इस धरती पर अनेक ऐसी आत्माओं ने जन्म लिया जिन्होंने अपने आचरण से संसार को शिक्षा दी l अपनी नीति -कुशलता से वे इतिहास में अमर हो गए l ---- दूसरे देश से आया शिष्टमंडल महामात्य चाणक्य से मिलने पहुंचा l उसे आया देख चाणक्य ने कक्ष में रखा दीपक बुझा कर दूसरा दीपक जला दिया l शिष्टमंडल के प्रमुख ने उनसे ऐसा करने का कारण पूछा तो चाणक्य ने उत्तर दिया ---- ' जब आप लोगों ने प्रवेश किया तब मैं व्यक्तिगत कार्यों में संलग्न था और जो दीपक जल रहा था , वह मेरे निजी धन से लाए गए तेल से जल रहा था l अब जल रहा ये दीपक राजकोष के धन से जल रहा है , क्योंकि हमारा वार्तालाप शासकीय मुद्दों पर है l हमें राष्ट्रीय संपदा का व्यक्तिगत कार्यों पर खर्च करने का अधिकार नहीं है और न ही मैं ऐसा करूँगा l शिष्टमंडल चाणक्य की ईमानदारी से अभिभूत हो गया l आज परिवार में , समाज और राष्ट्र में इतनी समस्या और तनाव है उसका कारण यही है की व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति , अपने कहे गए शब्दों के प्रति यहाँ तक की स्वयं अपने जीवन के प्रति और ईश्वर के प्रति भी ईमानदार नहीं है l
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