने  कहा ---" भाई  !  जो  तुम  सो  मैं  l '  चोरों  ने  अपनी  द्रष्टि  से  इसका  अर्थ  लगाया  कि  जैसे  वे  सब  चोर  हैं  वैसे  ही  ये  भी  चोर  हैं  l  इसलिए  चोरों  ने  तुलसीदास जी  को  चोर  मानते  हुए   कहा  -- मालूम  होता  है   तुम  अभी  नए  निकले  हो  , चलो  तुम  भी  हमारे  साथ  चोरी  में  साथ  दो  l  तुलसीदास जी  उनके  साथ  चल  पड़े  l  चोरों  ने  उनसे  कहा  --- तुम  घर  के  बाहर  खड़े  रहना  ,  कोई  आता -जाता  दिखे  तो  हमें  सावधान  कर  देना  , जब  तक  हम  कीमती  सामान   उठाते  हैं  l  अभी  चोरों  ने  अन्दर  जाकर  सामान  खंगालना   शुरू  ही  किया  था   तभी  तुलसीदास जी  ने  अपनी  झोली  से  शंख  निकाला  और  बजाना  शुरू  कर  दिया  l  चोरों  ने  शंख  की  आवाज  सुनी  तो  डरकर  बाहर  निकल  आए  l  बाहर  तो  और  कोई  नहीं  था  , चोरों  ने  तुलसीदास जी  से  कहा ---- " जब  आसपास  कोई  नहीं  है  , फिर  तुमने   शंख   क्यों  बजाया  ? "   तुलसीदास जी  ने  कहा --- मुझे  तो  सर्वत्र  [प्रभु  श्रीराम  दिखाई  दिए  , उन्होंने  तुम  लोगों  को  भी  देख  लिया  होगा  ,  चोरी  करना  पाप  है  प्रभु  अवश्य  दंड  देंगे  ,  इसलिए  मैंने  आप  लोगों  को  सावधान  करना  उचित  समझा  l "    चोर  समझ  गए  कि  ये  तुलसीदास  कोई  चोर  नहीं  हैं  , ये  तो  महात्मा   हैं  l   उनकी  बातों  का  चोरों  पर  ऐसा  असर  हुआ   कि  वे  सब  तुलसीदास जी  के  चरणों  पर  गिर  पड़े   और  कहने  लगे   ---आपने  हमारी  आँखें  खोल   दीं  l  प्रभु  ने  न  जाने  कितनी  बार  हमें  पापकर्म  करते  हुए  देखा  होगा   l  अब  हम  कभी  कोई  बुरा  कर्म  नहीं  करेंगे  l  वे  सब  तुलसीदास जी  के  शिष्य  बन  गए   और  ईश्वर  की  भक्ति  करने  लगे  l