1. लघु कथा ----- भिखारी दिन भर भीख मांगता -मांगता शाम को एक सराय में पहुंचा और भीतर की कोठारी में भीख की झोली रखकर सो गया l थोड़ी देर में एक किसान आया , उसके पास रुपयों की एक थैली थी , वह बैल खरीदने गया था l वह किसान भी रात को उसी सराय में रुका , जहाँ भिखारी था और वह पोटली सिराहने रखकर सो गया l भीख की झोली रुपयों की झोली से बोली --- " बहन ! हम तुम एक ही बिरादरी के हैं , इतनी दूर क्यों हो , आओ , हम तुम एक हो जाएँ l रुपयों की थैली ने हँसकर कहा -----" बहिन ! क्षमा करो , यदि मैं तुमसे मिल गई तो संसार में परिश्रम और पुरुषार्थ का मूल्य ही क्या रह जायेगा ? "
2 . लघु कथा --- एक दिन छाया ने मनुष्य से कहा --- " लो देखो , तुम जितने थे उतने ही रहे और मैं तुमसे कई गुना बढ़ गई l मनुष्य मुस्कराया और बोला ----- " सत्य और असत्य में यही तो अंतर है l सत्य जितना है उतना ही रहता है और असत्य पल -पल में घटता -बढ़ता रहता है l "
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