31 March 2020

WISDOM -----

 वैज्ञानिक  प्रगति  के  इस  युग  में  मनुष्य  को  सब  कुछ  मिला   परन्तु  जो  हमसे  छीन  गया  वह  है ---- मानवीय  संवेदना  l  संवेदनहीन  व्यक्ति  और  समाज  ही  व्यवसाय  कर  सकता  है  , वह  लाभ - हानि  ढूंढता  है  l  चिकित्सा  और  चिकित्स्क  वहीँ  प्रभावशाली  हैं  , जहाँ  सम्पन्नता  है  , अन्यथा  निर्धन  रोगी  सड़कों  और  गलियों  में   दम   तोड़  देता  है   l
  बीमारी , महामारी  न  ऊंच - नीच  देखती  ,  न  जात - पांत ,  न  अमीर - गरीब  l  एक  ओर   गरीब  व्यक्ति   अपनी गरीबी , अभाव , भूख ,   रहने  को  घर  नहीं ,  गाँव  में  अच्छी  चिकित्सा  सुविधाएँ  नहीं  और  शहरों  में  व्यवसायिक  लूट   की  वजह  से  मरता  है  l   तो  दूसरी   ओर  अमीर , धनसम्पन्न  व्यक्ति   भोग - विलास  का  जीवन  जीने ,  कामना - वासना  की  अंधी  दौड़  में  अपनी   जीवनी शक्ति  को  खो देता  है  l   महँगी  दवाइयाँ , अच्छे  डॉक्टर   भी  उसका  जीवन  नहीं  बचा   पाते  l
   अधिकाधिक  लाभ  कमाने  की  प्रवृति  को   त्याग  कर  ' जियो  और  जीने  दो ' के  सिद्धांत  पर  चलकर  ही  मानवता  सुखी  हो  सकती  है  l 

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