3 May 2026

WISDOM ------ लघु कथा

   एक  बार  राजा  ने   अपने  मंत्री  से  पूछा  ---- " क्या  गृहस्थ  में  रहकर  भी  ईश्वर  को  प्राप्त  किया  जा  सकता  है  ? '  मंत्री  ने  उत्तर  दिया  ---- " हाँ , श्रीमान  ! ऐसा  हो  सकता  है  l "  राजा  ने  पूछा ---- "यह  किस  प्रकार  संभव  है  ? "  मंत्री  ने  कहा ---' इसका  ठीक -ठीक  उत्तर   एक  महात्मा जी  दे  सकते  हैं  , जो  गोदावरी  नदी  के  पास  एक  घने  वन  में  रहते  हैं  l "  राजा  अपने  प्रश्न  का  उत्तर  पाने  के  लिए  दूसरे  दिन  मंत्री  को  साथ  लेकर   महात्मा  से  मिलने   चल  दिए  l  कुछ  दूर  चलने  पर  मंत्री  ने  राजा  से  कहा  -----" महाराज  !  ऐसा  नियम  है  कि   जो  उन  महात्मा  से  मिलने  जाता  है  , वह  रास्ते  में  चलते  हुए   कीड़े -मकोड़ों  को  बचाता  चलता  है  l  यदि  एक  भी  कीड़ा  कुचल  जाए   तो  महात्मा जी  श्राप  दे  देते  हैं  l "  राजा  ने  मंत्री  की  बात  स्वीकार  कर  ली  और  खूब  ध्यानपूर्वक  आगे  की  जमीन  देख -देखकर  पैर  रखने  लगे  l  इस  प्रकार  चलते  हुए   वे  महात्मा जी  के  पास  पहुंचे  l  महात्मा  ने  दोनों  को  सम्मानपूर्वक  बैठाया   और  राजा  से  पूछा  ---- " आपने  रास्ते  में  क्या -क्या  देखा  , मुझे  बताएं  l ' राजा  ने  कहा ---- "  भगवन  !  मैं  तो  आपके  श्राप  के  डर  से  रास्ते  के  कीड़े -मकोड़ों  को  देखता  आया  हूँ  l  इसलिए  मेरा  ध्यान  दूसरी  ओर  गया  ही  नहीं  , रास्ते  के  द्रश्यों  के  बारे  में  मुझे  कुछ  भी  मालूम  नहीं   है  l "    इस  पर  महात्मा  ने  हँसते  हुए  कहा --- " राजन  !  यही  तुम्हारे  प्रश्न  का  उत्तर  है  l  मेरे  श्राप  से  डरते  हुए  जिस  तरह  तुम  आए  , उसी  प्रकार  ईश्वर  के  दंड  से  डरना  चाहिए  l  कीड़ों को  बचाते  हुए  जैसे  चले  , उसी  प्रकार  दुष्कर्मों  से  बचते  हुए  चलना  चाहिए  l  रास्ते  में  अनेक  द्रश्यों  के  होते  हुए  भी  , वे  दिखाई  न  पड़े  l  जिस  सावधानी  से  तुम  मेरे  पास  आए  हो  ,  उसी  सावधानी  से  जीवन  क्रम  चलाओ  तो  गृहस्थ  में  रहते  हुए  भी  ईश्वर  को  प्राप्त  कर  सकते  हो  l "  राजा  उत्तर  पाकर  संतोषपूर्वक  लौट  आया  l 

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