29 January 2026

WISDOM -----

  मनुष्य  के  जीवन  में  सुख  और  दुःख    , धूप -छाँव  की  तरह  आते  जाते  रहते  हैं  l  जब  दुःख  जीवन  में  आता  है   तब  मनुष्य  उसे  अपना  दुर्भाग्य  समझता  है  l  यही  व्यक्ति  की  सबसे  बड़ी  भूल  है  l  प्रत्येक  दुःख  का  कारण   दुर्भाग्य  या  प्रारब्ध  नहीं  होता  l  अनेकों  बार   जागरूकता  की  कमी  की  वजह  से  हमें  दुःख  के  बोझ  को  उठाना  पड़ता  है  l  यह  संसार  ऐसा  ही   है  ,  लोग  हमारी  सरलता  और  अज्ञानता    के  कारण  ही    फायदा  उठाते  हैं   l  युग  के  साथ  लोगों  की   सोच  भी  बदल  जाती  है  l  त्रेतायुग  में  यह  सबके  सामने  था  कि  मंत्र  ने  महारानी  कैकेयी  के  कान  भरे   और  भगवान  श्रीराम  को   राजतिलक  के  स्थान  पर   वनवास  हुआ  l  द्वापर  युग  में  भी   कौरवों  का   पांडवों  के  प्रति  ईर्ष्या -द्वेष  संसार  के  सामने  स्पष्ट  था  ,  महाभारत  हुआ  l  लेकिन  कलियुग  की  स्थिति  बहुत  विकट  है  l  अब  मनोविकार  तो  अपने  चरम  पर  हैं  ,  लेकिन  अब  व्यक्ति  दोगला  है  l  वह  समाज  के  सामने  स्वयं  को  बहुत  सभ्य  , संस्कारी  और  परिवार  के  प्रति  बहुत  जिम्मेदार  स्वयं  को  दिखाना  चाहता  है  ,     लेकिन  वह  अपनी  मानसिक  विकृतियों से  विवश   है  l  धन -संपत्ति  का  लालच  ,  कामना , वासना  के  वशीभूत  वह  अपने  ही  रिश्ते -नातों  पर  पीठ  पीछे  प्रहार  करता है  l  धन  संपत्ति  के  विवाद  तो  प्रत्यक्ष  भी  है  जिनसे  सारी  अदालतें  भरी  हैं  लेकिन  जिनकी  मानसिकता  निकृष्ट  है   वे  तंत्र -मन्त्र , ब्लैक मैजिक , भूत , पिशाच  आदि  अनेक  नकारात्मक  शक्तियों  की  मदद  लेकर  अपनों  पर  ही  प्रहार  करते  हैं  l  ये  सब  नकारात्मक  कार्य  अपने  ही  करते  हैं , गैरों  की  मदद  लेकर  l  और  जो  इन  सबको  भुगतता  है  ,  वह  जागरूक  न  होने के  कारण  इसे  अपना  दुर्भाग्य  कहता  है   और  ऐसे  ' अपनों  '  के  साथ  बातचीत , स्वागत , सत्कार  , रिश्ता निभाने  में  उलझा  रहता  है   और  फायदा  उठाने  वाले   अपना  उल्लू  सीधा  करते  रहते  हैं  l  लोग  कहते  हैं   ईश्वर ऐसे  दोगले  लोगों  को  सजा  क्यों  नहीं  दे  रहे  ?   तो  ईश्वर  क्या  करे  ?  जब   व्यक्ति  जागरूक  नहीं  है ,  अपने  को  सताने  वालों  के  साथ  चाय -नाश्ता  कर  रहा  है , हँस -बोल  रहा  है ,  उनके  स्वागत -सम्मान  में  अपनी  ऊर्जा  कर  रहा  खर्च  कर  रहा  है  l  ईश्वर  के  पास  सन्देश  तो  यही  गया  कि  आप   उसके  द्वारा  स्वयं  को  सताए  जाने  पर  भी  खुश  हैं  l  जब   व्यक्ति   अपनी  आँखें  खुली  रखेगा , जागरूक  रहेगा   तभी  वह  नाजायज  शोषण  व  अत्याचार  से  बच  सकेगा  l  

WISDOM ------

   लघु  कथा  ------ एक  महात्मा  के  पास  तीन  मित्र  गुरु  -दीक्षा  लेने  गए  l  तीनों  ने  बड़े  भक्तिभाव  से  प्रणाम  कर  के  अपनी  जिज्ञासा  प्रकट  की  l  महात्मा  ने  उनको  शिष्य   बनाने  से  पूर्व  पात्रता  की  परीक्षा  कर  लेने  के  उदेश्य  से  पूछा  ---- " बताओ  कान  और  आँख  में  कितना  अंतर  है  ? '  एक  ने  उत्तर  दिया ---- ' केवल  पांच  अंगुल  का  भगवन  l ' महात्मा  ने  उसे  एक  ओर  खड़ा  कर  के  दूसरे  से  उत्तर  के  लिए  कहा  l  दूसरे  ने  उत्तर  दिया  --- " महाराज  !  आँख  देखती  है  और  कान  सुनते  हैं  ,  इसलिए  किसी  बात  की   प्रमाणिकता  के  विषय  में  आँख  का  महत्त्व  अधिक  है  l "  महात्मा  ने   उसको  भी  एक ओर  खड़ा  कर  के   तीसरे  से  उत्तर  देने  के  लिए कहा  l  तीसरे  ने  कहा --- '  भगवान्  !  कान  का  महत्त्व  आँख  से  अधिक  है  l  आँख  केवल  लौकिक  एवं   द्रश्यमान  जगत  को  ही  देख  पाती  है  ,  किन्तु  कान  को  परलौकिक    एवं  पारमार्थिक  विषय  का  पान  करने  का  सौभाग्य  प्राप्त  है  l "  महात्मा  ने  तीसरे  को  अपने  पास  रोक  लिया  l  पहले  दोनों  को  कर्म  एवं   उपासना  का  उपदेश  देकर  अपनी  विचारणा   शक्ति   बढ़ाने के  लिए  , विदा  कर  दिया  l