16 May 2026

WISDOM -------

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ----- " इस  दुनिया  में  इतना  अधर्म  है , उसका  कारण   यह  नहीं  कि  नास्तिक  दुनिया  में  ज्यादा  हो  गए  हैं  , बल्कि  कारण  यह  है  आस्तिकों  ने  एक  दूसरे  को  गलत  सिद्ध  कर  के  ऐसी  हालत  पैदा  कर  दी  है  कि  कोई  भी  सही  नहीं  रह  गया  l  मंदिर  मस्जिद  को  गलत  कह  देता  है   और  मस्जिद  मंदिर  को  गलत  कह  देती  है  l  दोनों  एक  दूसरे  को   गलत  इसलिए  कहते  हैं  ,  ताकि  वे  अपने  आप  को  सही  साबित  कर  सकें  l  पूरी  दुनिया  में  लगभग  तीन  सौ  धर्म  हैं   और  एक  धर्म  को  दो  सौ  निन्यानवे  गलत  कह  रहे  हैं  l  हर  एक  के  खिलाफ  दो  सौ  निन्यानवे  हैं  l  इन  तीन  सौ  ने  मिलकर  तीन  सौ  को  गलत  सिद्ध  कर  दिया  है   और  धरती  की  ऐसी  बदतर  हालत  हो  गई  है  l  ये  सभी  एक  दूसरे  की  लाशें  बिछाने  और  गला  काटने  में  लगे  हैं  l  हिन्दू मुसलमानों  को  गलत  कहते  हैं  और  मुस्लमान  हिन्दुओं  को  गलत  कहते  हैं  l  ऐसे  लोगों  के  अनुसार  ---बाइबिल   कुरान  के  खिलाफ  है  , कुरान  गीता  के  खिलाफ  है ,   वेद   तालमुद  के  खिलाफ  हैं  ,  तालमुद    जिंदे अवेस्ता  के  खिलाफ  है   l  बस  !  इस  तरह  खिलाफत  और  झगड़ों  का  सिलसिला  जारी  है   और  पूरी  दुनिया  लाशों  से  पटी  पड़ी  है  l  सब  ओर  एक  दूसरे  का  खून  बहाया  जा  रहा  है  l   ऐसी  दशा  में   भगवान  श्रीकृष्ण   बहुत  ही  क्रांतिकारी  सूत्र  देते  हैं  l  वे  कहते  हैं  विपरीतताएँ  कितनी  ही  क्यों  न  हों  , झगड़े  कितने  ही  खड़े  कर  लो  ,  पर  यदि  तुम  चलना  शुरू  करोगे   तो  पहुंचोगे  एक  ही   मंजिल  तक  l                 ईश्वर  तक  पहुँचने  के  अनेक  मार्ग  हैं  ,  हम  किसी  भी  पथ  से  चलें  , पहुंचेंगे    भगवान  तक  ही  l  "  

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