मनुष्य यदि सुधरना चाहे और सुख शांति से जीवन जीना चाहे तो प्रत्येक धर्म में उनके पवित्र ग्रन्थ हैं , प्रेरक कथाएं हैं लेकिन यदि उसमें विवेक नहीं है तो वह हर अच्छाई में से बुराई ढूंढकर , उस बुराई को ही अपने व्यवहार में लाकर उसे सत्य सिद्ध करने की हर संभव कोशिश करता है l जैसे रामायण पढ़कर , सीरियल देखकर भगवान राम की मर्यादा , भरत का आदर्श किसी ने नहीं सीखा l रावण के भी दुर्गुण सबने सीखे लेकिन उसके जैसा ज्ञानी और विद्वान कोई नहीं बना l इसी तरह महाभारत से अर्जुन जैसी वीरता , युधिष्ठिर का सत्य और धर्म का आचरण को अपने जीवन व्यवहार में लाना सबको ही कठिन लगता है लेकिन दुर्योधन का षड्यंत्र , शकुनि की कुटिल चालें और सात महारथियों का मिलकर अभिमन्यु को मारना सबको सरल लगता है l ऐसी विवेकहीनता ने ही कलियुग को अत्याचार और पाप के चरम शिखर पर पहुंचा दिया है l भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म के नाश के लिए जो नीति अपनायी उसका अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होता है l महाभारत का प्रसंग है कि --- शल्य पांडवों के मामा थे , वे पांडवों के पक्ष में ही युद्ध करने के लिए आ रहे थे l जब दुर्योधन को इस बात का पता चला तो उसने मार्ग में उनका स्वागत सत्कार कर अपनी कुटिलता से उनको अपने पक्ष में कर लिया l महाराज शल्य पांडवों के पास अफ़सोस व्यक्त करने आए कि अब वे विवश हैं और दुर्योधन के पक्ष में रहकर ही युद्ध करेंगे l तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा --जब आप युद्ध में कर्ण के सारथी बनो तब अपने शब्दों के मायाजाल से हर पल उसका मनोबल कम करते रहना l भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि कर्ण को पराजित करना असंभव है , यदि उसका मनोबल कम हो जायेगा , उसका आत्मविश्वास कम हो जायेगा तो उसे पराजित किया जा सकता है l शल्य ने यही किया l भगवान श्रीकृष्ण की यह नीति सफल हुई l कर्ण अधर्म और अन्याय के साथ था इसलिए उसे पराजित करना अनिवार्य था l अब इस युग में यह नीति लोगों को बहुत सरल लगती है l इसे सीखकर अब लोग अपनी सफलता के लिए कठिन परिश्रम नहीं करते , उनसे जो श्रेष्ठ है उसको हल पल अपमानित कर के , जो बुराइयाँ , जो कमियां उसमें नहीं हैं , उन्हें भी उस पर थोपकर , चारों तरफ उनका डंका पीटकर उसे बदनाम करने की हर संभव कोशिश करते हैं ताकि उसका मनोबल कम हो जाए , वो परिस्थितियों से हार जाए और वे हा -हा कर के हँसते हुए स्वयं को सफल और श्रेष्ठ बताकर सम्मान खींच लें l हिटलर ने भी कहा है --एक झूठ को सौ बार बोला जाए तो वह सत्य लगने लगता है l कलियुग में ऐसे ही झूठ बोलने वालों की श्रंखला है l इस युग की सारी समस्याएं दुर्बुद्धि और विवेकहीनता के कारण हैं l आज की सबसे बड़ी जरुरत सद्बुद्धि की है l पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने कहा है --- 'गायत्री मन्त्र ' सद्बुद्धि प्रदान करता है , जैसे भी संभव को इस मन्त्र का वैश्विक स्तर पर जप होना चाहिए l तभी संसार में सुख -शांति होगी l
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