भगवान श्रीराम के नाम की इतनी महिमा है कि उसे कुछ शब्दों में नहीं समझाया जा सकता है l ऋषियों ने बड़े विस्तार से 'राम ' नाम की महिमा का गान किया है l कहते हैं यदि श्रद्धा से एक बार ही 'राम 'नाम ले लिया जाए तो भवसागर पार हो जाता है l छोटे बच्चे भी जब अन्ताक्षरी खेलते हैं तो उसकी शुरुआत राम नाम से करते हैं l एक बच्चा शुरू करता है ---' राम नाम की लूट है , लूट सके तो लूट , अंत काल पछताएगा , प्राण जाएंगे छूट l ' उठते , बैठते , चलते -फिरते हम राम -राम करते ही हैं l कहते हैं इस संसार में कुछ भी अकारण नहीं होता , एक पत्ता भी हिलता है तो वह ईश्वर की मरजी से l यदि हमारी सोच सकारात्मक हो तो नकारात्मक घटनाओं के पीछे छुपी सकारात्मकता को आसानी से समझा जा सकता है l कलियुग में राम का नाम लेना बहुत जरुरी है , फिर चाहे वह किसी भी ढंग से , किसी भी उदेश्य से लिया जाये l जब एक व्यक्ति राम नाम लेकर अपना कल्याण कर सकता है तो वर्तमान में उदय हुई परिस्थितियों में लाखों - करोड़ों लोग ' राम ' नाम ले रहे हैं ---राम के गहने , राम के खडाऊं , राम के ---, राम के ---- -- लाखों , करोड़ों लोग किसी न किसी बहाने ' राम ' का नाम ले रहे हैं , इससे सामूहिक कल्याण होगा , प्रकृति का पोषण होगा l l सामूहिक नाम जप की महिमा को ज्ञानी संत विस्तार से समझा सकते है ' कलियुग केवल नाम अधारा ' l कोई भी घटना भौतिक जगत में जैसी दिखाई पड़ती है , आध्यात्मिक जगत में उसके पीछे कोई बड़ा उद्देश्य होता है l
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