श्रुतायुध ने भगवान शिव की तपस्या कर के उनसे ऐसी गदा प्राप्त की , जिसका प्रहार त्रिलोक में किसी के लिए सह पाना संभव नहीं था l गदा देते समय भगवान शिव ने श्रुतायुध को आगाह किया कि गदा का उपयोग मात्र सत्कार्यों में किया जा सकता है , यदि व्यक्तिगत राग -द्वेष की पूर्ति के लिए इसका उपयोग हुआ तो यही गदा उसकी मृत्यु का कारण बनेगी l महाभारत के युद्ध में श्रुतायुध को अर्जुन के सामने युद्ध के लिए आना पड़ा l भगवान श्रीकृष्ण को श्रुतायुध की गदा के विषय में ज्ञात था और वे जानते थे कि यदि वह गदा चली तो अर्जुन उस प्रहार को झेल न सकेगा l भगवान श्रीकृष्ण श्रुतायुध को देखकर हँस पड़े l श्रुतायुध को लगा कि भगवान कृष्ण उसे कुरूप समझकर उस पर हँस रहे हैं l क्रोध में वह अपना संयम खो बैठा और भगवान शिव की चेतावनी भूल गया l उसने वह गदा भगवान कृष्ण को लक्ष्य कर के फेंकी , परन्तु गदा ने लौटकर श्रुतायुध का ही वध कर दिया l शक्तियों का उपयोग विवेकसम्मत तरीके से ही किया जाना चाहिए , अन्यथा दंड का भागी बनना पड़ेगा l
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