हर युग की कहानी अलग है l उनकी तुलना संभव नहीं है l श्री राम और रावण का युद्ध धर्म और अधर्म का युद्ध था , रावण के अन्याय और अत्याचार का अंत करने के लिए था l लेकिन इसमें एक खास बात थी कि भगवान राम के पक्ष में कहीं से भी कोई राजा युद्ध करने नहीं आया l उन्होंने रीछ , वानर , भालुओं , बंदरों की मदद से यह युद्ध लड़ा और रावण का अंत किया l भगवान श्रीराम ने इन प्राणियों की मदद से युद्ध कर संसार को यह सन्देश दिया कि स्रष्टि का प्रत्येक प्राणी महत्वपूर्ण है , प्रकृति का प्रत्येक कण उपयोगी है और मानव की मदद के लिए है इसलिए हमें स्रष्टि के प्रत्येक कण के साथ संतुलन बनाकर चलना चाहिए तभी हम जीवन में सफल हो सकते हैं l महाभारत का महायुद्ध भी अधर्म , अन्याय , अत्याचार का अंत कर धर्म और न्याय की स्थापना के लिए हुआ था l इस युद्ध के माध्यम से भगवान ने संसार को कर्मफल विधान को समझाया l इस युद्ध से यह स्पष्ट हुआ कि छल , कपट , षड्यंत्र , धोखा करने वालों का कैसा अंत होता है l व्यक्ति सबसे छिपकर छल , षड्यंत्र , धोखा करता है और सोचता है कि उसे किसी ने नहीं देखा , किसी ने नहीं जाना l लेकिन ईश्वर हजार आँखों से देख रहा है और ऐसे छिपकर अपराध करने वालों को कभी क्षमा नहीं करते l कलियुग की तो बात ही अलग है l यहाँ सत्य और धर्म पर चलने वाले बहुत कम है , उन्हें भी नकारात्मक शक्तियां चैन से जीने नहीं दे रहीं l इसलिए जब अधिकांश आसुरी प्रवृत्ति के हों तो धर्म और अधर्म की लड़ाई संभव ही नहीं है l कौन किस को मारे , सब एक नाव में सवार हैं l इसलिए कलियुग में प्राकृतिक आपदाएं , बाढ़ , भूकंप , सुनामी , महामारी आदि सामूहिक दंड के रूप में आती हैं किसी न किसी रूप में सभी पापकर्म में लिप्त हैं इसलिए सामूहिक दंड तो भोगना ही पड़ेगा जैसे एक मांसाहारी मांस खाकर पाप करता है तो उस मांस के लिए प्राणी का वध करने वाला , उसे बेचने वाला , उसे बेचने की अनुमति देने वाला , फिर उसे खरीदने वाला , यह सब देखने वाला , और देखकर चुप रहने वाला और ऐसे ही विभिन्न पापकर्मों में बहती दरिया में हाथ धोने वाला सभी पाप के भागीदार हैं l इसलिए उचित यही है कि सामूहिक दंड के लिए तैयार रहें l और ईश्वर से प्रार्थना करें , उनका नाम स्मरण करें ताकि मुक्ति तो मिले अन्यथा इस युग में ऐसे विभिन्न प्रकार के पाप करके भूत , -प्रेत , पिशाच और न जाने किन -किन योनियों में भटकना पड़े , ईश्वर का विधान कौन जान सकता है l कहते हैं जब जागो , तभी सवेरा l अब भी मनुष्य सुधर जाए , धर्म का नाटक करने के बजाय सन्मार्ग पर चले , अपनी गलतियों को सुधारे l फिर ईश्वर तो सब पर कृपा करते हैं l
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