15 July 2026

WISDOM ------

   वर्तमान  समय  में  विभिन्न  क्षेत्रों  में  जितना  भी  ज्ञान  है  ,  उसके  बीज   हमें  पूर्व  के  युगों  में  भी  मिलते  हैं  l  उनमें  अंतर  केवल  अभिव्यक्ति  का  है  l  इसे  सरल  रूप  में  समझें  तो   दो  कहावतें  हैं  ---- ' अंधे  के  आगे  रोवे , अपना  दीदा  खोवे  l '  और  दूसरी  कहावत  है  --- ' भैंस  के  आगे  बीन  बजाए  , भैंस   खड़ी  डकराये  l '           त्रेतायुग  में  जब  भगवान  श्री  राम  को  समुद्र  पार  कर  लंका  जाना  था  तब  उन्होंने  तीन  दिन  तक  समुद्र  से  प्रार्थना  की  कि  वह  उन्हें   लंका  जाने  का  रास्ता  दे  , लेकिन  समुद्र  ने  एक  न  सुनी  l  लक्ष्मण जी  को  बहुत  क्रोध  आया  , उनका  कहना  था  -- दैव -दैव  आलसी  पुकारा  l '  आखिर  श्री  राम  ने  समुद्र  को  सुखाने  के  लिए  जैसे  ही  धनुष  बाण  उठाया  ,  समुद्र  देव  प्रकट  हो  गए   और  नल -नील  के  माध्यम  से  समुद्र  पर  सेतु  बनाने  का   सुझाव  दिया  l  द्वापर  युग  में  पांडवों  पर  दुर्योधन , शकुनि  आदि  ने  इतना  अत्याचार  किया  , हर  तरह  से  उन्हें  उत्पीड़ित  किया  लेकिन  पांडवों  ने  कभी  भी   दुर्योधन  से  , भीष्म  पितामह  से  , धृतराष्ट्र  से  कभी  भी  दया  की  भीख  नहीं  मांगी   क्योंकि  उन्हें  यह  ज्ञान  था  कि   जिनकी आसुरी  प्रवृति  होती  है  उनमें  करुणा , संवेदना  नहीं  होती  , उनसे  दया  की  उम्मीद  करना  , अपनी  ऊर्जा  को  बरबाद  करना  है  l  इसलिए  पांडवों  ने   अपने  शरीर  को  मजबूत  बनाया  , तप  से  और  ज्ञान  से  शारीरिक   और  मानसिक  बल  अर्जित  किया  , दिव्य  अस्त्र -शस्त्र  प्राप्त  किए    l  उनके  ऐसा  करने  पर  पूरी  कायनात  ने  उनकी  मदद  की  , स्वयं  भगवान  श्रीकृष्ण  उनके  सारथि  बने   और  वीरता  से  उन्होंने  अपना  हक  प्राप्त  किया  l  भगवान  श्रीकृष्ण  ने  अर्जुन  को   गीता  का  उपदेश  दिया  कि  कर्म  करो  , परिस्थिति  चाहे  कैसी  भी  हो  कर्म  करना  नहीं   छोड़ो  ,  कर्म  से  भागो  मत  l  गीता  का  ज्ञान  हमें  जीवन  जीने  की  कला  सिखाता  है  l   चारों  तरफ  कांटे  हैं  , घोर  अंधकार  है  , ऐसी  कठिन  परिस्थिति  से  हम  कैसे  सकुशल  बाहर  निकल सकते  हैं  ,  यह  ज्ञान  हमें  गीता  से  मिलता  है  l  इस  ज्ञान  को  सही  ढंग  से  न  समझ  पाने  के  कारण    अनेक  लोग   बड़ी  मुश्किल  से  मिले  इस  मानव  तन  की उपेक्षा  कर  देते  हैं  l   संसार  के  सारे  काम  इस    देह  से  ही  होते  हैं  ,  जब  यह  शरीर  ही  कमजोर   हो  गया    तो  क्या   करोगे  ?  आज  संसार  को  गीता  के  ज्ञान  की  जरुरत  है  l  

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