विधाता ने स्रष्टि की रचना की और अनेक प्राणियों , वनस्पति , पशु -पक्षी आदि सभी बनाए l इन सब में विधाता ने मनुष्य को ही बुद्धि दी कि वह सन्मार्ग पर चलकर , नैतिकता के नियमों का पालन कर अपनी चेतना को विकसित करे और बुद्धि का सदुपयोग कर सामान्य मनुष्य से ऊपर उठकर इनसान ., देवता और भगवान बने लेकिन मनुष्य ने ऐसा नहीं किया , मनुष्य में अहंकार है उसने ईश्वर के आदेश को भी नहीं माना l मनुष्य के अहंकार ने उसकी बुद्धि को दुर्बुद्धि में बदल दिया , उसने ईश्वर के बताए क्रम से विपरीत क्रम को चुना l बहुत समय तक उसने पशुओं जैसा जीवन जिया लेकिन यह जीवन भी उसे बहुत कठिन लगा क्योंकि पशु भी प्रकृति के नियमों के अनुसार चलते हैं l समय से उठाना , शाम होते ही अपने घोंसले में चले जाना l संतान उत्पत्ति के उनके नियम हैं , समूह के छोटे बच्चों पर उनकी कुद्रष्टि नहीं होती , जरुरत भर का उनका घोंसला होता है , संपत्ति , वैभव नहीं जोड़ते l मनुष्य को यह पशुओं जैसा जीवन बहुत कठिन लगा l मनुष्य ने अपनी बुद्धि को बेलगाम कर दिया l मनुष्य ने सोचा कि ऐसा कुछ किया जाए कि अपने समूह में उसे सबका सम्मान मिले और अपने भीतर की कालिख को वह सबसे छुपा ले l जैसी चाहत होती है वैसे रास्ते भी निकल आते हैं l मायावी शक्तियां तो शुरू से ही संसार में हैं l रावण मायावी था , हिरन्यकश्यप , बकासुर , भस्मासुर , अघासुर जैसे असंख्य असुर हैं l वे जीवित नहीं तो क्या , उनकी वाइब्रेशन तो ब्रह्माण्ड में हैं l जैसा जो चाहता है , वैसी ही वाइब्रेशन उसके पास आ जातीं हैं l अब मनुष्य को भी मायावी बनने का रास्ता मिल गया l फिर इन असुरों के अनेक सहयोगी ---भूत , प्रेत , जिन्न ,पिशाच आदि भी होते हैं , उन सबका मनुष्य को भरपूर सहयोग मिला l और मनुष्य को अपनी दुर्बुद्धि से उन्ही का जीवन बहुत पसंद आया , खाओ -पीओ मौज उड़ाओ , मारो -काटो , कोई नैतिकता नहीं , कोई नियम नहीं l मनुष्य युगों से इन्ही के जैसा जीवन जी रहा है , शरीर मनुष्य का है लेकिन अपने भीतर से वह -----है l यह कटु सत्य है , इसका प्रमाण भी है l संसार का इतिहास युद्धों का इतिहास है , बड़े भीषण युद्ध हुए हैं और आज भी हो रहें हैं , खून की नदियाँ बह गईं , अणुबम तो ऐसे गिरे कि सब कुछ राख हो गया l यदि मनुष्य ' इनसान ' होता तो इतने युद्ध नहीं होते , ये सारे शौक तो भूत , पिशाचों के ही हैं l आज स्थिति ये है कि संसार को नहीं सुधार सकते l अब सब व्यक्तिगत है , जो अच्छा व श्रेष्ठ जीवन जीना चाहे , वह इस कीचड़ में कमल की तरह रह सकता है l अपनी कम्युनिटी में खींचने के लिए भूत -पिशाच उस पर बहुत आक्रमण करेंगे , लेकिन यदि एक सच्चा और श्रेष्ठ इन्सान बनने का संकल्प लिया है तो ब्रह्माण्ड की दिव्य शक्तियां उसकी मदद अवश्य करेंगी l
No comments:
Post a Comment