19 January 2026

WISDOM -------

    प्रत्येक  व्यक्ति  के  जीवन  की   यात्रा    उसके  परिवार  से  ही  आरम्भ  होती  है  l  संस्कार  तो  उसके  होते  ही  हैं   और  परिवार  जीवन  की  प्रथम  पाठशाला  है    इसलिए  गुण -दुर्गुण  के  बीज  परिवार  में  ही   बोये  जाते  हैं  जो  उसकी  उम्र  के  साथ  बढ़कर  विशाल  वृक्ष  बन  जाते  हैं l  बाहरी परिस्थितियां  और  संगत    उसमें  अपना  प्रभाव  डालती  हैं l  ये  परिवार  ही हैं  जो  मनुष्य  को  देवता  या  असुर बना  देते  हैं  l  यह  कलियुग  का  दुर्भाग्य  है  कि  इस  समय  असुरता  परिवार , समाज , संस्थाएं  और  सम्पूर्ण  संसार  में   अपना  आधिपत्य   स्थापित  करने  में    अपनी  पूरी  शक्ति  लगा  रही  है  l  असुरों  का  अहंकार  और  महत्वाकांक्षा   रावण  से  भी  ज्यादा  है   इसलिए  संसार  में  तनाव  और  युद्ध  है  l  अब  यदि  निष्पक्ष   रूप  से  इसकी जिम्मेदारी  की  बात  कहें   तो   मानव  जाति  में  बच्चे  हैं , युवा  हैं  , प्रौढ़  और  उम्र  की  ढलान  पर  पहुँचने  वाले  वृद्ध  हैं  l  बच्चे  मन  के  सच्चे  हैं  , वे  अहंकर  और  महत्वाकांक्षा  से  दूर  हैं  , वे  निश्छल  और  मासूम  हैं  , युद्ध  , पारिवारिक  कलह  से  उन्हें  कोई  मतलब  नहीं  है  l  जो  युवा  पीढ़ी  है   उनके  सपने  हैं  ,  वे  सुख  से  जीना  चाहते  हैं  , उन्हें  सही  दिशा  देने  वाला  कोई  नहीं  है  इसलिए  चालाक  लोग  उनकी    ऊर्जा  का  अपने  स्वार्थ  के  लिए  उपयोग  कर  लेते  हैं  l  अब  शेष  बचे  प्रौढ़  और  उम्र  की  ढलान  वाले  लोग  ,  इनकी  कामना , वासना , महत्वाकांक्षा , अहंकार  कम  नहीं  हो  रहा  l  इन  लोगों  को  लगता  है  क्या -क्या  ,  भोग  लें  , कोई  सुख   छूट  न  जाए  , अहंकार  की  पताका  नीची  न  हो  जाये  l  इसके  लिए  ये लोग  धन , वैभव  यानि  भौतिक  शक्तियों  के  साथ  हर  तरह  की  नकारात्मक  शक्तियों  का  भी  भरपूर  उपयोग  करते  हैं  l  संसार  में   , परिवार  में ,   हर  क्षेत्र  में  अशांति , तनाव , शारीरिक , मानसिक  उत्पीड़न  के  लिए  यही  लोग  उत्तरदायी  हैं  l   इन्हें  कौन समझा  सकता   है  , न्याय  करने  अब  ईश्वर  को  ही  आना  पड़ेगा   l  संसार  में  यदि  कहीं  कुछ  अच्छा  है  , तो  उसके  लिए  भी  इसी  उम्र  के  त्यागी , महात्मा  हैं  लेकिन  उनकी  संख्या  सागर  में  एक  बूंद  के  समान  है  l   आचार्य श्री  कहते  हैं  -- अंधकार  को  मिटाने  के  लिए  एक  किरण  ही  पर्याप्त  है  l  इसलिए  हमें  निराश  नहीं  होना  है  , हर  रात  के  बाद  सुबह  होती  है , वो  सुबह  अवश्य  होगी  l  

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