पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी का कहना है कि --- ' शक्ति के साथ यदि विवेक न हो तो वह शक्ति उसी के लिए घातक हो सकती है l ' पुराण में इस संबंध में अनेक कथाएं हैं l रावण , भस्मासुर , हिरन्यकश्यप जैसे अनेक असुरों ने घोर तपस्या कर वरदान प्राप्त किए और बहुत शक्तिशाली हो गए लेकिन विवेक न होने से उन्होंने अपनी शक्ति का दुरूपयोग किया l अपनी शक्ति का अहंकार ही उनके अंत का कारण बना l असुरों की यह परंपरा समाप्त नहीं हुई l आज भी जिसके पास धन का , पद का बल है वह उसका दुरूपयोग कर रहा है l भस्मासुर तो जिसके सिर पर हाथ रख दे केवल वही भसम होता था लेकिन आज तो लाखों भस्मासुर की ताकत का मिलकर परमाणु बम है l जिस दिन क्रोध में बुद्धि भ्रष्ट हो गई और बटन दब गया तो परिणाम क्या होगा ? भस्मासुर अपने साथ लाखों , करोड़ों को ले डूबेगा l कलियुग की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि मनुष्य के पास सब कुछ है , हर तरह की सुख -सुविधाएँ , भोग -विलास के साधन सब कुछ है लेकिन सद्बुद्धि नहीं है , विवेक नहीं है l वह जाने -अनजाने स्वयं अपने और अपने परिवार के , इस सम्पूर्ण प्रकृति के विनाश की ओर बढ़ रहा है l अपनी कष्टदायक मृत्यु की तैयारी स्वयं ही कर रहा है l असुरों ने जो सबसे बड़ी चालाकी की वह यह कि धन -वैभव आदि हर तरह से स्वयं को शक्तिशाली बनाने तक ही ईश्वर को माना l जब उन्हें वरदान मिल गया तब वे स्वयं को ही भगवान समझने लगे l ईश्वर की सत्ता को चुनौती देना ही उनकी सबसे बड़ी भूल है l ईश्वर का न्याय कैसे होगा , यह तो वक्त ही बताएगा l