4 May 2026

WISDOM ------

   पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  हैं  ----- " कौन  कितने  दिन  जिया  , इसका  लेखा -जोखा  जन्म दिन  से  लेकर  मरणपर्यंत  के  दिन  गिनकर  नहीं  , वरन  इस  आधार  पर  लगाया  जाना  चाहिए  कि  किसने  अपने  समय  का  उपयोग  महत्वपूर्ण  प्रयोजनों  के  लिए  किया  l  आदि शंकराचार्य   मात्र  बत्तीस  वर्ष  जिए  l  विवेकानंद  ने  छत्तीस  वर्ष  की  अल्प  आयु  पाई  l  स्वामी  रामतीर्थ  तैंतीस  वर्ष  की  आयु  में  ही  चले  गए  l  ऐसे  अनेक  व्यक्ति  इस  संसार  में  हुए  हैं  ,  जिन्हें  लंबी  अवधि  तक  जीने  का  अवसर  नहीं  मिला  , पर  उन्होंने  अपने  समय  का  श्रेष्ठतम  प्रयोजनों  के  लिए   उपयोग  किया   और  इतनी  उपलब्धियां  अर्जित  कर  सके  , जितनी  सौ -दो सौ  वर्ष  जीकर  भी  नहीं  पाई  जातीं  l  कितने  ही  लोग  लंबी  आयु  तक  जीते  हैं  ,  पर  उस  अवधि  का  लेखा -जोखा  लेने  पर  प्रतीत   होता    है  कि  वह  पेट  भरने , प्रजनन  के  जंजाल  में   उलझे  रहने   तथा  दुर्गुणों  के  कारण  जलते -झुलसते   मौत  के  मुँह  में  चले  गए  l  प्राय; आधा  समय  कुचक्रों  की  उलझन  में  और  लगभग  उतना  ही   आलस्य -प्रमाद  में  लगाने  वाले  को  लंबी  आयु  तक  जीने  का  क्या  संतोष  -आनंद  मिला  l  इसे  वे  उनींदी  अवस्था  में  तो  जान  ही  नहीं  पाते  ,  किन्तु  जब  विदाई  के  दिन  आते  हैं   तो  आँखें  खुलती  हैं   और  हाथ  मलते  हुए  , रुधे  कंठ   और  भरी  आँखों  से  इतना  ही  कह  पाते  हैं  कि  उन्होंने  बहुमूल्य  अवसर  निरर्थक  कामों  में  गँवाया  और  जिससे   काल  का  त्रास  देने  वाला  अंधकार  भरा  भविष्य  कमाया  l "  

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