कहते हैं इतिहास से शिक्षा लेकर स्वयं को सुधारना चाहिए , व्यक्ति , समाज हो या राष्ट्र अपनी गलतियों को बार - बार दोहराना नहीं चाहिए , उन्हें सुधारने का सशक्त प्रयास करना चाहिए , अन्यथा इतिहास स्वयं को दोहराता है l आपसी फूट , ऊंच - नीच , जातिगत भेदभाव , संपन्न और शक्तिवान लोगों का भोग - विलास का जीवन --- इन्ही सब दोषों के कारण देश पर समय - समय पर विदेशी आक्रमण हुए और हम अपनी जमीन पर , अपनी धरती पर रहते हुए भी विदेशी आधिपत्य को , उनके आदेश को मानने के लिए मजबूर हुए l इतिहास में इसके सैकड़ों उदाहरण हैं ------- करनाल के विशाल मैदान में मुहम्मद शाह की सेना परास्त हो चुकी थी l विजयी नादिरशाह जब दिल्ली पहुंचा तो उसका भव्य स्वागत किया गया l नादिरशाह ने पानी पीने की इच्छा जाहिर की l मुहम्मद शाह ने पानी लाने का संकेत किया l काफी देर हुई , किन्तु पानी अभी तक नहीं लाया गया l नादिरशाह को नगाड़े और तुरही की आवाज सुनाई दी l नादिरशाह ने समझा कि कोई उत्सव आरम्भ हो गया l देखा तो अनुचरों की भीड़ सोने - चांदी के थालों में सजाये , चँवर ढुलाते पानी की सुराही और गिलास , पानदान और पीकदान लिए चले आ रहे हैं l उसने विलासितापूर्ण आडम्बर देखकर कहा --- मुहम्मद शाह अब मैं समझा कि तुम्हारे पास इतनी विशाल सेना होते हुए तुम क्यों हारे l उसने अपने भिश्ती को संकेत दिया जो मशक भरकर पानी लाया और नादिरशाह ने अपना टोप उतारा और उसमे पानी भरा और पी गया फिर मुहम्मद शाह से बोला --- यदि हम भी तुम्हारी तरह विलासी होते तो ईरान से हिंदुस्तान तक नहीं आ सकते थे l
19 September 2020
18 September 2020
WISDOM -----
एक रोगी राजवैद्य शार्गंधर के समक्ष अपनी कष्टगाथा सुना रहा था l अपच , बेचैनी , अनिद्रा , दुर्बलता , खांसी , जुकाम जैसे अनेकों कष्ट व उनके उपचार में ढेरों राशि नष्ट कर कोई लाभ न मिलने के कारण ही वह राजवैद्य शार्गंधर के पास आया था l वैद्यराज ने उसे संयम युक्त जीवन जीने व आहार - विहार के नियमों का पालन करने को कहा l रोगी बोला ---- ' यह सब तो मैं कर चुका हूँ l आप तो मुझे कोई औषधि दीजिए , ताकि मैं कमजोरी पर नियंत्रण पा सकूँ l पौष्टिक आहार आदि भी बता दें , आप मुझे पहले जैसा समर्थ बना दें l ' वैद्यराज बोले --- " वत्स ! तुमने संयम अपनाया होता तो मेरे पास आने की स्थिति ही नहीं आती l तुमने जीवनरस ही नहीं , जीवन की सामर्थ्य और धन - संपदा भी इसी कारण खोई है l बाह्य उपचारों से और पौष्टिक आहार आदि से ही स्वस्थ बना जा सका होता तो विलासी और समर्थ कोई भी मधुमेह , अपच आदि का रोगी नहीं होता l मूल कारण तुम्हारे अंदर है , बाहर नहीं l पहले संयमित जीवन जियो , अमृत का संचय करो और फिर देखो वह शरीर निर्माण में किस प्रकार जुट जायेगा l " रोगी ने सही दृष्टि पाई और जीवन को नए सांचे में ढाला , अपने अंतरंग और बहिरंग की अपव्यय वृत्तियों पर रोकथाम की और कुछ ही माह में स्वस्थ - समर्थ हो गया l
16 September 2020
WISDOM -----
ईश्वर हमें बिना मांगे ही बहुत कुछ देते हैं , लेकिन यदि हम जागरूक नहीं हैं , विवेक नहीं है तो ईर्ष्या , द्वेष , अहंकार , लालच , छल - कपट जैसे दुर्गुणों के कारण हम ईश्वर की देन का सदुपयोग नहीं कर पाएंगे l एक कथा है ---- एक बार पार्वती जी और शंकर जी धरती पर भ्रमण को निकले l उन्होंने देखा कि उनका एक ब्राह्मण भक्त , उसकी पत्नी व बच्चा सारे दिन ॐ नम: शिवाय का जप करते l यह देख पार्वती जी ने शंकर जी से कहा --- " ये हमारे भक्त लोग हैं , हम यहाँ से निकल रहे हैं तो इन बेचारों को कुछ वरदान देकर चलें l " शंकर जी ने कहा --- " पार्वती ! बेकार है इनको वरदान देना l ये इस लायक नहीं हैं कि इन्हे कुछ दिया जाये l न तो इनमे पात्रता है और न सँभालने की क्षमता l " पार्वती जी ने कहा --- नहीं महाराज ! आप तो ऐसे ही बहाने बना देते हैं l पहले आप इन्हे कुछ दें , फिर पता चलेगा l शंकर जी राजी हो गए और उन तीनों से वरदान मांगने को कहा l ब्राह्मण की पत्नी जरा समझदार थी , सबसे पहले वह आगे आई l शंकर जी ने पूछा --- ' तुम्हारी मनोकामना क्या है ? ' वह बोली --- " भगवन ! हमें बीस साल की खूबसूरत युवती बना दीजिए l " भगवन ने कहा --- तथास्तु ! अब वह बहुत खूबसूरत हो गई l ब्राह्मण ने उसे देखा तो उसे बहुत गुस्सा आया कि अब तो ये पति , बच्चा सबको भूल जाएगी l अब ब्राह्मण की बारी आई वरदान मांगने की तो उसने शंकर जी से कहा --- " भगवन ! इस स्त्री को शूकरी बना दीजिये l ' शंकर जी ने कहा --- " अच्छी तरह सोच लो l ' उसने कहा ---" महाराज जी ! मैंने सोच समझकर ही वर माँगा है l शंकर ही तो भोले बाबा हैं , उनने तथास्तु कहते हुए जल छिड़का , तो वह सुन्दर नारी से शूकरी बन गई l बालक यह सारा दृश्य देखकर रोने लगा l शंकर जी ने कहा --- " तुम क्यों रोते हो ? तुम भी वरदान मांग लो l बच्चे ने कहा --- " भगवन ! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरी माँ को पहले जैसी बना दीजिए , मुझे मेरी माँ चाहिए l शंकर जी ने कहा --- ' तथास्तु ! और वह ब्राह्मण की पत्नी पुन: शूकरी से पहले जैसी स्थिति में आ गई l शंकर जी ने पार्वती जी से कहा " देवि ! देखा आपने , इन तीनों ने तीन वरदान व्यर्थ गँवा दिए l चाहते तो विवेकपूर्ण वरदान लेकर अपना जीवन और जन्म सुधार सकते थे l हमें ईश्वर से प्रार्थना कर के कुछ माँगना और जो मिला है उसका सदुपयोग करना आना चाहिए l
WISDOM -----
धृतराष्ट्र ने विदुर से पूछा --- " क्या कारण है कि सभी सौ वर्ष की आयु नहीं जी पाते l जरा एवं व्याधि से उससे पूर्व ही वे काल - कवलित हो जाते हैं ? " विदुर जी ने तब नीति का एक सूक्त कहा , जिसका भावार्थ है ----- ' अत्यंत अभिमान , अधिक बोलना , त्याग का अभाव , क्रोध , अपना ही अपना भरण - पोषण करने की चिंता , स्वार्थपरता और मित्रद्रोह ----- ये छह तीखी तलवारें हैं , जो देहधारियों की आयु को काटती हैं l ये ही मनुष्यों का वध करती हैं , मृत्यु नहीं l फिर वे बोले ---- " हे राजन ! जो इन छह बातों से बचकर रहेगा , निश्चय ही वह सौ वर्ष की आयु तक जी सकेगा l "
15 September 2020
WISDOM -----
ब्रह्मा जी ने प्राणियों का निर्माण किया , फिर मनुष्य से पूछा --- " तुम्हारी और क्या इच्छा है ? " मनुष्य बोला ---- " मैं बुद्धिमान तो बहुत हूँ , पर चाहता हूँ कि और आगे बढूं और ऐसा रहूं , जिसकी कोई बराबरी न कर सके l " ब्रह्मा जी ने उसे दो झोलियाँ दीं और कहा --- ' इन्हे गले में लटकाये रहना l दूसरों की विशेषताएं ढूंढ़ना और उन सभी अच्छाइयों को अपनी आगे वाली झोली में भरते जाना l और अपनी विशेषताओं पर ध्यान न देना , उन्हें पीछे वाली झोली में भरना , इससे तुम्हारी बुद्धिमत्ता बढ़ेगी l मनुष्य प्रसन्न हो गया , पर झोलियों के सम्बन्ध में आगे - पीछे वाला निर्देश भूल गया , उसने आगे की झोली पीछे और पीछे वाली आगे लटका ली l यही कारण है कि अब वह अपने गुणों को बखानता है , दूसरों के गुणों को नहीं देखता , उनसे कुछ सीखता नहीं , पर - निंदा में उलझा रहता है l
14 September 2020
WISDOM ----- समस्त बीमारियों का मूल है ---- असंयम ---- पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
आचार्य श्री लिखते हैं --- विधाता ने मनुष्य को अनेकानेक संपदाओं और विशेषताओं से सुसज्जित कर के भेजा है l अपार विभूतियों के होते हुए भी मनुष्य अपने को इतना असहाय और विक्षुब्ध पाता है l इतना शानदार शरीर होने के बावजूद मनुष्य यदि असंख्य बीमारियों से जूझता हुआ मिलता है तो उसका एक ही कारण है और वह है --- असंयम l "
अपने एक प्रवचन में आचार्य श्री कहते हैं ---' कोई व्यक्ति बार - बार बीमार होता है तो डॉक्टर कहता है आपके भीतर वायरस है l छोटे - छोटे वायरस हमको इतना हैरान कर सकते हैं l उन्होंने कहा -- एक फ्रांसीसी डॉक्टर था l कॉलेरा के जर्म्स की पांच सी. सी. की ट्यूब लेकर आया और डाक्टरों की सभा में कहा कि देखिए , आप इसका टैस्ट कीजिये कि इससे कितने आदमी मारे जा सकते हैं l डॉक्टर ने कहा कि इसमें एक लाख आदमियों के मारे जाने लायक जहर है l फ्रांसीसी डॉक्टर ने कहा कि आप लोगों के सामने एक बार फिर टेस्ट कर लीजिये कि यह कॉलेरा के ही जर्म्स हैं कि नहीं हैं l अब मैं इसको पी कर दिखाता हूँ कि पीने के बाद मैं जिन्दा रह सकता हूँ कि नहीं l उसने जर्म्स भरी ट्यूब में से पांच सी. सी. निकाल लिया और पी लिया l इसे पीने के बाद भी वह मरा नहीं l आचार्य श्री कहते हैं --- हमारे शरीर का यह किला और दुर्ग इतना मजबूत बना कर भेजा गया है कि जन्म से ही इसमें कोई गोलीबारी काम नहीं कर सकती l यदि जर्म्स से बीमारियाँ आई होतीं , तो वार्ड ब्वॉय टी. बी. के मरीजों की , कैंसर के मरीजों की तीमारदारी करते हैं , सफाई कर्मचारी मरीजों की गंदगी साफ करते हैं , अस्पताल की , वहां की नाली की सफाई करते हैं , उन्हें जर्म्स लग जाएँ तो लाशों के ढेर लग जाएँ , लेकिन यह तो वहम है l बीमारियों का दुनिया में केवल एक ही कारण है और वह है --- असंयम l मनुष्य अपने स्वाद , कामना , वासना के आधीन होकर असंयमित जीवन जीता है जिससे उसका शरीर खोखला हो जाता है और तरह - तरह की बीमारियां उसे घेर लेती हैं l
13 September 2020
WISDOM -----
प्रजातंत्र जब असफल होता है तो उसका स्थान तानाशाही ले लेती है l प्रजातंत्र में सफल सरकार वह है जो भय और गरीबी से जनता को बचा सके अन्यथा लोग सब्र खो बैठेंगे और गृहयुद्ध जैसी स्थिति में तानाशाही उठ खड़ी होती है l प्रजातंत्र की सफलता ऐसी सशक्त सरकार पर निर्भर है जो जनता के हितों की रक्षा कर सके l ऐसी सरकार बना सकने के लिए सशक्त और सजग जनता का होना आवश्यक है l वस्तुत: जाग्रत जनता ही प्रजातंत्र को सफल बनाती है और वही उसका लाभ लेती है l