आज संसार में लोगों के जीवन में अनेक समस्याएं हैं इसके लिए सम्पूर्ण मानव समुदाय ही उत्तरदायी है l इसका मूल कारण यही है कि सभी धर्मों में आडम्बर और दिखावा तो बहुत है लेकिन नैतिकता और मानवीय मूल्यों की अनिवार्यता की सभी ने उपेक्षा कर दी है l धन के लालच ने मानवीय गरिमा को ही समाप्त कर दिया है l जीवन के सभी क्षेत्र अब व्यापार बन गए हैं l वैज्ञानिक तो बड़े -बड़े अविष्कार कर देते हैं , उन्हें समाज में लाना , लोगों के हाथों में पहुँचाना , यह व्यापारी और धनाढ्य लोगों की जिम्मेदारी है l लेकिन यदि उन्हें मानवीय मूल्यों का ज्ञान नहीं है तो वे इसे अधिकाधिक धन कमाने के लिए इस्तेमाल करेंगे जैसे कृषि में रासायनिक खाद , कीटनाशक , उन्नत बीज आदि का प्रयोग करने से फसल तो ज्यादा हो गई लेकिन ऐसे जहरीले रसायन से चील , गिद्ध भी नहीं दीखते , मनुष्यों को खतरनाक बीमारियाँ हो गईं l सब छोटे -बड़े अस्पताल बीमारों से भरे हैं लेकिन दूसरी ओर एक वर्ग ऐसा भी है जो दिन -दूनी रात चौगुनी गति से अमीर हो रहा है l वैज्ञानिकों को तो ईश्वर ने बुद्धि दी है तो वे नए -नए अविष्कार करते ही हैं लेकिन उन्हें संसार में क्रियाशील करने वालों में विवेक , करुणा , दया , मानवीयता नहीं है तो वे उन आविष्कारों की मदद से कहीं बेरोजगारी फैला देंगे , कभी महामारी फ़ैल जाएगी l धरती आकाश सब प्रदूषित कर दिया , इस धन के लालच ने l धन जीवन के लिए बहुत जरुरी है लेकिन इसकी भी एक सीमा , एक मर्यादा होनी चाहिए l यह मर्यादा अब नहीं रही , कला और साहित्य में इस लालच ने लोगों की मानसिकता को प्रदूषित कर दिया l ईमानदारी , सच्चाई सब समाप्त होने से मनुष्य एक वस्तु बन गया है , जीवन सुरक्षित नहीं है l फिर भी लोग आशावादी हैं कि भगवान आएंगे और सब ठीक हो जायेगा l अब धर्म और अधर्म के बीच युद्ध नहीं है कि ईश्वर धर्म की रक्षा के लिए आयेंगे l अब तो सभी अधर्म की राह पर हैं l अब जरुरत है लोगों की चेतना को जगाने की l जिन लोगों में सद्गुण हैं , सन्मार्ग पर हैं , ईश्वर उन्ही की चेतना में प्रवेश कर के उन्हें अध्यात्म पथ पर आगे बढ़ाते हैं और उनके प्रकाश से अन्य लोगों के जीवन का अँधेरा भी दूर होने लगता है l l आचार्य श्री कहते हैं ---ईश्वर तो हर पल हमारी मदद को तैयार हैं , हम सन्मार्ग पर चलने का संकल्प तो ले , उस दिशा में एक कदम तो आगे बढ़ाएं l लेकिन हमें एक बात अवश्य ध्यान रखनी होगी कि अध्यात्म की राह पर झूठ , फरेब , धोखेबाजी नहीं चलती l
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