13 March 2025

WISDOM ------

  नकारात्मक  सोच  वाला  व्यक्ति  न  केवल  स्वयं  परेशान  रहता  है  बल्कि  अपने  आसपास  के  लोगों  को  भी  वैसी  ही  नकारात्मक  सोच  का  बना  देता है  l   ऐसे  व्यक्ति  कभी  भी  किसी  भी  कार्य  में  अच्छाई  को  नहीं  देखते  ,  वे  हमेशा  उसमें  से  बुराई  को  ढूंढ  निकालते  हैं  l  इसका  परिणाम  यह  होता  है  कि  वे  स्वयं  उन  बुराइयों  से , नकारात्मकता  से  घिरे रहते  हैं  l  इसका  परिणाम  कभी  भी  शुभ  नहीं  होता  l  ------ महाभारत  का  प्रसंग  है   कि  भीष्म  पितामह  ने  गांधार  नरेश  से  बात  कर  के  उनकी  पुत्री  गांधारी  का  विवाह  धृतराष्ट्र  से   संपन्न  कराया  l  भीष्म  पितामह  कोई  प्रस्ताव  प्रस्तुत  करें  तो  उसे  कोई  अस्वीकार  करने  का  साहस  नहीं  कर  सकता  l  गांधारी  के  भाई  शकुनि  ने  जब  देखा  कि  उसकी  बहन  का  विवाह  एक  अंधे  व्यक्ति  के  साथ  हुआ  है   , भीष्म  पितामह  के  सामने  उनके  पिता  गांधार  नरेश  कुछ  बोल  न  सके   तो  शकुनि   को  बहुत  क्रोध  आया   और  उसके  मन  में  बदले  की  भावना  जाग्रत  हो  गई  कि  वह  किसी  न  किसी  तरह  इसका  बदला  अवश्य  लेगा  l  यहाँ  शकुनि  को  सोच  नकारात्मक  थी  , उसने  यह  नहीं  देखा  कि  उसकी  बहन  एक  विशाल  साम्राज्य  की  कुलवधु  ,  सबके  सम्मान  की  अधिकारिणी  बन  गई   l  एक  ऐसा  साम्राज्य  जिसके  संरक्षक  गंगापुत्र  भीष्म  थे  , एक  से  बढ़कर  एक  शक्तिशाली  राजा -महाराजा  उनके  आगे  सिर  झुकाते  थे  , शस्त्र - शास्त्र  के  ज्ञाता  द्रोणाचार्य  उसमें  आश्रय  पाते  थे  l  विशाल  , एकछत्र  साम्राज्य  का  वैभव  गांधारी  के  चरणों  में  था  l  संसार  का  सब  सुख  और  सम्मान  उसे  मिला  l  यह  सब   अच्छाई ,  सकारात्मकता   शकुनि  को  दिखाई  नहीं  थी  l  उसे  तो  केवल  यही  दिखाई  दे  रहा  था  कि  धृतराष्ट्र  अंधे  हैं  l  उसने  अपना  बदला  लेने  के  लिए  ,  भीष्म  पितामह  द्वारा  संरक्षित  साम्राज्य  की  शांति  भंग  करने  के  लिए  दुर्योधन  को  अपना  हथियार  बनाया  l  वह  निरंतर  दुर्योधन  के  मन  में  पांडवों  के  प्रति  द्वेष  की  भावना  भरता  रहता ,  दुर्योधन  की  मदद  से  अपनी  कुत्सित  चालों  को  अंजाम  देता  l  हस्तिनापुर  का  साम्राज्य  कौरव- पांडवों   के  आपसी  बैर  का    षड्यंत्रों  का  केंद्र  बन  गया  l  इसका  परिणाम  हुआ  --महाभारत  का  महायुद्ध  l  जिस  बहन  के  अंधे  पति  को  देखकर  उसे  दुःख  हुआ , बदले  की  भावना  जाग्रत  हुई ,  उसी  बहन  के  सौ  पुत्र  इस युद्ध  में   मृत्यु  को  प्राप्त  हुए  l  बहन  के  प्रति  ऐसा  कैसा  प्रेम  !  उसे  ऐसा  दुःख  दे  दिया  जिसकी  भरपाई  कभी  नहीं  हो  सकती  ,  पूरा  कौरव  वंश  नष्ट  हो  गया  l   यदि  शकुनि  अपना  गांधार  देश  छोड़कर   अपनी  बहन  के  साथ  हस्तिनापुर  में  नहीं  रहता   तो  इतना  अनर्थ  न  होता  l  यह  प्रसंग  हमें  यही  शिक्षा  देता  है  कि  मनुष्य   का   अपने  जीवन  में  विभिन्न  मानसिकता  के  लोगों  से  सामना  होता  है , व्यवहार  होता  है  l  किसी  की  कोई  बात  बुरी  लगती  है  तो  बदला  लेने  का  सकारात्मक  तरीका  अपनाओ  ,  स्वयं  को  उससे  श्रेष्ठ  साबित  करो  , अपने  व्यक्तित्व  को  ऊँचा  उठाओ  ,  प्रतिपक्षी  स्वयं  ही  हार  जायेगा  l