13 June 2013

MORAL WISDOM

अपने विचारों पर पैनी नजर रखिये क्योंकि वे कुछ ही दिनों में शब्द बनकर मुखर होने लगेंगे |
अपने शब्दों पर और भी तीखी नजर रखिये क्योंकि वे धीरे -धीरे कर्म बन कर प्रकट होते हैं |
अपने कर्मों का परीक्षण करते रहिये क्योंकि वे फिर आदत बन कर ही रहेंगे |
अपनी आदतों को भुलावे में मत डालिये क्योंकि वे चरित्र बने बिना नहीं रह सकतीं |
अपने चरित्र पर द्रष्टि रखें क्योंकि वही आपके भविष्य का जन्म दाता है | 

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