2 May 2026

WISDOM ----

  इस  संसार  में  शुरू  से  ही  असुरता  और  देवत्व  दोनों  का  ही  अस्तित्व  अँधेरे  और  उजाले  की  तरह  रहा  है  l  सतयुग , त्रेतायुग  और  द्वापर युग  में  यह  स्पष्ट  था  कि  असुर  कौन  है ,  कौन  अत्याचारी , अनीति  और  अधर्म  की  राह  पर  है   लेकिन  कलियुग  में  सबसे  बड़ी  त्रासदी  यही  है  कि   अब  आसुरी  प्रवृत्ति  के  लोग  समाज  में  घुल-मिलकर , परिवारों  में  , संस्थाओं  में  , उच्च  पदों  पर  -----धरती  के  प्रत्येक  कोने  में  मुखौटा  लगाकर  रहते  हैं  l  अब  उनकी  पहचान  करना  बड़ा  कठिन  है  l  किसी  तरह  पहचान  हो  भी  जाए    तो  लोग  पहचान  करने  वाले  को  ही  मूर्ख  कहेंगे , कोई  उसकी  बात  का  विश्वास  ही  नहीं  करेगा  l  इसका  कारण  यही  है  कि  इस  असुरों  ने  लोगों  की  कमजोर  नस  को  पकड़  लिया  है   l  ये  असुर    शराफत  का  नकाब  पहन  कर  स्वयं  को  समाज  का  , परिवार  का  हितैषी  बताते  हैं  और  लोगों  को  धन  का ,  पद , प्रतिष्ठा , प्रमोशन , कामना , वासना  ----- आदि  अनेक  प्रकार  का  लालच  देकर , उनके  अनेक  बड़े -छोटे  हित  साधकर,  कभी  भय  दिखाकर , ब्लैकमेल  कर  के    उन्हें  अपने  वश  में  कर  लेते  हैं   l  इसलिए  उनका  सच  जानने  पर  भी  कोई  उनके  विरुद्ध  मुँह  नहीं  खोलता  l  यही  कारण  है  कि  संसार  में  असुरता  का  साम्राज्य  बढ़ता  ही  जा  रहा  है  l   लोभ -लालच  के  जाल  में  फँसने  वाले   वे  लोग  ही  होते  हैं  जो  बिना  मेहनत  के ,  योग्यता  न  होने  पर  भी   अति शीघ्र  सफलता  चाहते  हैं  l    इनकी  दुर्गति  जाल  में  फँसने  वाले  पक्षियों  की  तरह  होती  है  --- दूर  कौन  उड़कर  जाए , कौन  परिश्रम पूर्वक  दाना  चुने  l  वे  तो  दाना  ढूँढने  की  तुलना  में  जाल  पर  बिखरे  दानों  को  एक  सौभाग्य  जैसा  मानते  हैं  और  उससे  लाभ  उठाने  में  चूकने  की  बात  नहीं  सोचते  l  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  ---- उन्हें  यह  सोचने  की  फुरसत  नहीं  होती  कि  लाभ  उठाते  समय   उसके  पीछे  कोई  दूरगामी  संकट  तो  नहीं  छिपा  है  ,  उसे  भी  देखने  की  आवश्यकता  है  l  हर  लोभी  अधीर -आतुर  होता  है   और  तात्कालिक  लाभ  के  कुछ  दाने  चुन  लेने  के  बाद  ,  उस  पक्षी  की  तरह  बेमौत  मरता  है  ,  जिसे  सामने  बिखरे  आकर्षण  के  उपरांत  अन्य  कोई  बात  सूझती  ही  नहीं  l