22 August 2026

WISDOM -----

 हमारे  महाकाव्य हमें  बहुत कुछ  सिखाते  हैं  l  महाभारत  की  कथा  महर्षि  व्यास  की  ओजपूर्ण  वाणी  से  प्रवाहित  हुई  और   गणेश  जी  की  अथक  लेखनी  ने  उसे  लिपिबद्ध  किया  l  महाभारत  के  विभिन्न  प्रसंग   इस  युग  में  , इस  धरती  पर  वैसे  ही  हैं  जैसे  उस  युग  में  थे  l  छल , कपट , षड्यंत्र , धोखा  , अहंकार ---सब  कुछ  वैसा  ही  है   , केवल  पात्र  बदल  गए  l  कुछ  घटनाएँ  ऐसी  हैं  ,  उनमे  छिपे  हुए  संकेतों  को  समझा  जा  सकता  है   जैसे  ----गुरु  द्रोणाचार्य  ने  चक्रव्यूह  की  रचना  की  l  उस  काल  के  सब  गणमान्य , विचारवान , नीति , अनीति  को  समझने  वाले  , महानुभाव  सब  इस  में  सम्मिलित  थे  l  कुटिलता  से  उन्होंने  अर्जुन  को  संशप्तकों  के  साथ  युद्ध  में  उलझा  दिया  l  अब  इस  पक्ष  में  केवल  अभिमन्यु  ही  था  , जिसे  चक्रव्यूह  का  ज्ञान  था  , यह  उसने  अपनी  माँ   के  गर्भ  में  था  तभी  सीख  लिया  था  l  यह  कैसा  युद्ध  था  ,   एक  ओर  17 -18  वर्ष  का  युवा  अभिमन्यु   अकेला  था  और  दूसरी  ओर  उससे  आयु  में  दुगुने -तिगुने  , शक्तिशाली   सब  एक  समूह  में  थे  l  द्रोणाचार्य , अश्वत्थामा , कर्ण , जयद्रथ , शकुनि  आदि  सात  महारथी  अपने -अपने  स्वार्थवश  दुर्योधन  के  साथ  थे   और  सब  ने  मिलकर    अभिमन्यु  का  वध  कर  दिया  l  यह  स्थिति  आज  भी  है  , चाहे  परिवार  हो , कोई  संस्था  हो   राष्ट्र  हो  या  अंतर्राष्ट्रीय  स्थिति  हो  , चक्रव्यूह  आज  भी  रचे  जा  रहे  हैं  l  उम्र  के   बढ़ने  के  साथ  कामनाएं , वासनाएं  बढ़ती  ही  जा  रही  हैं  ,  त्याग  का  तो  नाम  ही  नहीं  है   l  अभिमन्यु का  जब  वध  हुआ  तब  वह  समय  भी  युग  परिवर्तन  का  था   और  कलियुग  के  इस  धरती  पर  आने  की  आहट  थी  , इसलिए  ऐसा  अनर्थ  हुआ  l  आज  का  समय  भी  युग  परिवर्तन  का  है   लेकिन  अब  कलियुग  का  अंत  और  सतयुग  के  आरम्भ  होने  का  समय  है  इसलिए  अब  कोई  अभिमन्यु  नहीं  मारा  जायेगा  , अब  आसुरी  शक्तियों  का  अंत  होगा  l  बड़े -बड़े  चक्रव्यूह  रचने  वालों  के  राज  बाहर  आयेंगे  , अब  अभिमन्यु   विजयी  होगा  और  चक्रव्यूह  में  सम्मिलित  जयद्रथ , द्रोणाचार्य  -----आदि  सभी  का  एक -एक  कर  के  अंत  होगा  l  ईश्वरीय  विधान  कुछ  ऐसा  है  कि  वे  बड़े से  बड़े  महापपियों  को  भी  सुधरने  का   पूरा  मौका  देते  हैं  , विभिन्न  संकेतों  से  उन्हें  समझाते  भी  हैं  कि  अनीति , अत्याचार   का  साथ  मत  दो   वरना  अंत  बहुत  बुरा  होगा  l  जो  इन  संकेतों  को  समझ  जाये   तो  ठीक  है   अन्यथा  यम  के  दूत  तो  तैयार  हैं  l  कर्म  का  फल  तो  भोगना  ही  पड़ता  है  चाहे  हँसकर  भोगो  या  रो -रोकर  भोगो  l