आज संसार में छल , कपट , फरेब , धोखा , लालच , अहंकार , कायरता , अतृप्त इच्छाएं ----- आदि नकारात्मक शक्तियों का जाल इतना सघन हो गया है कि मन में प्रश्न उत्पन्न होता है कि ईश्वर कहाँ हैं ? यदि ईश्वर हैं तो असुरता इतनी हावी क्यों है ? आसुरी शक्तियों का साम्राज्य इतना क्यों बढ़ता जा रहा है ? ययाति की तरह भोग -विलास की इच्छाएं कभी समाप्त ही नहीं हो रहीं हैं l अब मनुष्य पर स्वार्थ , अहंकार इतना अधिक हावी हो गया है कि वे त्याग , ईमानदारी , सत्य बोलना जैसे सद्गुण भूल गये हैं l अनेक विद्वान कहते हैं कि भगवान कलिक का अवतार होगा , फिर सतयुग आएगा l अत्याचार , अन्याय और अधर्म को मिटाने , आसुरी शक्तियों का अंत करने के लिए भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण इस धरती पर अवतरित हुए l आसुरी शक्तियों का अंत भी हुआ , कुछ समय शांति भी रही लेकिन संस्कार नहीं मिटे , रावण , कंस , दुर्योधन , दु:शासन , हिरन्यकश्यप जैसे आसुरी तत्वों ने सम्पूर्ण संसार पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है l पं . श्रीराम शर्मा आचार्य जी कहते हैं ---- 'असुरता को मिटाने के लिए अब ईश्वर का अंशावतार होगा l इसका अर्थ है कि एक व्यक्ति विशेष के रूप में ईश्वर नहीं आयेंगे , वे लाखों , करोड़ों लोगों के मन में , ह्रदय में अंश रूप में प्रवेश करेंगे l जिससे व्यक्ति की चेतना जाग्रत हो , उसका विवेक जागे , वह अपना मूल्य समझे की वे ईश्वर के राजकुमार हैं , बंदरों के वंशज नहीं हैं l जब लोग जागरूक होंगे , अपनी सोयी हुई शक्तियों को जाग्रत करेंगे तब असुरता को मिटने में देर न लगेगी l