15 February 2026

WISDOM -----

 पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  कहते  हैं  ---- 'प्रत्येक  व्यक्ति  समाज  पर  अपना  भला -बुरा  प्रभाव  छोड़ता  है   l  किन्तु  सुगंध  की  अपेक्षा   दुर्गन्ध  का  विस्तार   अधिक  तेजी  से  होता  है  l  पानी  का  नीचे  गिरना  बहुत  आसान  है  किन्तु  ऊपर चढ़ाने  के  लिए  बहुत  अधिक  मेहनत  की  आवश्यकता  है  l '   आसुरी  प्रवृत्ति  के  लोग  इसी  वजह  से   आसुरी  तत्वों  को  संसार  में  फैलाने  में  सफल  हो  जाते  हैं  l  जो  असुर  हैं  जिन्हें  हम  राक्षस  , दैत्य  और  नर भक्षी  हों  तो  उन्हें  नर पिशाच  भी  कहते  हैं  ,  ये  सब  मनुष्य  शरीर  में  ही  हैं   लेकिन  इनमे  संवेदना , करुणा , दया , ममता  , प्रेम  , मानवीयता  नहीं  होती  l  इनमे  अहंकार  और  उससे  जुड़े  सभी  दुर्गुण  होते  हैं  l  आज  कलियुग  की  स्थिति  यह  है  कि  असुरता  सम्पूर्ण  धरती  पर अपना  साम्राज्य  स्थापित  करना  चाहती  है ,  सब  उसके  गुलाम  बने  और  देवत्व  का  नामोनिशान  मिट जाए  l  उनका उदेश्य  लोगों  को  मानसिक  गुलाम  बनाना  है  , भौगोलिक  नहीं  l   अपने उदेश्य  में  उसे  बहुत  सफलता  भी  मिली   लेकिन   ऐसे  देश  जहाँ  कि  संस्कृति  में  चरित्र  की  श्रेष्ठता  है  जैसा  कि  हमारा  देश  भारत  ,  ऐसे  किसी  भी  देश  में  देवत्व  को  पूरी  तरह  मिटाना  संभव  नहीं  है  l  इसलिए  आसुरी  तत्वों  ने  दूसरी  चाल  चली  --- डंडे  के  जोर  पर  तो   चारित्रिक  पतन  आसान  नहीं  होता   इसलिए   अब  उन्होंने  लोगों  के  मन  पर  प्रत्यक्ष  और  अप्रत्यक्ष  तरीके  से  आक्रमण  शुरू  किया  l  इसके  लिए  उन्होंने  विज्ञान  का  सहारा  लिया  और  संचार  तथा  प्रचार-प्रसार    के  साधनों  से    लोगों  के  मन  को  डांवाडोल  करने  , उनका  नैतिक  पतन  करने  और  अश्लीलता  को  परोसने  का  सारा  व्यापार  शुरू  कर  दिया  l  बुराई  में  बड़ा  आकर्षण  होता  है  l  सद्विचारों  को  तो  दो -चार  लोग  पढ़  लें यही  बहुत  बड़ी  बात  है  लेकिन   अश्लील  साहित्य  , ऐसी  ही  फ़िल्में , गंदे  विचार   इन्हें  पढने , सुनने  व  देखने  के  लिए  लाखों , करोड़ों  लोगों  की  भीड़  होती  है  l  संसार  में  जो  लोग  श्रेष्ठ  काम  कर  रहें  हैं  , उनके  कार्यों  को  बड़ी  मुश्किल  से  एक -दो   लाइन  में  समाचारों  में  दिखा  दिया  जाता  है  लेकिन   जो  बहुत  ही  निम्न  श्रेणी  के , निकृष्ट  कार्य  हैं  , उन्हें  समाचारों  में   और  विभिन्न  तरीकों  से    विस्तार   से  सचित्र  भी  दिखाया  जाता  है    ताकि  लोगों  का  मन  बहुत  कमजोर  हो  जाए  l  इसके  साथ  ही   ये  आसुरी  प्रवृति  के  लोग  अप्रत्यक्ष  तरीकों  से   नकारात्मक  शक्तियों  की  मदद  से , साइकिक  अटैक   आदि  विभिन्न  तरीकों  मानवजाति  पर  सामूहिक  रूप  से  आक्रमण  कर  उन्हें  विभिन्न  तरह  की  बीमारियाँ  देते  हैं   ताकि  व्यक्ति  इतना  कमजोर  हो  जाए  कि  उसमें  विरोध  करने  की  सामर्थ्य  ही  न  रहे   ,  फिर  वे  हमें  जैसी  शिक्षा  दे , चिकित्सा  दे ,   कृषि , साहित्य , कला ,  खाद्य पदार्थ , बीज  , खेती  आदि  सब  कुछ  उनकी  मरजी  का  हो  ,  हमारी  इच्छा , हमारा  स्वास्थ्य , हमारी  संस्कृति , हमारी  मिटटी  , इससे  किसी  को  कोई  मतलब  नहीं  l  यही  है  मानसिक  गुलामी  l  गुलाम  का  अपना  कोई  अस्तित्व  नही  होता  , वह  तो  एक  कठपुतली  होता  है  l  असुरता  की  कोई  जाति , कोई  धर्म  , कोई  विशेष  भौगोलिक  क्षेत्र  नहीं  होता  , ये  सब  एक  नाव  में  सवार  होते  हैं  l  इस  नाव  का  आकार  अब  बढ़ता  ही  जा  रहा  है  l  बुराई  में  तत्काल  लाभ  होता  है   इसलिए  सब  लोग  उसी  नाव  में  बैठने  को  आतुर  हैं  l  देवत्व  को  बचाने  का , देवत्व  की  रक्षा  का  एक  ही  उपाय  है  ---- ' गायत्री  मन्त्र  '  l  माँ  आदि शक्ति  को  पुकारो  और  शक्ति  के  साथ  शिव  की उपासना  करो  l  शिव  और  शक्ति  के  संतुलन  से  देवत्व  की  रक्षा  संभव  है l  प्रत्येक  व्यक्ति  यह  प्रयास  करे  तब  उसका  परिवार , समाज , राष्ट्र   आसुरी  आक्रमण  से  सुरक्षित  रहेंगे  l  

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