18 January 2026

WISDOM -----

 लघु कथा  ---- बिना  नाव  की  सहायता  के  योगी  ने  जल  पर  चलकर  नदी  को  पर  किया  l  उसे  अपनी  सिद्धि  पर  बहुत  गर्व  हुआ  और  संतोष  भी  l   अहंकार  से  तने  हुए  उस  योगी  को   एक  बूढ़े  मछियारे ने  देखा  l  उसने  समीप  जाकर  प्रणाम  करते  हुए  उनसे  पूछा  ---- " भगवन  !  जल  पर  चलने  की  यह  सिद्धि   आपने  कितने  समय  में  प्राप्त  की  ? "   योगी  ने  गर्व  से  अपना  मस्तक  ऊँचा  उठाते  हुए  कहा  ---- "  पूरे  बीस  वर्ष  कठोर  तपस्या  कर   के  मैंने  यह  सिद्धि  प्राप्त  की  है  l "  बूढ़े  ने  खिन्न  होकर  कहा  ---- "  आपका   इतना  लम्बा  समय  व्यर्थ  ही  चला  गया  l  जो  काम  नाव  वाले को  दो  पैसा  देकर  पूरा  हो  सकता  था  ,  उसके  लिए  इतना  कष्ट  उठाने  की  क्या  जरुरत  थी  ?  आचार्य  श्री कहते  हैं  --- ' मनुष्य  को  तपस्या  , साधना  विचारों  के  परिष्कार  और  सद्बुद्धि  के  लिए करनी  चाहिए   l   क्योंकि सद्बुद्धि  ही  प्रत्येक कार्य  में  प्रकाशित  है  l