वर्तमान समय में प्राकृतिक आपदाएं , आकस्मिक मृत्यु , दुर्घटनाएं ---प्रकृति की नाराजगी और चेतावनी का संकेत है l प्रत्यक्ष रूप में इसके अनेक कारण हो सकते हैं लेकिन कुछ कारण ऐसे भी होते हैं जो दिखाई नहीं देते l अनेक लोग गुप्त रूप से अपने स्वार्थ की पूर्ति और ईर्ष्या द्वेष के कारण दूसरों को नुकसान पहुँचाने के लिए नकारात्मक शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं l ऐसी नकारात्मक शक्तियां वायुमंडल में ही विचरण करती हैं l जिस किसी की ओर लक्ष्य कर के इन्हें भेजा जाता है , उसका तो ये नुकसान करती ही हैं , इसके साथ ही वे पूरे वायुमंडल को भी प्रदूषित करती हैं जैसे कोई बड़ी बदबूदार चीज एक स्थान से दूसरे स्थान जाएगी तो वह पूरा रास्ता बदबू से भर जायेगा और उसका असर सभी पर किसी न किसी रूप में अवश्य होगा l इस समय में धन और महत्वाकांक्षा की अंधी दौड़ है l लोगों का कितना अहित होता है , इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता l अनेक प्रकार की बीमारियाँ लोग झेल रहे हैं l जिनका जीवन स्तर अच्छा है , पौष्टिक भोजन है फिर भी बीमारी है , पीठ में दर्द , घुटने में दर्द , पैरों में दर्द यह तो आम बात है इसके लिए बुढ़ापा या कमजोरी ही कारण नहीं है l बड़ी मात्रा में तंत्र -मन्त्र , नकारात्मक शक्तियों के प्रयोग , साइकिक अटैक , विभिन्न तरीके के तांत्रिक प्रयोग ---ऐसी सभी बीमारियों के कारण हैं जो महँगी दवाई खाने और आपरेशन के बाद भी ठीक नहीं होतीं l जो लोग भी गुप्त रूप से इन कार्यों में लगे हैं , उनका परिवार भी सुरक्षित नहीं होता , बड़ी बीमारियों को झेलता है और अपने ही हाथों अपनी पीढ़ियों की बर्बादी लिख लेता है l जो लोग किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए ऐसी नकारात्मक शक्तियों का इस्तेमाल स्वयं करते हैं या किसी को प्रचुर धन देकर ऐसा कराते हैं वे मानसिक रूप से विकृत होते हैं , जिन्हें लोगों को कष्ट में देखने से आनंद मिलता है l पागल तो क़ानूनी दंड से भी बच जाता है , फिर ये तो छिपे हुए अपराधी हैं , इन्हें तो केवल भगवान ही देख सकते हैं , प्रत्यक्ष में तो कोई सबूत नहीं है l
Omkar....
31 January 2026
29 January 2026
WISDOM -----
मनुष्य के जीवन में सुख और दुःख , धूप -छाँव की तरह आते जाते रहते हैं l जब दुःख जीवन में आता है तब मनुष्य उसे अपना दुर्भाग्य समझता है l यही व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल है l प्रत्येक दुःख का कारण दुर्भाग्य या प्रारब्ध नहीं होता l अनेकों बार जागरूकता की कमी की वजह से हमें दुःख के बोझ को उठाना पड़ता है l यह संसार ऐसा ही है , लोग हमारी सरलता और अज्ञानता के कारण ही फायदा उठाते हैं l युग के साथ लोगों की सोच भी बदल जाती है l त्रेतायुग में यह सबके सामने था कि मंत्र ने महारानी कैकेयी के कान भरे और भगवान श्रीराम को राजतिलक के स्थान पर वनवास हुआ l द्वापर युग में भी कौरवों का पांडवों के प्रति ईर्ष्या -द्वेष संसार के सामने स्पष्ट था , महाभारत हुआ l लेकिन कलियुग की स्थिति बहुत विकट है l अब मनोविकार तो अपने चरम पर हैं , लेकिन अब व्यक्ति दोगला है l वह समाज के सामने स्वयं को बहुत सभ्य , संस्कारी और परिवार के प्रति बहुत जिम्मेदार स्वयं को दिखाना चाहता है , लेकिन वह अपनी मानसिक विकृतियों से विवश है l धन -संपत्ति का लालच , कामना , वासना के वशीभूत वह अपने ही रिश्ते -नातों पर पीठ पीछे प्रहार करता है l धन संपत्ति के विवाद तो प्रत्यक्ष भी है जिनसे सारी अदालतें भरी हैं लेकिन जिनकी मानसिकता निकृष्ट है वे तंत्र -मन्त्र , ब्लैक मैजिक , भूत , पिशाच आदि अनेक नकारात्मक शक्तियों की मदद लेकर अपनों पर ही प्रहार करते हैं l ये सब नकारात्मक कार्य अपने ही करते हैं , गैरों की मदद लेकर l और जो इन सबको भुगतता है , वह जागरूक न होने के कारण इसे अपना दुर्भाग्य कहता है और ऐसे ' अपनों ' के साथ बातचीत , स्वागत , सत्कार , रिश्ता निभाने में उलझा रहता है और फायदा उठाने वाले अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं l लोग कहते हैं ईश्वर ऐसे दोगले लोगों को सजा क्यों नहीं दे रहे ? तो ईश्वर क्या करे ? जब व्यक्ति जागरूक नहीं है , अपने को सताने वालों के साथ चाय -नाश्ता कर रहा है , हँस -बोल रहा है , उनके स्वागत -सम्मान में अपनी ऊर्जा कर रहा खर्च कर रहा है l ईश्वर के पास सन्देश तो यही गया कि आप उसके द्वारा स्वयं को सताए जाने पर भी खुश हैं l जब व्यक्ति अपनी आँखें खुली रखेगा , जागरूक रहेगा तभी वह नाजायज शोषण व अत्याचार से बच सकेगा l
WISDOM ------
लघु कथा ------ एक महात्मा के पास तीन मित्र गुरु -दीक्षा लेने गए l तीनों ने बड़े भक्तिभाव से प्रणाम कर के अपनी जिज्ञासा प्रकट की l महात्मा ने उनको शिष्य बनाने से पूर्व पात्रता की परीक्षा कर लेने के उदेश्य से पूछा ---- " बताओ कान और आँख में कितना अंतर है ? ' एक ने उत्तर दिया ---- ' केवल पांच अंगुल का भगवन l ' महात्मा ने उसे एक ओर खड़ा कर के दूसरे से उत्तर के लिए कहा l दूसरे ने उत्तर दिया --- " महाराज ! आँख देखती है और कान सुनते हैं , इसलिए किसी बात की प्रमाणिकता के विषय में आँख का महत्त्व अधिक है l " महात्मा ने उसको भी एक ओर खड़ा कर के तीसरे से उत्तर देने के लिए कहा l तीसरे ने कहा --- ' भगवान् ! कान का महत्त्व आँख से अधिक है l आँख केवल लौकिक एवं द्रश्यमान जगत को ही देख पाती है , किन्तु कान को परलौकिक एवं पारमार्थिक विषय का पान करने का सौभाग्य प्राप्त है l " महात्मा ने तीसरे को अपने पास रोक लिया l पहले दोनों को कर्म एवं उपासना का उपदेश देकर अपनी विचारणा शक्ति बढ़ाने के लिए , विदा कर दिया l
27 January 2026
WISDOM -----
मानव जीवन अनेक समस्याओं से घिरा हुआ है l अमीर हों या गरीब कठिनाइयाँ सभी के जीवन में है , उनके रूप भिन्न -भिन्न हैं l समस्याओं से छुटकारा नहीं मिलता और अनेक लोगों के जीवन में ऐसा भी होता है कि एक ही तरह की समस्या निश्चित समय बाद बार -बार आती है l हम समझ नहीं पाते कि हमारे भाग्य में ऐसा क्या है कि एक ही तरह की समस्या बार -बार आ रही है , किसी तरह पीछा ही नहीं छूट रहा l सब उपाय कर लिए लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिला l ये समस्याएं हमारे व्यापार , व्यवसाय , स्वास्थ्य , वैवाहिक जीवन , विभिन्न रिश्तों से संबंधित होती हैं l हमारा जीवन इन सब में उलझा हुआ है l जब मन बहुत परेशान होता है तब हम सोचते हैं कि हमारे जीवन में ऐसा क्यों हुआ ? आखिर क्यों ? ऐसे सभी अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर यूनिवर्स में हैं l हमारे जीवन की प्रत्येक क्रिया , प्रत्येक श्वास का उत्तर यूनिवर्स में है जिन्हें हम ' TAROT CARDS ' की मदद से मालूम कर सकते हैं l आप भी अपने जीवन के ऐसे अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए ' TAROT CARDS READER ' ANJALI से संपर्क कर सकते हैं l यह एक ईश्वरीय विद्या है , हम ईश्वर की कृपा से ही समस्या के पीछे छुपे सत्य को समझ सकते हैं l मेरा WHATS APP NO . है --- 9425142092 समय 2 PM - 4 PM
24 January 2026
WISDOM ----
संत का एक शिष्य उनके दर्शन को पहुंचा और बोला ----' आज मैं गरीबों को खाना खिलाकर आया हूँ l जब तक मैं किसी की सहायता न कर दूँ , मुझे चैन नहीं मिलता l बिना प्रार्थना किए मुझे नींद भी नहीं आती l " संत उसे समझाते हुए बोले --- " वत्स ! तुम्हारा आज का पुण्य समाप्त हो गया l जो दिखावे के लिए किसी की सहायता करता है , समझ लो वह नाटक कर रहा है , किसी की सहायता गुप्त रूप से करनी चाहिए l सेवा इतनी गुप्त रूप से होनी चाहिए कि दांया हाथ दान दे तो बांये हाथ को भी पता न चले l इस निष्काम भाव से किया गया कर्म ही पुण्य का माध्यम बनता है l " युग का प्रभाव प्रत्येक वर्ग पर पड़ता है l वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशों में प्रजातंत्र है l बड़ी विषम स्थिति है l एक ओर सांसारिक आकर्षण है , त्याग और वैराग्य बहुत कठिन है दूसरी ओर वोट के लिए लालच , महत्वाकांक्षा , सुख -भोग का जाल बिछाया जाता है l संत चाहे किसी भी जाति -धर्म का हो , किसी भी देश का हो , उसके लिए इस जाल में फँसने से बचना लगभग असंभव है , शरीर से पहाड़ पर चले भी जाओ , तो क्या यह चंचल मन तो संसार में ही भटकता है l भगवान ने गीता में कहा भी है --कोई विरला ही , लाखों , करोड़ों में कोई एक ही उन तक पहुँच पाता है l यही सत्य है क्योंकि जो भी ईश्वर की ओर कदम बढ़ाता है , आसुरी शक्तियां उसकी टांग खींचती है , उसका जीना मुश्किल कर देती है , वे सबको अपनी तरह राक्षस बनाना चाहते हैं l इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं , महात्मा ईसा को सूली पर चढ़ा दिया , मीरा को जहर दे दिया ---- ऐसे उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है l कलियुग में चाहे लाख बुराइयाँ हों , लेकिन अब ऐसा नहीं होगा l पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने भी कहा है ---युग परिवर्तन होगा , आसुरी प्रवृत्ति के लोगों को हारना ही होगा , उन्हें सिर उठाने की जगह ही नहीं मिलेगी l
19 January 2026
WISDOM -------
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की यात्रा उसके परिवार से ही आरम्भ होती है l संस्कार तो उसके होते ही हैं और परिवार जीवन की प्रथम पाठशाला है इसलिए गुण -दुर्गुण के बीज परिवार में ही बोये जाते हैं जो उसकी उम्र के साथ बढ़कर विशाल वृक्ष बन जाते हैं l बाहरी परिस्थितियां और संगत उसमें अपना प्रभाव डालती हैं l ये परिवार ही हैं जो मनुष्य को देवता या असुर बना देते हैं l यह कलियुग का दुर्भाग्य है कि इस समय असुरता परिवार , समाज , संस्थाएं और सम्पूर्ण संसार में अपना आधिपत्य स्थापित करने में अपनी पूरी शक्ति लगा रही है l असुरों का अहंकार और महत्वाकांक्षा रावण से भी ज्यादा है इसलिए संसार में तनाव और युद्ध है l अब यदि निष्पक्ष रूप से इसकी जिम्मेदारी की बात कहें तो मानव जाति में बच्चे हैं , युवा हैं , प्रौढ़ और उम्र की ढलान पर पहुँचने वाले वृद्ध हैं l बच्चे मन के सच्चे हैं , वे अहंकर और महत्वाकांक्षा से दूर हैं , वे निश्छल और मासूम हैं , युद्ध , पारिवारिक कलह से उन्हें कोई मतलब नहीं है l जो युवा पीढ़ी है उनके सपने हैं , वे सुख से जीना चाहते हैं , उन्हें सही दिशा देने वाला कोई नहीं है इसलिए चालाक लोग उनकी ऊर्जा का अपने स्वार्थ के लिए उपयोग कर लेते हैं l अब शेष बचे प्रौढ़ और उम्र की ढलान वाले लोग , इनकी कामना , वासना , महत्वाकांक्षा , अहंकार कम नहीं हो रहा l इन लोगों को लगता है क्या -क्या , भोग लें , कोई सुख छूट न जाए , अहंकार की पताका नीची न हो जाये l इसके लिए ये लोग धन , वैभव यानि भौतिक शक्तियों के साथ हर तरह की नकारात्मक शक्तियों का भी भरपूर उपयोग करते हैं l संसार में , परिवार में , हर क्षेत्र में अशांति , तनाव , शारीरिक , मानसिक उत्पीड़न के लिए यही लोग उत्तरदायी हैं l इन्हें कौन समझा सकता है , न्याय करने अब ईश्वर को ही आना पड़ेगा l संसार में यदि कहीं कुछ अच्छा है , तो उसके लिए भी इसी उम्र के त्यागी , महात्मा हैं लेकिन उनकी संख्या सागर में एक बूंद के समान है l आचार्य श्री कहते हैं -- अंधकार को मिटाने के लिए एक किरण ही पर्याप्त है l इसलिए हमें निराश नहीं होना है , हर रात के बाद सुबह होती है , वो सुबह अवश्य होगी l
18 January 2026
WISDOM -----
लघु कथा ---- बिना नाव की सहायता के योगी ने जल पर चलकर नदी को पर किया l उसे अपनी सिद्धि पर बहुत गर्व हुआ और संतोष भी l अहंकार से तने हुए उस योगी को एक बूढ़े मछियारे ने देखा l उसने समीप जाकर प्रणाम करते हुए उनसे पूछा ---- " भगवन ! जल पर चलने की यह सिद्धि आपने कितने समय में प्राप्त की ? " योगी ने गर्व से अपना मस्तक ऊँचा उठाते हुए कहा ---- " पूरे बीस वर्ष कठोर तपस्या कर के मैंने यह सिद्धि प्राप्त की है l " बूढ़े ने खिन्न होकर कहा ---- " आपका इतना लम्बा समय व्यर्थ ही चला गया l जो काम नाव वाले को दो पैसा देकर पूरा हो सकता था , उसके लिए इतना कष्ट उठाने की क्या जरुरत थी ? आचार्य श्री कहते हैं --- ' मनुष्य को तपस्या , साधना विचारों के परिष्कार और सद्बुद्धि के लिए करनी चाहिए l क्योंकि सद्बुद्धि ही प्रत्येक कार्य में प्रकाशित है l