21 March 2025
WISDOM -----
संसार में जितने भी अहंकारी हैं , वे स्वयं को भगवान समझते हैं इसलिए वे कर्म विधान को नहीं मानते l अहंकार के मद में नित्य नए पाप कर्म करते जाते हैं l वर्तमान युग का यह कटु सत्य है कि शक्ति और वैभव से संपन्न व्यक्ति कितने भी बड़े अपराध कर ले , वह दंड से बच जाता है l कोई भी उससे बुराई मोल लेना नहीं चाहता और लोगों के स्वार्थ भी उसी की मदद से पूरे होते हैं l ईश्वर की अदालत में भी बड़ी देर से न्याय होता है l सीता जी को भी 14 वर्ष तक रावण की अशोक वाटिका में रहना पड़ा l इतने दीर्घकाल तक इंतजार के बाद रावण का अंत हुआ l यही स्थिति महारानी द्रोपदी की थी l दु :शासन द्रोपदी के केश पकड़ कर उन्हें घसीटते हुए भरी सभा में लाया था l भगवान श्रीकृष्ण ने द्रोपदी की लाज रखी l उस समय अपमानित द्रोपदी ने प्रतिज्ञा की कि दु:शासन के खून से अपने केश धोने के बाद ही वे इन केशों को बांधेंगी l इसके बाद जब भी श्रीकृष्ण से उनकी मुलाकात होती तो वे भगवान को अपने खुले केश दिखातीं और कहतीं --भगवान ! वह दिन कब आएगा जब ये केश बंधेंगे ? भगवान श्रीकृष्ण उन्हें समझाते और कहते कि द्रोपदी , मैंने केवल तुम्हारे केशों की खातिर धरती पर अवतार नहीं लिया है l अवतार का उदेश्य बहुत बड़ा है , अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना l महाभारत का महायुद्ध कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है , इसकी भूमिका बहुत पहले से बन रही थी l अधर्मी , अत्याचारी और बदले की भावना से ग्रस्त सब कुरुक्षेत्र के मैदान में एकत्र हुए , तब एक -एक कर के सबका अंत हुआ l यही स्थिति वर्तमान की है l पाप और अत्याचार से सम्पूर्ण धरती , प्रकृति सब त्रस्त है l ईश्वर के यहाँ अवश्य ही कोई योजना बन रही है कि कैसे इस धरती को पाप के बोझ से मुक्त किया जाए l अहंकारी इस सत्य को समझते और स्वीकारते नहीं हैं , वे स्वयं ही अपना पाप का घड़ा भरते जाते हैं और ईश्वर का काम सरल कर देते हैं l घड़ा तो फुल भरने के बाद ही फूटता है , उससे पहले उसे फोड़ने की इजाजत भगवान को भी नहीं है l
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