30 March 2025

WISDOM -----

  मनुष्य  यदि  सुधरना  चाहे   और  सुख  शांति  से  जीवन  जीना  चाहे  तो  प्रत्येक  धर्म  में  उनके पवित्र  ग्रन्थ  हैं , प्रेरक  कथाएं  हैं   लेकिन  यदि   उसमें  विवेक  नहीं  है   तो  वह  हर  अच्छाई  में  से  बुराई  ढूंढकर  ,   उस  बुराई  को  ही  अपने  व्यवहार  में  लाकर  उसे  सत्य  सिद्ध  करने  की  हर  संभव  कोशिश  करता  है  l  जैसे  रामायण  पढ़कर  , सीरियल  देखकर   भगवान  राम   की  मर्यादा , भरत  का  आदर्श  किसी  ने  नहीं  सीखा  l   रावण  के  भी  दुर्गुण  सबने   सीखे  लेकिन  उसके  जैसा  ज्ञानी  और  विद्वान  कोई  नहीं  बना  l   इसी तरह  महाभारत  से  अर्जुन  जैसी  वीरता , युधिष्ठिर  का  सत्य  और  धर्म  का  आचरण   को  अपने  जीवन व्यवहार  में  लाना  सबको  ही  कठिन  लगता  है   लेकिन  दुर्योधन  का  षड्यंत्र , शकुनि  की   कुटिल  चालें   और   सात  महारथियों  का  मिलकर  अभिमन्यु  को  मारना  सबको  सरल  लगता  है  l  ऐसी  विवेकहीनता  ने  ही   कलियुग  को  अत्याचार  और  पाप  के  चरम  शिखर  पर  पहुंचा  दिया  है  l  भगवान  श्रीकृष्ण  ने  अधर्म  के  नाश  के  लिए  जो  नीति  अपनायी   उसका  अपने  स्वार्थ  के  लिए  इस्तेमाल   बहुत  बड़े  पैमाने  पर  होता   है  l   महाभारत  का  प्रसंग  है  कि --- शल्य  पांडवों  के  मामा  थे  , वे  पांडवों  के  पक्ष  में  ही  युद्ध  करने  के  लिए  आ  रहे  थे  l  जब  दुर्योधन  को  इस  बात  का  पता  चला  तो  उसने  मार्ग  में  उनका  स्वागत  सत्कार  कर   अपनी  कुटिलता  से  उनको  अपने  पक्ष  में  कर  लिया  l  महाराज  शल्य  पांडवों  के  पास  अफ़सोस  व्यक्त  करने  आए  कि  अब  वे  विवश  हैं  और  दुर्योधन  के  पक्ष  में  रहकर  ही  युद्ध  करेंगे  l  तब  भगवान  श्रीकृष्ण  ने  उनसे  कहा  --जब  आप  युद्ध  में  कर्ण  के  सारथी  बनो  तब  अपने  शब्दों  के  मायाजाल  से  हर पल  उसका  मनोबल  कम  करते  रहना  l  भगवान  श्रीकृष्ण  जानते  थे  कि  कर्ण   को  पराजित  करना  असंभव  है  ,  यदि  उसका  मनोबल  कम  हो  जायेगा  ,  उसका  आत्मविश्वास  कम  हो  जायेगा  तो  उसे  पराजित  किया  जा  सकता  है  l  शल्य  ने  यही  किया   l  भगवान  श्रीकृष्ण  की  यह  नीति  सफल  हुई  l  कर्ण  अधर्म  और  अन्याय  के  साथ  था  इसलिए  उसे  पराजित  करना  अनिवार्य  था   l  अब   इस  युग  में  यह  नीति  लोगों  को  बहुत  सरल  लगती  है  l  इसे  सीखकर  अब  लोग  अपनी  सफलता  के  लिए  कठिन  परिश्रम  नहीं  करते  ,  उनसे  जो  श्रेष्ठ  है   उसको  हल  पल  अपमानित  कर  के  ,  जो  बुराइयाँ  , जो  कमियां  उसमें  नहीं  हैं , उन्हें  भी  उस  पर  थोपकर  ,  चारों  तरफ  उनका  डंका  पीटकर   उसे  बदनाम  करने  की  हर  संभव  कोशिश  करते  हैं   ताकि  उसका  मनोबल  कम  हो  जाए , वो  परिस्थितियों  से  हार  जाए    और  वे  हा -हा  कर  के  हँसते  हुए  स्वयं  को  सफल  और  श्रेष्ठ   बताकर  सम्मान  खींच  लें  l  हिटलर  ने  भी  कहा  है  --एक  झूठ  को  सौ  बार  बोला  जाए  तो  वह  सत्य  लगने  लगता  है  l  कलियुग  में  ऐसे  ही  झूठ  बोलने  वालों  की  श्रंखला  है  l  इस  युग  की  सारी  समस्याएं   दुर्बुद्धि  और  विवेकहीनता  के  कारण  हैं  l  आज  की  सबसे  बड़ी  जरुरत  सद्बुद्धि  की  है  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  ने  कहा  है  --- 'गायत्री  मन्त्र '  सद्बुद्धि  प्रदान  करता  है  , जैसे  भी  संभव  को   इस  मन्त्र  का    वैश्विक  स्तर  पर  जप  होना  चाहिए  l  तभी  संसार  में  सुख -शांति  होगी  l  

No comments:

Post a Comment