पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ----- " इस दुनिया में इतना अधर्म है , उसका कारण यह नहीं कि नास्तिक दुनिया में ज्यादा हो गए हैं , बल्कि कारण यह है आस्तिकों ने एक दूसरे को गलत सिद्ध कर के ऐसी हालत पैदा कर दी है कि कोई भी सही नहीं रह गया l मंदिर मस्जिद को गलत कह देता है और मस्जिद मंदिर को गलत कह देती है l दोनों एक दूसरे को गलत इसलिए कहते हैं , ताकि वे अपने आप को सही साबित कर सकें l पूरी दुनिया में लगभग तीन सौ धर्म हैं और एक धर्म को दो सौ निन्यानवे गलत कह रहे हैं l हर एक के खिलाफ दो सौ निन्यानवे हैं l इन तीन सौ ने मिलकर तीन सौ को गलत सिद्ध कर दिया है और धरती की ऐसी बदतर हालत हो गई है l ये सभी एक दूसरे की लाशें बिछाने और गला काटने में लगे हैं l हिन्दू मुसलमानों को गलत कहते हैं और मुस्लमान हिन्दुओं को गलत कहते हैं l ऐसे लोगों के अनुसार ---बाइबिल कुरान के खिलाफ है , कुरान गीता के खिलाफ है , वेद तालमुद के खिलाफ हैं , तालमुद जिंदे अवेस्ता के खिलाफ है l बस ! इस तरह खिलाफत और झगड़ों का सिलसिला जारी है और पूरी दुनिया लाशों से पटी पड़ी है l सब ओर एक दूसरे का खून बहाया जा रहा है l ऐसी दशा में भगवान श्रीकृष्ण बहुत ही क्रांतिकारी सूत्र देते हैं l वे कहते हैं विपरीतताएँ कितनी ही क्यों न हों , झगड़े कितने ही खड़े कर लो , पर यदि तुम चलना शुरू करोगे तो पहुंचोगे एक ही मंजिल तक l ईश्वर तक पहुँचने के अनेक मार्ग हैं , हम किसी भी पथ से चलें , पहुंचेंगे भगवान तक ही l "