9 June 2013

RELATION

मानव जीवन में पनपने वाला संबंध भावनाओं के तल पर उपजता है | भावना मानव जीवन की आधार शिला है | भावनाओं की परिष्कृति एवं स्थिरता संबंधों को स्वस्थ एवं सुद्रढ़ बनाती है | भावनाएं संबंधों को पोषण देती हैं एवं विकसित करती हैं |
            यदि संबंध अच्छे होते हैं तो जीवन की सुंदरता ,खूबसूरती बढ़ जाती है और यदि संबंधों में कटुता पनपती है तो जीवन नरकतुल्य अर्थहीन लगता है | ऐसा इसलिये होता है क्योंकि संबंधों का आधार ही भावनाएं हैं |
              भावना का विकास ही संबंधों की पूर्णता है | यही जीवन का सच्चा सौंदर्य एवं सुख है | भावना के बिना अधूरेपन एवं अपूर्णता का कष्ट हमेशा चुभता रहता है और अपनों के बिना जीवन वीराना और शुष्क हो जाता है | यही अनेक मनोविकारों का मूल कारण है | अत:हमें अपनी भावनाओं को परिष्कृत एवं विकसित करना चाहिये ,जिससे हमारे संबंध प्रेमपूर्ण एवं सुखदायक हों | 

No comments:

Post a Comment