17 May 2026

WISDOM ----

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  का  कहना  है  कि --- ' शक्ति  के  साथ  यदि  विवेक  न  हो  तो  वह  शक्ति  उसी  के  लिए  घातक  हो  सकती  है  l ' पुराण  में  इस  संबंध  में  अनेक  कथाएं  हैं   l  रावण , भस्मासुर , हिरन्यकश्यप  जैसे  अनेक  असुरों  ने  घोर  तपस्या  कर  वरदान  प्राप्त  किए  और  बहुत  शक्तिशाली  हो  गए  लेकिन  विवेक  न  होने  से  उन्होंने  अपनी  शक्ति  का  दुरूपयोग  किया  l  अपनी  शक्ति  का  अहंकार  ही  उनके  अंत  का  कारण  बना  l  असुरों  की  यह  परंपरा  समाप्त  नहीं  हुई  l  आज  भी  जिसके  पास  धन  का , पद  का  बल  है  वह  उसका  दुरूपयोग  कर  रहा  है  l  भस्मासुर  तो  जिसके  सिर  पर  हाथ  रख  दे  केवल  वही  भसम  होता  था  लेकिन  आज  तो  लाखों  भस्मासुर  की  ताकत  का  मिलकर  परमाणु  बम  है  l  जिस  दिन  क्रोध  में  बुद्धि  भ्रष्ट  हो  गई  और  बटन  दब  गया   तो  परिणाम  क्या  होगा   ?   भस्मासुर  अपने  साथ  लाखों , करोड़ों  को  ले  डूबेगा  l                          कलियुग  की  सबसे  बड़ी  त्रासदी  यही  है  कि  मनुष्य  के  पास   सब  कुछ  है  , हर  तरह  की  सुख -सुविधाएँ , भोग -विलास  के  साधन  सब  कुछ  है    लेकिन  सद्बुद्धि  नहीं  है , विवेक  नहीं  है   l  वह  जाने -अनजाने  स्वयं  अपने   और  अपने  परिवार के  , इस  सम्पूर्ण  प्रकृति  के   विनाश  की  ओर  बढ़  रहा  है  l  अपनी  कष्टदायक  मृत्यु  की  तैयारी  स्वयं  ही  कर  रहा  है  l  असुरों  ने  जो  सबसे  बड़ी  चालाकी  की  वह  यह   कि   धन -वैभव  आदि  हर  तरह  से  स्वयं  को  शक्तिशाली  बनाने  तक  ही  ईश्वर  को  माना  l  जब  उन्हें  वरदान  मिल  गया  तब  वे  स्वयं  को  ही    भगवान    समझने  लगे   l  ईश्वर  की  सत्ता  को  चुनौती  देना  ही  उनकी  सबसे  बड़ी  भूल  है  l  ईश्वर  का  न्याय  कैसे  होगा  , यह  तो  वक्त  ही  बताएगा  l  

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