14 March 2025

WISDOM ------

 जीवन  में  आने  वाली  कठिनाइयों  को  चुनौती  मानकर  सकारात्मक  तरीके  से   उनका  मुकाबला  किया  जाए  तो  जीवन  में  सफलता  अवश्य  मिलती  है  l  हमारे  महाकाव्य  हमें  इस  बात  की  शिक्षा  देते  हैं  कि   अंधकार  कितना  ही  घना  क्यों  न  हो  ,  सूर्योदय  अवश्य  होता  है  l  इसी  विश्वास  को  अपने  ह्रदय  में   रखकर  निरंतर  अपने  व्यक्तित्व  को  परिष्कृत  करने  का  प्रयत्न  किया  जाए  तो  सफलता  अवश्य  मिलती  है  l  महाभारत  में  पांडवों की  माता  कुंती  का  चरित्र  अनूठा  है  l   उनकी  महानता  की  कहीं  कोई  तुलना  नहीं  है  l  धृतराष्ट्र  के  भाई   पांडु   से  उनका  विवाह  हुआ  था  l  महाराज   पांडु  को  शिकार  का  शौक  था   ,  एक  दिन   उन्होंने  जंगल  में   अपने  तीर  से  हिरन  को  मारा  ,  वह   एक  ऋषि  थे  जो  हिरन  के  वेश  में   थे  और   उस  समय  अपनी  पत्नी  के  साथ  थे   l  मरते  हुए  ऋषि  ने  पांडु  को  श्राप  दिया  कि  ----अपनी  पत्नी  के  साथ  जब  तुम  इसी  तरह  प्रेम  में  होगे  तो  तुम्हारी  मृत्यु  हो  जाएगी  l  '  इस श्राप  के  कारण  महाराज  पांडु  अपनी  दोनों  पत्नियों  कुंती  और  माद्री  के  साथ   ब्रह्मचारी   का  जीवन  व्यतीत  करने  लगे  l  महारानी  कुंती  ने  अपने  जीवन  में  सादगी  को  अपना  लिया  ,   उन्होंने  अपना  व्यवहार  संतुलित  रखा  ताकि  महाराज  के  जीवन  पर  कोई  आंच  न  आए  l  होनी  को  कौन  टाल  सकता  है  l  एक  दिन  जब  वह  अपनी  दूसरी  पत्नी  माद्री  के  साथ  एकांत  के  पल  में  थे  तब  ऋषि  के  श्राप  का  असर  हुआ  और  उनकी  तत्काल  मृत्यु  हो  गई  l  माद्री  ने  स्वयं  को  उनकी  मृत्यु  का  कारण  मानकर  उसी  समय  अपने  प्राण  त्याग  दिए  l  युवावस्था  में  ही  पति  की  मृत्यु  हो  जाने  से   पांचों  पुत्रों  के  पालन -पोषण  की  जिम्मेदारी  कुंती  पर  आ  गई  l    पिता  का  साया  सिर  पर  से   हटते  ही  दुर्योधन  आदि  कौरवों  के  अत्याचार  और  षड्यंत्र  शुरू  हो  गए  l  कुंती  ने  कभी  हिम्मत  नहीं  हारी  ,  अनेक  कष्टों  को  सहते  हुए  उन्होंने  अपने  बच्चों  की  सही  परवरिश  की  l  यह  कुंती  का  ही  त्याग  और  बलिदान  था  जिसने  पांचों  पांडवों  को  शस्त्र  और  शास्त्र  में  निपुण , धर्म  , सत्य  और  नीति  की  राह  पर  चलने  वाला  बना  दिया  l  दूसरी  ओर  धृतराष्ट्र  की  पत्नी  पतिव्रता  थीं  ,  लेकिन  उन्होंने  अपनी  आँख  पर  पट्टी  बाँध  ली   ताकि  अपने  पति  की  तरह  वे  भी  दुनिया  को  न  देख  सकें  l   इसका    परिणाम  यह  हुआ  कि  वे  अपने  बच्चों  की  गतिविधियों  पर  भी  नजर  नहीं  रख  सकीं  और  सब  साधन  होते  हुए  भी   उनके  जीवन  को  सही  दिशा  न  दे  सकीं  परिणाम स्वरुप  कौरव  अधर्म  और  अन्याय  की  राह  पर  चलने  लगे   और  कौरव  वंश  का  सर्वनाश  हुआ  l