नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति न केवल स्वयं परेशान रहता है बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी वैसी ही नकारात्मक सोच का बना देता है l ऐसे व्यक्ति कभी भी किसी भी कार्य में अच्छाई को नहीं देखते , वे हमेशा उसमें से बुराई को ढूंढ निकालते हैं l इसका परिणाम यह होता है कि वे स्वयं उन बुराइयों से , नकारात्मकता से घिरे रहते हैं l इसका परिणाम कभी भी शुभ नहीं होता l ------ महाभारत का प्रसंग है कि भीष्म पितामह ने गांधार नरेश से बात कर के उनकी पुत्री गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र से संपन्न कराया l भीष्म पितामह कोई प्रस्ताव प्रस्तुत करें तो उसे कोई अस्वीकार करने का साहस नहीं कर सकता l गांधारी के भाई शकुनि ने जब देखा कि उसकी बहन का विवाह एक अंधे व्यक्ति के साथ हुआ है , भीष्म पितामह के सामने उनके पिता गांधार नरेश कुछ बोल न सके तो शकुनि को बहुत क्रोध आया और उसके मन में बदले की भावना जाग्रत हो गई कि वह किसी न किसी तरह इसका बदला अवश्य लेगा l यहाँ शकुनि को सोच नकारात्मक थी , उसने यह नहीं देखा कि उसकी बहन एक विशाल साम्राज्य की कुलवधु , सबके सम्मान की अधिकारिणी बन गई l एक ऐसा साम्राज्य जिसके संरक्षक गंगापुत्र भीष्म थे , एक से बढ़कर एक शक्तिशाली राजा -महाराजा उनके आगे सिर झुकाते थे , शस्त्र - शास्त्र के ज्ञाता द्रोणाचार्य उसमें आश्रय पाते थे l विशाल , एकछत्र साम्राज्य का वैभव गांधारी के चरणों में था l संसार का सब सुख और सम्मान उसे मिला l यह सब अच्छाई , सकारात्मकता शकुनि को दिखाई नहीं थी l उसे तो केवल यही दिखाई दे रहा था कि धृतराष्ट्र अंधे हैं l उसने अपना बदला लेने के लिए , भीष्म पितामह द्वारा संरक्षित साम्राज्य की शांति भंग करने के लिए दुर्योधन को अपना हथियार बनाया l वह निरंतर दुर्योधन के मन में पांडवों के प्रति द्वेष की भावना भरता रहता , दुर्योधन की मदद से अपनी कुत्सित चालों को अंजाम देता l हस्तिनापुर का साम्राज्य कौरव- पांडवों के आपसी बैर का षड्यंत्रों का केंद्र बन गया l इसका परिणाम हुआ --महाभारत का महायुद्ध l जिस बहन के अंधे पति को देखकर उसे दुःख हुआ , बदले की भावना जाग्रत हुई , उसी बहन के सौ पुत्र इस युद्ध में मृत्यु को प्राप्त हुए l बहन के प्रति ऐसा कैसा प्रेम ! उसे ऐसा दुःख दे दिया जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती , पूरा कौरव वंश नष्ट हो गया l यदि शकुनि अपना गांधार देश छोड़कर अपनी बहन के साथ हस्तिनापुर में नहीं रहता तो इतना अनर्थ न होता l यह प्रसंग हमें यही शिक्षा देता है कि मनुष्य का अपने जीवन में विभिन्न मानसिकता के लोगों से सामना होता है , व्यवहार होता है l किसी की कोई बात बुरी लगती है तो बदला लेने का सकारात्मक तरीका अपनाओ , स्वयं को उससे श्रेष्ठ साबित करो , अपने व्यक्तित्व को ऊँचा उठाओ , प्रतिपक्षी स्वयं ही हार जायेगा l