इस वैज्ञानिक युग में लोगों के पास सुख - सुविधाएँ तो बहुत हैं लेकिन लोगों के जीवन में आनंद नहीं है l वह आंतरिक ख़ुशी जो चेहरे पर चमक ला देती है , वो कहीं खो गई है l सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी के चेहरे पर ख़ुशी दिख भी जाये , ख़ुशी के कुछ पल आ भी जाएँ तो ईर्ष्या -द्वेष करने वाले इतने हैं कि वे उस ख़ुशी को छीनने का , व्यक्ति को कष्ट देने का हर संभव प्रयास करते हैं l आज व्यक्ति दूसरे की ख़ुशी देखकर दुःखी और परेशान हो जाता है l यह विकृत मानसिकता परिवार से लेकर संसार में है l छोटे -छोटे बच्चों की हँसी तो निर्मल होती है , उनमें कोई ईर्ष्या -द्वेष नहीं होता , निर्मल मन है , हँसते -मुस्कराते हैं लेकिन निष्ठुर व्यक्तियों से उनकी ये निर्मल हँसी भी बर्दाश्त नहीं होती , कभी युद्ध के नाम पर , कभी विकृति के कारण वे बच्चों के ही प्राण ले लेते हैं l यह मनोरोग है l यदि व्यक्ति आध्यात्मिक है , यदि उसे अपने जीवन में कष्ट मिला है तो वह निरंतर यही प्रयास करेगा कि जो कष्ट उसे मिला , वैसा कष्ट किसी को न मिले , वह सबको ख़ुशी देने का हर संभव प्रयास करेगा l उसके कष्ट , उसके अभाव उसे कठोर नहीं बनाते l लेकिन इसके विपरीत अनेक लोग ऐसे होते हैं जिनका मन सब कुछ पाकर भी अतृप्त रहता है , छोटे से कष्ट भी उन्हें शूल की तरह चुभते हैं , ऐसे लोगों की मानसिकता यही होती है कि हमें ख़ुशी नहीं मिली , तो अब हम सब की ख़ुशी छीन लेंगे , किसी को चैन से जीने नहीं देंगे l ऐसे लोग बहुत निष्ठुर , आसुरी प्रवृति के होते हैं l यह आसुरी प्रवृति एक प्रकार का मनोरोग है l पंडित श्री राम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं --- ' मनोरोग और कुछ नहीं , मनुष्य की दबी , कुचली , रौंदी गईं भावनाएं ही हैं l भावनात्मक तृप्ति मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है l भावना के बिना मनुष्य सब कुछ पाकर भी अतृप्त ही रहता है l भावना ही जब विकसित हो जाती है तो यह संवेदना है l इसके बिना जीवन वीरान और शुष्क हो जाता है l यही अनेक मनोविकारों का मूल कारण है l " जिनमें संवेदना नहीं है , वही असुर हैं , निर्दयी , निष्ठुर हैं l ऐसा इसलिए है क्योंकि वे स्वयं को भगवान समझते हैं , शक्ति का दुरूपयोग करते हैं l उनकी आत्मा जानती है के वे गलत हैं इसलिए वे लोग शराफत का नकाब पहनकर रहते , ये असुर आपस में बड़े संगठित होते हैं , इस सत्य को वे जानते हैं कि उनसे ऊपर ईश्वर है , इसलिए सब काम छिपकर करते हैं l जिस दिन उन्हें यह समझ आ गया कि ईश्वर उन्हें अपनी हजार आँखों से देख रहे हैं , उनके हर कार्य , प्रत्येक विचार पर उनकी द्रष्टि है , उस दिन उन्हें ईश्वर से प्रेम हो जायेगा , ह्रदय में भक्ति जाग्रत हो जाएगी और तब यह आसुरी प्रवृति आध्यात्मिकता में बदल जाएगी l
31 March 2026
25 March 2026
WISDOM -----
मनुष्य बुद्धिमान प्राणी है लेकिन उसकी सबसे बड़ी भूल यह है कि वह इतिहास से शिक्षा नहीं लेता l अपना अहंकार , लालच , कामना , अतृप्त इच्छाएं , महत्वाकांक्षा के आगे उसे कुछ दिखाई नहीं देता l यह सब दुर्गुण जिसमें भी हैं , वह अपनी शक्ति के अनुरूप उस क्षेत्र को मुसीबत में डाल देता है l व्यक्ति जितना पावरफुल है वह उतने ही बड़े क्षेत्र को , यहाँ तक कि इस दुनिया को , प्रकृति को सबको मुसीबत में डाल देता है l चाहे महाराज ययाति हों , दुर्योधन हों या रावण हों ---सब विभिन्न रूपों में इस धरती पर आफत बनकर बरस रहे हैं l गीता में कहा गया है कि जिनका मन शांत है , वे अपने आसपास सम्पूर्ण वातावरण में शांति फैलाते हैं l इस युग का यह दुर्भाग्य है कि लोगों के मन अशांत हैं l जिनके पास संसार के सारे सुख हैं , वैभव है , शक्ति है , उनके मन सबसे ज्यादा अशांत हैं , मन अशांत होकर भटक रहा है इसलिए बुद्धि बेलगाम हो गई है l यदि हम संसार में शांति चाहते हैं तो हमें सबसे पहले अपने मन को शांत रखना होगा l जब व्यक्ति का मन शांत होगा तो परिवार में शांति होगी , फिर समाज में राष्ट्र में और संसार में शांति होगी l यह शांति अनोखी होगी , एक ऐसी शांति जिसमे हमने अपने मन को मारा नहीं है l हमारे मन की भटकन , पागलपन दूर हो जाता है और हमारे निर्णय विवेकपूर्ण होते हैं l आज संसार में जब इतनी अशांति है तब हम सबका यह कर्तव्य बन जाता है कि हम सब गायत्री मन्त्र का जप करें और ईश्वर से प्रार्थना करें कि वे संसार के विभिन्न राष्ट्रों के जो कर्ता धर्ता हैं , उनके मन को शांति दें , उनके भीतर विवेक जाग्रत हो l सबसे बढ़कर जो हथियार बनाते हैं , उन्हें सद्बुद्धि आए l अपना लाभ कमाने की न सोचें l इस धरती पर अमर कोई नहीं है , इतनी लाशों का बोझ अपने कन्धों पर लेने से कहीं भी शांति नहीं मिलेगी l
7 March 2026
WISDOM ------ आखिरी दांव
लघु कथा ---- प्राचीन काल की बात है एक नगर सेठ था l उसके पास अपार धन संपदा थी l सुख -वैभव की कोई कमी नहीं थी l लेकिन उस सेठ को संतोष नहीं था l जब तक वह दूसरे सेठों का कुछ छीन न ले , उसे चैन की नींद नहीं आती थी l वह दूसरों का केवल धन ही नहीं , सब कुछ छीनना चाहता था , दूसरों का सुख -चैन छीनकर ही उसे आनंद आता था l वह अपने जासूसों को भेजकर यह जानकारी लेता था कि किसके पास क्या सबसे अच्छा है ? किसी के पास खुश होने के लिए और गर्व अनुभव करने के लिए क्या है ? वही उससे छीन लिया जाये l उसके जासूसों ने उसे बताया कि उसके नगर से कुछ दूरी पर एक नगर है , वहां एक बहुत सुन्दर बगीचा है , वहां के सभी लोग उस बगीचे को देवता मानकर पूजते हैं और वहां सैर कर के इतने प्रसन्न होते हैं कि उनकी ख़ुशी का वर्णन नहीं किया जा सकता l यह सुनकर उस लालची सेठ की नींद उड़ गई l वह दिन -रात यही सोचने लगा कि कैसे उस बगीचे पर अपना कब्जा किया जाए l साम , दाम , दंड , भेद हर तरीके से उसने सेठ को अपने वश में कर लिया और उससे कहा कि इस सुन्दर बगीचे पर वह अपना अधिकार चाहता है l बगीचे के मालिक उस सेठ ने कहा ---यदि बगीचे का अधिकार मैं तुम्हे दे दूंगा तो मेरी प्रजा मेरा सम्मान नहीं करेगी और मेरा जीवन जीना मुश्किल हो जाएगा l लालची सेठ ने अगली चाल चली , उसने कहा ---तुम गुपचुप रूप से मुझे इस बगीचे का अधिकार सौंप दो , किसी को पता न चलेगा , मेरे मन को संतोष हो जायेगा और तुम्हारा सम्मान भी बना रहेगा l सेठ आखिर राजी हो गया , उसने बड़े गोपनीय तरीके से उस सुन्दर बगीचे का मालिकाना हक लालची सेठ को सौंप दिया l कुछ ही दिन बाद उस लालची सेठ ने उसको मरवा दिया और उस बगीचे पर अपना अधिकार सबके सामने दिखा दिया l इस कथा से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? हमें अपना आखिरी दांव कभी किसी को नहीं बताना चाहिए l जब शेर जंगल का राजा बना तब बिल्ली ने उसे सारे गुर सीखा दिए l शेर ने बिल्ली से कहा --कोई और हुनर हो तो वह भी सिखा दो ताकि मैं एक कुशल प्रशासक बन सकूँ l बिल्ली ने कहा -- मैंने तुम्हे वह सब कलाएं सिखा दीं जो मुझे ज्ञात हैं l शेर के मन में कुटिलता आ गई , उसने सोचा क्यों न मैं पहला शिकार इस बिल्ली का ही करूँ , यह सोचकर वह बिल्ली पर झपटा l बिल्ली सतर्क थी वह और तुरंत पेड़ पर चढ़ गई l शेर को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता है l अब उसने बिल्ली से प्रार्थना की कि वह उसे पेड़ पर चढ़ना भी सिखा दे l बिल्ली होशियार थी , उसने कहा , नहीं 1 यह मेरा आखिरी दांव है यदि मैंने इसे तुम्हे सिखा दिया तो तुम मुझे ही खा जाओगे l