यदि मनुष्य के पास सद्बुद्धि हो, विवेक हो तो संसार की सभी समस्याओं का आसानी से समाधान हो जाये लेकिन सद्बुद्धि के अभाव में उच्च शिक्षित और उच्च पदों पर बैठे व्यक्ति भी हमेशा समस्या पर चर्चा करेंगे , उसके समाधान के बारे में गहराई से नहीं सोचेंगे l विवेक होने पर ही हम अपनी जीवन में आये अवसरों को पहचान सकेंगे l पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- ' दुर्भाग्य मनुष्य का द्वार तब तक खटखटाता है , जब तक वह उसे खोल न दे जबकि सौभाग्य एक बार द्वार खटखटा कर धीरे से चला जाता है l अत: हमें हर शुभ अवसर के लिए सजग और तैयार रहना चाहिए l '
8 February 2021
7 February 2021
WISDOM ------ आत्मविश्वास
सारा यूरोप यूनान की फौजों से संत्रस्त था l अजेय समझी जाने वाली यूनानियों की धाक उन दिनों सब देशों पर छाई हुई थी l यूनानी फौजें जिस पर भी आक्रमण करतीं , वह हिम्मत हार कर बैठ जाता और अपनी पराजय स्वीकार कर लेता l रोम के सेनापति सीजर ने देखा कि इस व्यापक पराजय का कारण लोगों में व्याप्त आत्महीनता ही है , जिसके कारण उन्होंने अपने को दुर्बल और यूनानियों को बलवान स्वीकार कर लिया है l इस मन: स्थिति को बदला जाना चाहिए l सीजर ने अपने देश की दीवारों पर यह वाक्य लिखवाया ----- ' यूनानी फौजें तभी तक अजेय हैं , जब तक हम उनके सामने घुटने टेके बैठे हैं l आओ , तनकर खड़े हो जाएँ l ' इस वाक्य का रोम की जनता पर जादू जैसा असर हुआ l जमकर लड़ाई लड़ी गई और अजेय समझा जाने वाला यूनान परास्त हो गया l
6 February 2021
WISDOM ------
ऋषियों का कहना है कि ---- अहंकार से अज्ञान उपजता है , इससे व्यक्ति को दिशा भ्रम हो जाता है l दिशा - भ्रम होने पर व्यक्ति न करने योग्य करता है और न सोचने योग्य सोचता है l अहंकार से उपजे अज्ञान के कारण व्यक्ति स्वयं अपने विनाश को निमंत्रण दे डालता है l पुराण में एक कथा है ---- एक राजा था l वह राजा स्वयं और उसकी समस्त प्रजा गायत्री साधना करती थी एवं एकादशी का व्रत करती थी l इसके प्रभाव से उनके राज्य में समस्त प्रजा बहुत प्रसन्न तथा स्वस्थ थी और मृत्यु के बाद कोई भी नरक में नहीं जाता था l इससे यमराज को बड़ी परेशानी थी l संभवत: स्वर्ग में बहुत भीड़ हो जाये , यह भी बहुत चिंता की बात है l उन्होंने अपनी ब्रह्मा जी से कही कि ऐसा कोई उपाय करें जिससे राज्य वासी नरक में आने लगें l ब्रह्मा जी ने पहले तो बहुत मना किया फिर यमराज की चिंता को समझते हुए बोले ---- तुम किसी भी तरीके से उस राजा के अहंकार को जगाओ , शेष सभी कार्य अहंकार से उपजा अज्ञान स्वयं कर लेगा l ' यमराज का प्रयत्न सफल हुआ l --------------- ऋषि कहते हैं ---- अशांति का मूल कारण स्वार्थ और अहंकार है l और इसके समाधान का उपाय है ---- प्रेम , सात्विक प्रेम , सेवा और परोपकार l इससे स्वार्थ और अहंकार गलता है और ईश्वर का सान्निध्य प्राप्त होता है l
5 February 2021
WISDOM ------
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं --- ' लोकसेवियों के पतन का कारण मुख्य रूप से तीन दुष्प्रवृत्तियाँ हैं ---- वासना , तृष्णा और अहंता l वासना और तृष्णा की दौड़ तो व्यक्ति को थकाती है , पर अहंता का मुख तो सुरसा के मुख से भी ज्यादा विशाल है , जो व्यक्ति का सर्वनाश किए बिना चैन से नहीं बैठता l अहंता के भूखे को दुनिया जहान की सारी प्रशंसा , सारा यश , सारा मान - सम्मान , सारा बड़प्पन, सारे अधिकार , सारी सत्ता अपने ही हाथों में देखने का पागलपन सवार हो जाता है l ' आचार्य श्री आगे लिखते हैं ---- " इस संसार के इतिहास में सबसे ज्यादा अपराध इसी अहंता के कारण हुए हैं l रावण से लेकर कंस , दुर्योधन को उनकी अहंता ही ले डूबी l अहंकार ही है जिसके कारण लोग आपस में लड़ते हैं l प्रतिशोध , उत्पीड़न इन सबका कारण अहंता ही है l कथा चाहे रावण की हो या हिरण्यकशिपु की या सिकंदर , तैमूरलंग , चंगेज खां , शिशुपाल की ---- इन सबके अंत का कारण उनके सिर पर सवार अहंता ही रही l यह अहंता ही है जो इन चक्रवर्ती सम्राटों को ले डूबी l आचार्य श्री कहते हैं ---- इस दुष्प्रवृति से सदा व निरंतर सावधान रहने की आवश्यकता है l '
4 February 2021
WISDOM ----
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- ' आलोचनाओं का जवाब देने में जो शक्ति और ऊर्जा खरच होती है , उससे कई रचनात्मक कार्य किए जा सकते हैं l जो आलोचनाओं की परवाह किए बिना अपने कार्य पर ध्यान देते हैं , वे ही कुछ अच्छा कर पाते हैं l इसलिए आलोचना तो सुननी चाहिए l यदि वास्तव में आलोचना के अनुसार हमारे अंदर कमियां हैं , तो उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए , न कि आलोचना करने वाले की निंदा करनी चाहिए l '
WISDOM -----
इसे मनुष्य की दुर्बुद्धि ही कहेंगे कि वे अपनी कमियों की ओर नहीं देखते , अपनी गलतियों को सुधार कर अपनी जड़ों को मजबूत नहीं करते बल्कि अपनी सारी ऊर्जा दूसरों की कमियाँ निकालने तथा दूसरों की जड़ें हिलाने में गँवा देते है l इसका परिणाम बड़ा दुःखदायी होता है l महाभारत का यह प्रसंग इसी सत्य को बताता है ------ महाभारत का एक पात्र है --- ' शकुनि ' , जो बहुत ही धूर्त , कुटिल और षड्यंत्र करने में माहिर था l शकुनि गांधार नरेश था , लेकिन वह हमेशा अपनी बहन गांधारी के पास हस्तिनापुर में ही रहा l शकुनि जैसा व्यक्ति अपनी बहन गांधारी जो महान पतिव्रता थी , गुरु द्रोण , भीष्म पितामह जैसी महान विभूतियों के बीच रहने पर भी अपनी कुटिलता को नहीं छोड़ सका l सारा जीवन वह दुर्योधन के मन में विषबीज बोता रहा l अपने भानजे दुर्योधन को युवराज बनाने के लिए उसने पांडवों को रास्ते से हटाने के _लिए अनेकों षड्यंत्र रचे l भीम को खीर में जहर पिलाया , पांडवों को अग्नि में भस्म करने हेतु लाक्षागृह का षड्यंत्र रचा , फिर पांडवों को जुए के लिए चुनौती देकर उनको बहुत अपमानित किया l इन सब षड्यंत्रों का परिणाम हुआ --- महाभारत l शकुनि खुद तो डूबा , अपने साथ पूरे कौरव वंश को ले डूबा l महाभारत में शकुनि तो मारा गया , उसके षड्यंत्रों में उसके भागीदार होने के कारण कौरव वंश का ही अंत हो गया l कोई आँसू पोछने वाला भी नहीं बचा l
3 February 2021
WISDOM ------ एक छोटी सी चूक का कितना बड़ा परिणाम
हम सब इनसान हैं और हम सब से गलतियाँ होती है l कभी - कभी विवेकहीनता के कारण एक छोटी सी गलती बहुत बड़े दंगे में बदल जाती है l इसे ही समझाने के लिए पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी एक कहानी कहते हैं ----- कलिंग देश का राजा नाश्ते में दही और शहद खा रहा था l अधिकारियों से आवश्यक बातें भी कर रहा था कि थोड़ा सा शहद जमीन पर गिर गया l राजा तो दरबार में चला गया l शहद गिरने से जमीन पर बहुत मक्खियाँ आ गईं l उन मक्खियों को खाने के लिए बहुत सी छिपकली आ गईं l अब उन छिपकलियों को खाने के लिए बिल्ली आ गई l यह सब देख कहीं से एक कुत्ता आ गया , उसने बिल्ली को पकड़ लिया l नए कुत्ते को अपने क्षेत्र में आया देख मोहल्ले के चार - पांच कुत्ते उससे लड़ने आ गए l बिल्ली तो भाग गई , वे कुत्ते आपस में बहुत देर तक लड़ते रहे , एक - दूसरे को घायल कर दिया l इस बीच उन कुत्तों के मालिक आ गए l अपने कुत्ते को घायल देख वे आपस में बहस करने लगे , बात बढ़ गई , उनमे आपस में मारपीट हो गई l वे ब्राह्मण और ठाकुर थे l ब्राह्मणों को पता चला कि ठाकुर ने ब्राह्मण को पीट दिया , यह अपमान वे सह न सके l पूरे शहर के ब्राह्मण और ठाकुर इकट्ठे हो गए और दंगा हो गया l शहर में ऐसा बलवा देख वहां के चोर - डाकुओं को मौका मिल गया , उन्होंने राजा का खजाना लूट लिया l यह सब देख राजा बहुत दुखी हुआ , उसने कमेटी बिठाई l दंगा क्यों हुआ , इसकी तह में जाने के लिए योग्य अधिकारियों को नियुक्त किया l कमेटी ने रिपोर्ट दी तब पता लगा कि राजा की लापरवाही से शहद गिर गया , उसी की वजह से यह सब दंगा हुआ l ' इसलिए आचार्य श्री कहते हैं कि यह सारा ढांचा हमारी विवेकशीलता पर टिका हुआ है l