24 January 2026

WISDOM ----

 संत  का  एक  शिष्य  उनके दर्शन  को  पहुंचा  और  बोला  ----' आज  मैं  गरीबों  को  खाना  खिलाकर  आया  हूँ  l  जब  तक  मैं  किसी  की  सहायता  न  कर  दूँ  , मुझे चैन  नहीं  मिलता  l  बिना   प्रार्थना  किए  मुझे  नींद   भी  नहीं  आती  l "  संत  उसे  समझाते  हुए बोले  --- "  वत्स  !  तुम्हारा  आज  का  पुण्य  समाप्त  हो  गया  l  जो  दिखावे  के  लिए  किसी  की  सहायता  करता  है  , समझ  लो वह  नाटक  कर  रहा  है  ,  किसी  की  सहायता  गुप्त  रूप  से करनी  चाहिए  l  सेवा  इतनी गुप्त  रूप  से   होनी  चाहिए  कि  दांया  हाथ  दान  दे  तो  बांये  हाथ  को  भी  पता  न  चले  l  इस  निष्काम  भाव  से  किया  गया  कर्म  ही  पुण्य  का  माध्यम  बनता  है  l  "                                              युग  का  प्रभाव  प्रत्येक  वर्ग  पर पड़ता  है  l  वर्तमान  में  विश्व  के  लगभग  सभी  देशों  में  प्रजातंत्र  है   l  बड़ी  विषम  स्थिति  है  l  एक  ओर  सांसारिक  आकर्षण  है  , त्याग  और  वैराग्य  बहुत  कठिन  है   दूसरी  ओर  वोट  के  लिए  लालच , महत्वाकांक्षा  , सुख -भोग  का  जाल  बिछाया  जाता  है  l  संत  चाहे  किसी  भी  जाति -धर्म  का  हो  , किसी  भी  देश  का  हो  , उसके  लिए  इस  जाल   में  फँसने  से  बचना  लगभग  असंभव  है  ,  शरीर  से  पहाड़  पर  चले  भी  जाओ  , तो  क्या  यह  चंचल  मन  तो  संसार  में  ही  भटकता  है  l  भगवान  ने  गीता  में  कहा  भी  है  --कोई  विरला  ही  , लाखों , करोड़ों  में  कोई  एक  ही  उन  तक  पहुँच  पाता  है  l  यही  सत्य  है  क्योंकि  जो  भी  ईश्वर  की  ओर  कदम  बढ़ाता  है  , आसुरी  शक्तियां  उसकी  टांग  खींचती  है , उसका  जीना  मुश्किल  कर  देती  है  , वे सबको  अपनी  तरह  राक्षस  बनाना  चाहते  हैं  l  इतिहास    में  ऐसे  अनेक  उदाहरण  हैं  , महात्मा  ईसा  को  सूली  पर  चढ़ा  दिया , मीरा  को  जहर  दे  दिया  ---- ऐसे  उदाहरणों  से   इतिहास   भरा  पड़ा  है  l  कलियुग  में  चाहे  लाख  बुराइयाँ  हों  ,  लेकिन  अब  ऐसा  नहीं  होगा  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य  जी  ने  भी  कहा  है  ---युग  परिवर्तन  होगा ,  आसुरी  प्रवृत्ति  के  लोगों  को  हारना  ही  होगा  ,  उन्हें  सिर  उठाने  की  जगह  ही  नहीं  मिलेगी  l  

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