19 November 2017

जिन्होंने चीन को विकसित और शक्तिशाली देश बनाने का प्रयत्न किया ----- माओत्से तुंग

   बीसवीं  सदी के   प्रारंभ  में  जब   चीन  की  चर्चा  होती  थी   तो  सभी  उसे   अफीमची  और  आलसियों  का  देश  कहते  थे   l  स्वाभिमानी  चीनियों  ने  जब  भयंकर   अकाल  में  भी   बाहर  से  आई  मदद  को  नकार  दिया  और  विदेशी  सहायता  अस्वीकार  कर  दी  ,  तब  लोगों  ने  जाना  कि   एक  दिलेर ,  जाँबाज  माओत्से -तुंग  वहां  उठ  खड़ा  हुआ  है  l  बीहड़  जंगलों  में  मुक्ति  संघर्ष  के  दौरान   नेतृत्व   करने  वाले  माओ  ने  बुर्जुआ वादी   शासन तंत्र  से  मोर्चा  लिया  l  क्रांति  का  सफल  संचालन  किया   l  राष्ट्र  के  गाँव - गाँव  की   सात  हजार  मील  की  पैदल  यात्रा  संपन्न  की   l  संसार  में  सबसे  ज्यादा  आबादी  वाला   यह  देश  आज  इतना  आधुनिक ,  तकनीकी  से  संपन्न और  विकसित  बन  गया  है   तो  उसका  श्री  माओत्से तुंग  को  ही  जाता  है  l 

18 November 2017

WISDOM ------ काल बड़ा बलवान है

'  काल  की  बड़ी  महिमा  है  l  काल  की  महिमा  से  जो  अवगत  होते  हैं  ,  वे  उसको  प्रणाम  कर  के  उसके  अनुकूल  स्वयं  को  ढाल  लेते  हैं  l  काल  बड़े - बड़ों  को  धराशायी  कर  देता  है  l  बड़े - बड़े  साम्राज्य  जिनकी  कहीं  कोई  सीमा   तक   नजर  नहीं  आती  है  , जिनका  सूर्य  कभी  ढलता  तक  नहीं  है  ,   इतने  बड़े  एवं  व्यापक  साम्राज्य  को  भी  काल  क्षण  भर  में   धूल - धूसरित  कर  देता  है   l
  ' काल  उठाता  है  तो  एक  तिनका  भी  पहाड़  बन  जाता  है  l  एक  असहाय  निर्बल  भी  बलशाली   बन  जाता  है    l
  पुराणों  में  एक  कथा  है  कि ------   विष्णु  भगवन  ने   वामन  रूप  धरकर    राजा  बलि  से  दान  में  तीन  पग  जमीन  मांग  ली   और  इन  तीन  पग  में   तीनो  लोकों  को  नाप   कर  राजा  बलि  को   पाताल  लोक  पहुंचा  दिया  l   महाराज  बलि  ने  कहा ------  "    आज  काल  हमारे  साथ  नहीं  खड़ा  l  ऐसे   विपरीत  समय  में   कोई     ज्ञान ,  कोई   तप ,   कोई  साधान   काम  नहीं  आता  है  l    काल  की  इस  विपरीत  दशा  में   हमें  शांत  एवं  स्थिर  बने  रहना  चाहिए  l  प्रभु  द्वारा  निर्धारित  स्थान  पर  रहकर   और  अपनी  भक्ति  के  सहारे   आने  वाले  अनुकूल  समय  की   प्रतीक्षा   के  अलावा  और  कोई  विकल्प  नहीं  है   l  इस  समय  कोई  प्रयास - पुरुषार्थ  काम  नहीं  आता ,  कोई  अपना  भी  साथ  नहीं  देता   l  केवल  ईश्वर  ही  सुनते  हैं  और  साथ  देते  हैं   l   यही  सत्य  है  l  

17 November 2017

WISDOM ----- जो उदार हैं , वही इनसान हैं

 मनुष्य  को  जो  सम्पदाएँ  मिली  हैं   वह  सिर्फ  इसलिए  मिली  हैं  कि  अपनी  आवश्यकताएं  पूरी  करने  के  बाद  जो  शेष  बच    जाता  है   उसका  उपयोग  संसार  में  सुख - शान्ति  और  समृद्धि  बढ़ाने  के  लिए  करें  l
       भेड़ों  से  हमें  नसीहत  लेनी  चाहिए  l  भेड़  अपने  बदन  पर  ऊन  पैदा  करती  है     और  वह  उसे  लोक  हित  के  लिए  मनुष्यों  को  देती  है  l  उस  ऊन  से  कम्बल , गर्म  कपडे  बनते  हैं  ,  जिससे  लोगों  को  ठण्ड  से   बचाव  होता  है  l  जितनी  बार  ऊन   काटी  जाती  है  उतनी  ही  बार  नयी  ऊन  पैदा  होती  चली  जाती  है  ,  प्रकृति  उस  ऊन  का  मुआवजा  बार - बार  देती  है  l   मनुष्य  को  रीछ  जैसा  नहीं  होना  चाहिए  l  वह  अपनी  ऊन  किसी  को  नहीं  देता   इसलिए   जितनी  ऊन   भगवान  से  लेकर  आया  था  ,  कुदरत  ने  उससे  एक  अंश  भी  अधिक  उसे  नहीं  दी   l 

16 November 2017

WISDOM

   श्रवणकुमार  के  माता -पिता  अंधे  थे  ,  पर  उनकी  इच्छा   तीर्थ यात्रा  की  थी  l  श्रवणकुमार  ने  आश्चर्य  से  पूछा ,  जब  आप  लोगों  को  दीखता  ही   नहीं  है  और  देव दर्शन  कर  नहीं  सकेंगे  ,  तो  ऐसी  यात्रा  से  क्या  लाभ   ?  पिता  ने  कहा ,  तात ! तीर्थयात्रा  का  उद्देश्य  देव दर्शन  ही  नहीं  है ,  वरन  लोगों  के  घर - घर  गाँव - गाँव  जाकर  जन संपर्क  साधना और  धर्मोपदेश  करना  है  l  यह  कार्य  हम  लोग  बिना  नेत्रों  के  भी  कर  सकते  है  l  इनसे  इन  दिनों  जो  निरर्थक  समय  बीतता  है  ,  उसकी  सार्थकता  बन  पड़ेगी  l  

14 November 2017

WISDOM ----- जिन्हें दैवी सत्ताओं का अनुग्रह प्राप्त होता है , उन्हें लोक - प्रतिष्ठा प्रभावित नहीं करती

   भारत  की  सर्वोच्च  उपाधि  ' भारत  रत्न '  उसका  विधान  पं. गोविन्द वल्लभ  पन्त  के  समय  से  चला  था   l  प्रथम  व  द्वितीय    के  बाद  जब  अगले  की  बारी  आई तो  सर्व सम्मति  से  भाई जी  श्री  हनुमान  प्रसाद  पोद्दार  का  नाम  चुना  गया  l  वे  गीता  प्रेस  गोरखपुर  के  संस्थापक --- गीता  आन्दोलन  के  प्रणेता  थे   l  उन  तक  बात  पहुंची  l  उन्होंने  पन्त  जी  से  कहा ---- " हम  इस  योग्य  नहीं  हैं  l  देश  बड़ा  है  l  कई  सुयोग्य  व्यक्ति  होंगे  l  हमने  अगर  कुछ  किया  भी  है  तो  किसी  पुरस्कार  की  आशा  से  नहीं  किया  l  आप  किसी   और  को  दे    दें   l "     नेहरु  जी  को  पता  चला   तो  उन्होंने  पंत  जी  से  कहा ---- " जाओ  और  मिलो  l  आदर - सत्कार  से  बात  करो  l   कोई  बात  हो  सकती  है  l  पता  लगाओ  l  "
  पन्त  जी  ने  जाकर  बात  की   l  पुन:  भाई  जी  बोले ----- "  हम  स्वयं  को  इस लायक  मानते  ही  नहीं  l  हमने  भक्ति भाव  से   परमात्मा  की  आराधना  मानकर  ही  सब  कुछ  किया  है   l  "
  ऐसा  ही  हुआ  l  सरकार  को  अपना  इरादा  बदलना  पड़ा  l
  वस्तुतः  भाई  जी  जिस  भाव  और  भूमिका  में  जीते  थे  ,  वह  लोक  की  प्रतिष्ठा  से  परे ---- और  भी  ऊपर   था  l  उन्हें  दैवी  सत्ताओं  का  अनुग्रह  सहज  ही  सदैव  प्राप्त  था   l  

13 November 2017

WISDOM ----- यदि हम समय का सदुपयोग नहीं करेंगे तो समय ही हमें बरबाद कर देगा l

  वृहत  भारत  के  विश्वकर्मा  श्री  विश्वेश्वरैया   कहा  करते  थे --- ' यदि  हम  जीवन  में  सफलता  प्राप्त  करना  चाहते  हैं  , तो  उसका  मूल  मन्त्र  है ----- समय  का  सदुपयोग   l '   अति - परिश्रम  के  साथ  समय पालन  का  उनमे  अद्भुत  गुण  था  l  विद्दार्थी  जीवन  से  ही  वे  समय  के  अत्यंत  पाबंद  थे  l  उनके  पढ़ने - लिखने ,  सोने - जागने  का  समय  नियत  था  l  आरम्भ  से  ही  टाइमटेबिल   बनाकर  कार्य  करने  कि  उनकी  आदत  थी  l  उनकी  महानता  का ,  उपलब्धियों  का  यही  रहस्य  था  l  उन्हें   ' भारत  रत्न ' से  सम्मानित  किया  गया  था   l
  श्री  विश्वेश्वरैया  प्रथम  श्रेणी  के  डिब्बे  में  सफर  कर  रहे  थे  l उसी  में  कुछ  अंग्रेज  भी  थे  l  अचानक  वे  हड़बड़ा कर  उठे  और  गाड़ी  खड़ी  करने  के  लिए  जंजीर  खींचने  लगे  l  अंग्रेजों  के  मना  करने  पर  भी  वे  न   माने  और  जंजीर  खींचकर  गाड़ी  खड़ी  कर  दी  l  गार्ड  सहित  रेल - कर्मचारी  आये  और  गाड़ी  रोकने  का  कारण  पूछा  तो  श्री  विश्वेश्वरैया  ने  कहा --- "कुछ  ही  आगे  रेल  की  पटरी  ख़राब  हो  गई  है  ,  गाड़ी  उलट  जाने  का  खतरा  है  l "  किसी  को  उनके  इस  कथन  पर  विश्वास  नहीं  हुआ  तो  उन्होंने  कहा ---- " मैं  हर  बात  को  बहुत  गंभीरता    से  सोचने  और  परखने  का  अभ्यस्त   रहा  हूँ    l  रेल  के  पहिये  और  पटरी   के  घिसने  से  जो  आवाज  निकलती  है  ,  वह  बताती  है  कि  आगे  पटरी  खराब  पड़ी  है  l  "  उन्होंने  कहा  कि  इस  कारन  गाड़ी  बहुत  धीरे  और  सावधानी  से  चलानी  चाहिए  l 
  उस  समय  तो  किसी  ने  उनकी  बात  का  भरोसा  नहीं  किया   किन्तु  थोड़ी  दूर  जाने  पर  जब  पटरी  उखड़ी   पाई  गई  तो  सब  अवाक  रह  गए   और  यात्रियों  की  जान   बचाने   का  धन्यवाद  देते  हुए  उन्हें  भविष्यवक्ता  कहने  लगे  l  विश्वेश्वरैया  यही  कहते  रहे कि --- "   गंभीरता  पूर्वक  सामान्य  बातों  को    भी  ध्यान  से  समझने   और  जानने  का  प्रयत्न  करने  वाला  हर   व्यक्ति   भविष्य वक्ता  हो  सकता  है   l  '                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        

11 November 2017

WISDOM ------ सामाजिक मूल्य एवं आदर्श श्रेष्ठ व्यक्तित्व संपन्न महान व्यक्तियों के माध्यम से ही सुरक्षित रहते हैं l

वर्तमान  समय  में  श्रेष्ठ  व्यक्तित्व  संपन्न  मनीषियों  और  विचारकों  के  अभाव  के  कारण  समाज  रुग्ण और  जर्जर  हो  चुका  है  l  यदि  वातावरण   मूल्यहीनता  रूपी  प्रदूषण  से  ओत-प्रोत  हो  तो  समाज  में  अनैतिक  और  स्वार्थी  व्यक्तियों  की  भरमार  होती  है  l  आज  स्वार्थ  सर्वोपरि  हो  गया  है  और  मूल्य ,  नीति,  आदर्श  व  परम्पराएँ   बीते  दिनों  की  बातें  बन  गई  हैं   l   ऐसे  श्रीहीन  समाज में  अनीति ,  आतंक  और  अत्याचार  पनपते  हैं   l  समाज  में  शूरवीरों  की  संख्या  घटने  लगती  है   और  लोगों  में  कायरता  बढ़ने  लगती  है  l   इस  जर्जर  समाज  को  पुनर्जीवित  करने  के  लिए  समर्थ  मार्गदर्शकों  की  आवश्यकता  है  l