9 February 2019

WISDOM ---- दुराचारी से दुराचारी व्यक्ति भी ईश्वर की शरण में जाये और यह संकल्प ले कि अब उससे कोई गलत कार्य नहीं होगा तो प्रभु उसे भी तार देते हैं ----- श्रीमद् भगवद्गीता

' गन्दा  नाला  गंगा  में  मिलकर  पवित्र  हो  जाता  है  l ' ऐसे  कई  उदाहरण  हैं   जब  प्रभु  से  जुड़ने  के  बाद   जीवन  की  राह  बदल  गई  ----- अंगुलिमाल  डाकू  के  रूप  में  कुख्यात  हो   चुका    था  और  अनेक  नागरिकों  की  उँगलियाँ  काटकर   उनकी माला  पहनकर  घूमता  था  , तब  प्रसेनजित  की  सेनाएं  भी  उससे  हार  मान  गईं  थीं  l   तब  उसके  पास  चलकर  गौतम  बुद्ध  आये  l  अंगुलिमाल  ने  उनसे  कहा  --- " भिक्षु  !  मैं  तुम्हे  मार  दूंगा  l  "   अपराधी  की मन:  स्थिति  कायर  के  समान  ही  होती  है  इसलिए  वह  उन्हें  बार -बार रुकने  को  कह  रहा  था  l  तब  तथागत  बोले  --- " रुकना  तो  तुझे  है  पुत्र  ! मैं  तो  कभी  का  ठहरा  हुआ  हूँ  l  भाग  तो  तू रहा  है  --- जिन्दगी  से , अपने  आप  से  ,  अपने  भगवान  से   l  इतना  कहते  हुए  वे  नजदीक  आ  गए   और  जब  तक  वह  कुछ  समझ  पाता,  उनने  उसे  गले  लगा  लिया  l
 अंगुलिमाल  को  लोग   ऊँगली  दिखा - दिखाकर  ताना  मारते  थे  ,  पहली  बार उसे  सच्चा  प्यार  मिला  l 
  धीरे - धीरे  संघ  में  लोग  चर्चा  करने  लगे  कि   एक  अपराधी  हमारे  बीच  रह  रहा  है   l  भगवन  ने  अंगुलिमाल से  धैर्य  रखने  को  कहा   कि  कोई  प्रतिक्रिया  न  करे  l  भगवन  बुद्ध  के  पास   सभी  भिक्षु जन   आये   और  कहा  कि  अंगुलिमाल  के  संघ  में  शामिल  होने  से  संघ  की  बदनामी  हो  रही  है   l  "
  बुद्ध  बोले --- "  वह  तो  पूर्व  में  डाकू  था  ,  अब  भिक्षु  है   l  पर  अब  तुममे  से  बहुत  सारे  डाकू  बनने  की  दिशा  में  चल  रहे  हो  ,  उसे  मार  डालने  की  सोच  रहे  हो  l  यह  क्या  कर  रहे  हो  l "     वास्तव  में  कुछ  ऐसा  ही  सोच  रहे  थे   l  एक  दिन  भगवान  ने   अंगुलिमाल  को  भिक्षा  मांगने  भेजा ,  उसी  क्षेत्र  में  जहाँ  वह  अपराधी  बना  था  l  लोगों  में  द्वेष  था , गुस्सा  था  l  उसे   पत्थर खाने  पड़े   l  चोट  खाकर  मूर्छित  होकर  गिर  पड़ा  l  और  कोई  तो  नहीं  आया  ,  बुद्ध  भगवान  आये  ,  उसकी  सेवा - शुश्रूषा   की  l  जब  वह  चैतन्य  हुआ  तो   कहा  कि  --- "  तुम  एक  घुड़की  दे  देते  ,  सब  भाग  जाते  ,  क्यों  मार  खाते  रहे  ? "
अंगुलिमाल  बोला --- "  प्रभो  !   कल  तक  मैं  बेहोश  था  ,  आज  ये  बेहोश  हैं  l  "  

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