20 February 2018

WISDOM ------ मनुष्य के विनाश का सबसे प्रबल कारण है ---- उसका अहंकार

   '  मैं  ही  सब  कुछ  हूँ ,  मेरा  विचार  ही  सबसे  अच्छा  है , मैं  सबसे  अधिक  सुन्दर  हूँ ,  मैं  धनी  हूँ ,  मैं  पंडित  हूँ   आदि  अहंकारिक  भावनाओं  के  कारण  ही  संसार  में  कलह ,  झंझट ,  युद्ध   और  महायुद्ध  की   विभीषिकाएँ  उठ  खड़ी  होती  हैं   l  '
  अपने   इस  अहंकार  की  तुष्टि  के  लिए  ही  मनुष्य  दूसरों  पर  अत्याचार  करता  है  l   पराया  माल   छीनना  ,  हड़पना ,  चोरी  कर  लेना ,  दूसरों  की   मेहनत  का  उचित  पारिश्रमिक  न  देना  ,  मानवीयता  नहीं  है   l  इससे  मनुष्य  का  घोर  आंतरिक  पतन  होता  है  l   मनुष्य  जानता  है  कि  इस  धन  को  वह  अपनी लाश  के  साथ  नहीं  ले  जा  सकता  ,  फिर  भी  उसका  लालच  कम  नहीं  होता  ! 
      संसार  की  क्षणभंगुरता  को   हमेशा   ध्यान  में   रखने  से  ही  यह  संभव  है  कि   मनुष्य  इस  दुष्प्रवृति  से  बचा  रह  सके   l  संकल्प  के  धनी  व्यक्ति  ही  अहंकार  को  कुचलने  का  साहस  कर  पाते  हैं   l  

18 February 2018

WISDOM ------ तृष्णा कभी समाप्त नहीं होती

' जिस  तरह  मक्खी  या  चींटी  गुड़  की  चाशनी  में  एक  बार  चली  जाये  तो  फिर  वहां  से  वह  निकल  नहीं  पाती   और  अंततः  वहीँ  उसकी  मृत्यु  हो  जाती  है   l  '
   रामकृष्ण   परमहंस  एक  कथा  कहते  हैं ---- एक  व्यक्ति  घने  जंगल  में  भागा  जा  रहा  था  l  घने  अँधेरे  के  कारण  कुएं  में  गिर  गया  l  गिरते  हुए  उसके  हाथ  में  कुएं  के  ऊपर  झुके  वृक्ष  की  डाल  आ  गई  l  नीचे  झाँका  तो  वहां  चार  विशाल  अजगर  थे   और  जिस  डाल  को वह  पकड़े  था  उसे  दो  चूहे  कुतर  रहे  थे  l   इतने  में  एक  हाथी  आया   और  वृक्ष  के  तने  को  हिलाने  लगा  l  वृक्ष  के  ठीक  ऊपर  मधु मक्खी  का  छत्ता  था  l  वृक्ष  हिलने  से  मधुमक्खी  उड़ने  लगी  तो  छत्ते  से  शहद  टपकने  लगा  जो  उस  व्यक्ति  के  होठ  पर  गिरा   l  अब  वह  व्यक्ति  सारे  कष्ट  भूलकर  शहद  चाटने  लगा  l  उसी  समय  वहां  से  शिव -पार्वती   निकले  l  पार्वतीजी  ने  उसे  बचाने  के  लिए  शिवजी  से  अनुरोध  किया  l  शिवजी  ने  उससे  कहा --- " मेरा  हाथ  पकड़  लो  ,  मैं  तुम्हे  बाहर  निकलता  हूँ  l "  वह  व्यक्ति  कहने  लगा --- " बस  एक  बूंद  शहद  और  चाट  लूँ  l  "  हर  बूंद  के  बाद  अगली  बूंद  की  प्रतीक्षा  चलती  रही  l  अंत  में  शिवजी  उसे  छोड़कर  चले  गए  l 

17 February 2018

WISDOM ------ सस्ती वाह - वाही से बचना चाहिए

    एक  राजा  बहुत  प्रसिद्धि  प्रिय  था  l  वह  आये  दिन  कुछ  न  कुछ  ऐसे  काम  करता  रहता   जिससे  उसके  नाम  की  चर्चा  होती  रहे  l  सभी  उसे  दयालु  मानते  रहें  l   एक  पर्व  पर  उसने  आदेश  निकाला  कि  वह  पकड़े  हुए  पक्षी  खरीदेगा  और  उन्हें   मुक्त  करने  का  पुण्य  लाभ  करेगा  l  यह  क्रम  पूरे  एक  वर्ष  तक  चलेगा  l 
  प्रजाजनों  को  एक  सस्ता  धन्धा  मिल  गया  l  उन्होंने  बहेलिये  की  चतुरता  सीख  ली  l  हर  व्यक्ति  रोज  दर्जनों  पक्षी  जाल  में  फंसा  लेता  और  राजा  से  उनकी  अच्छी - खासी  कीमत  वसूल  कर  ले  जाता  l  सबेरे  से  शाम  तक   राजदरबार  में  हजारों  पक्षी  खरीदे  और  छोड़े  जाते  थे  l   कुछ  ही  महीनो  में  सारा राजकोष  खाली    गया  l
  बुद्धिमान  मंत्री  ने   राजा  को  समझाया  कि  इस  सस्ती  वाह - वाही  में  राजकोष  समाप्त  हो  रहा  है   l  जन -साधारण  को  बहेलिये  का  धन्धा  अपनाने  का  स्वभाव  पड़  रहा  है   l  पक्षी  त्रास  पा  रहे  हैं  l  ऐसी  झूठी  दयालुता  से  कोई  लाभ  नहीं  जिसका  परिणाम  न  सोचा  जाये   l  

16 February 2018

WISDOM ---- संगठन का चमत्कार हर क्षेत्र में देखा जा सकता

आज  संसार  में   संगठन  शक्ति  के  सहारे   दुष्ट - दुरात्मा  भी  सफल  होते  और  अपनी  धाक  जमाते  देखे  जा   सकते  हैं  l '   
    माफिया  गिरोह  संसार  भर  में   कुख्यात  है  ,  इस  शब्द    सभी  आतंकित  होते  हैं  l  इनकी  सफलता  को  दुष्टता  की  विजय  नहीं ,  वरन  संगठन  की  महत्ता    कह  सकते  हैं   l
   इटली  का  सिलियन  माफिया  ग्रुप   इस  सम्बन्ध  में   विश्व विख्यात  है  l  उस   गिरोह  में  सौ  से  अधिक  व्यक्ति  नहीं  हैं  ,  पर  अपराधों  से  धन  कमाने  में   वह  असाधारण  रूप  से  सफल  हुआ  है  l   इटली  के  बाद  अब  वह  अमेरिका  जा  पहुंचा   और  सारे  धनी  क्षेत्र   . को  उसने   अपने  संगठित  विभागों  में  बाँट  रखा  है  l  इसको  समाप्त  करने  में   अमेरिका   का  गुप्तचर  विभाग  और  पुलिस  इतनी   सफल  नहीं  हो  पाती,  जितनी  कि  होनी  चाहिए  l  जितने  पकडे  जाते  हैं  ,  उससे  ज्यादा  उस  संगठन  में    नये  दस्यु   सम्मिलित  हो  जाते  हैं   l  उनका  कारोबार  इसलिए  बंद  नहीं  हो  पाता  क्योंकि  उनके  संगठन   में    सदस्यों   में   संगठन         ,  अनुशासन  का  निर्वाह  पूरी   तरह    होता  है   l

15 February 2018

WISDOM ----- जिसने अपनी आत्मा को बेच दिया , उसका सब कुछ खो जाता है

  खडाऊं  पहन  के  पंडितजी  मंदिर  की  और  चले  l  कदम  बढ़ने  के  साथ - साथ खडाऊं  से  भी  खट-खट  का  स्वर  निकल  रहा  था  l  पंडितजी  को  यह  आवाज  पसंद  न  आई  l  वह  एक  स्थान  पर  खड़े  होकर  खडाऊं  से  पूछने  लगे  ---- " अच्छा  यह  तो  बताओ  कि  पैरों  के  नीचे  इतनी  दबी  रहने  पर  भी  तुम्हारे  स्वर  में   कोई  अंतर  क्यों  नहीं  आया  ? "
  खडाऊं  ने  पैरों  के  नीचे  दबे -दबे  ही  पंडितजी  की  जिज्ञासा  शांत  करते  हुए  कहा ---- " मैं  तो  जीने  की  इच्छुक  हूँ  ,  पंडितजी ,  इस  संसार  में  ऐसे  लोगों  की  कमी  नहीं   जो  दूसरों  के  दबाव  में  आकर  अपना  स्वर  मंद  कर  लेते  हैं  ,  उन्हें  तो  जीवित  अवस्था  में   भी  मैं   मरा  हुआ   मानती  हूँ   l  "

14 February 2018

WISDOM ------- काल बड़ा बलवान है

  काल  की  बड़ी  महिमा  है  l  काल  बड़े - बड़ों  को  धराशायी  कर  देता  है  l  बड़े - बड़े  साम्राज्य  जिनकी  कहीं  कोई  सीमा  नजर  नहीं  आती  है ,  जिनका  सूर्य  कभी  ढलता  ही  नहीं  है  ,  इतने  बड़े  और  व्यापक  साम्राज्य  को  काल  क्षण  भर  में  धूल - धूसरित  कर  देता  है  l
  काल  उठाता  है  तो   एक  असहाय  निर्बल  भी  बलशाली  बन  जाता  है  l  काल  साथ  देता  है  तो  अत्यंत  दुरभिसंधियां  एवं   विपरीतताएँ   भी  पल  भर  में  अनुकूल  हो  जाती  हैं  l 
     लेकिन  जब  काल  अपने  साथ  नहीं  होता  ,  तब  ऐसे  विपरीत  समय  में  कोई  ज्ञान , कोई  तप,  कोई  साधन  काम  नहीं  आता   l  कोई  अपना  भी  साथ  नहीं  देता  l   सब  कुछ  धरा  का  धरा  रह  जाता  है  l  काल  की  विपरीत  दशा  में  हमें  शांत  व  स्थिर  बने  रहना  चाहिए  l  प्रभु  द्वारा   निर्धारित  स्थान  पर  रहकर    धैर्य  और  ईश्वर विश्वास   के  सहारे   अनुकूल  समय  की   प्रतीक्षा  करनी  चाहिए  l  जो  काल  की महिमा  से  अवगत  होते  हैं   वे  उसे प्रणाम  कर  के  स्वयं  को  उसके  अनुकूल  ढाल  लेते  हैं   l  

13 February 2018

WISDOM ------ जीवन में मौन का अभ्यास जरुरी है , इससे वाद - विवाद थमेंगे

' अनावश्यक  बोलने  में  जितनी  गलतफहमियाँ  और  समस्याएं  पैदा  होती  हैं ,  उतनी  मौन  से  नहीं  होतीं  हैं  l  निरर्थक  बोलना  बहुत  थकाने  वाली  प्रक्रिया  है  l  इससे  शरीर  में  गर्मी  पैदा  होती  है  l  जब  लोग  इतने  पढ़े - लिखे  और  बुद्धिजीवी  नहीं  थे , तब  कम  बोलते  थे  और  ज्यादा  प्रमाणिक  थे  l '
  आज  शरीर  में  उष्णता  बढ़ने  का  एक  कारण  यह  भी  है  --- निरर्थक  बोलना  और  जरुरत  से  ज्यादा  बोलना  l  मौन  रहने  से  अनावश्यक  कलह - क्लेश  नहीं  होंगे   और  शांति  का  साम्राज्य  फैलेगा  l
     महात्मा  गाँधी  भी  अपनी  दिनचर्या  में   मौन  रहने  का  नियमित  अभ्यास  करते  थे   l  सोमवार  उनके  आश्रम  में ' मौनवार  ' के  नाम  से  जाना  जाता  था  l  इस  दिन  सारे  आश्रमवासी मौन  रहते  थे  l  महात्मा  गाँधी  के  लिए  मौन  एक  प्रार्थना  के  समान  था  l  उनका  कहना  था  ---- " बोलना  सुन्दर  कला  है ,  लेकिन  मौन  इससे  भी  ऊँची  कला  है  l  मौन  सर्वोत्तम  भाषण  है  l  अगर   एक  शब्द  से  काम  चले ,  तो  दो   मत  बोलो   l "
  संत  एमर्सन  का  कहना  था ---- " आओ  हम  मौन  रहें ,  ताकि  फरिश्तों  की  कानाफूसियाँ  सुन  सकें  l "
 मौन  आत्मा  का  सर्वोत्तम  मित्र  है  l  जब  हम  मौन  धारण  करते  हैं  तो  सहज  ही   प्रकृति  का  अंश  बन  जाते  हैं   क्योंकि  प्रकृति  में   तो  सर्वत्र  मौन  पसरा  हुआ  है  l