पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी लिखते हैं ---- " ज्ञानी जब अहंकारी हो जाता है , तब उसके अंत:करण से करुणा नष्ट हो जाती है l उस स्थिति में वह औरों का मार्गदर्शन नहीं कर सकता , केवल मात्र दम्भ प्रदर्शन कर सकता है , जिससे लोग प्रकाश लेने की अपेक्षा पतित होने लगते हैं , ऐसी सर्वज्ञता का क्या लाभ ? " कहते हैं विधाता ने सत्य , धर्म , दान , तप और तीर्थ की रचना की , लेकिन तब भी मनुष्य सुखी नहीं हो पाया तब विधाता ने ' वशिष्ठ ' नाम से ज्ञान की रचना की l यह ज्ञान विवेक और दूरदर्शिता से अलंकृत था l अपनी सामर्थ्य देखकर ' वशिष्ठ ' को अहंकार आ गया , उसे भगवान श्रीराम पर से विश्वास उठ गया , वह स्वयं को भगवान समझने लगा l ज्ञान यदि अपने मार्ग से भटक जाए तो सत्य , धर्म ---- आदि सब विभूतियाँ व्यर्थ हो जाती हैं इसलिए उन्होंने ' वशिष्ठ को सजा दी और समझाया कि ज्ञान की सार्थकता निरहंकारिता में है l भगवान राम सर्वज्ञ थे लेकिन उन्होंने अपना सौम्य , उदार और करुणाजनक स्वाभाव बनाए रखा और जन - जन को अपने आचरण से शिक्षण दिया l
8 May 2021
7 May 2021
WISDOM ------
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी का कहना है --- " बुद्धिजीवी - विचारशील वर्ग पर भगवान ने समाज रूपी बगिया के माली का भार सौंपा है l यदि वह अपनी जिम्मेदारी को निभाने में प्रमाद करते हैं तो किसी न किसी समय , किसी न किसी तरह उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा l " आचार्य श्री लिखते हैं ---- ' प्रकृति की मर्यादाओं - नियत नियमों की अनुकूल दिशा में चलकर ही सुखी , शांत और संपन्न रहा जा सकता है l ग्रह , नक्षत्र , तारे , ग्रह - उपग्रह एक नियम मर्यादा के अनुसार चलते हैं l वे अपने निश्चित विधान का जरा भी उल्लंघन नहीं करते l प्रकृति ने अपने परिवार के समस्त सदस्यों को इस व्यवस्था मर्यादा में बांध रखा है कि वे अपना मार्ग न छोड़ें इसलिए सारी व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है l केवल मनुष्य ही ऐसा है जो बार - बार नियति के विरुद्ध जाने की धृष्टता करता है , मर्यादाओं का उल्लंघन करता है l " विज्ञान ने हमें बहुत सुख - सुविधाएँ दीं लेकिन संसार के सारे सुख- सुविधाओं का उपभोग तो इसी शरीर से संभव है l यदि मनुष्य मर जाए या चलती - फिरती लाश बन जाए , हर पल , हर किसी से भयभीत रहे तो सब सुख - सुविधाओं का , भोग - विलास के साधनों का कोई अर्थ नहीं रह जाता l जब विज्ञान के साथ चंद लोगों का , कुछ संस्थाओं का स्वार्थ जुड़ जाएगा तब इस संसार को शमशान बनने में देर नहीं लगेगी l ईश्वर ने हमें चयन की स्वतंत्रता दी है -- यह हमारे हाथ में है कि हम सही मार्ग चुने ---- हम विवेकपूर्ण , संवेदनशील इनसान बनकर जीना चाहते हैं या मानसिक गुलामी में चलती -फिरती लाश बनकर जीना चाहते हैं l जागरूक हो , ' जब जागो तब सवेरा l '
4 May 2021
WISDOM -----
कहते हैं --- ' सोए हुए को जगाया जा सकता है लेकिन जो जागते हुए भी सो रहा है , उसे भला कौन जगा सकता है l ' जब चारों तरफ चोरी , बेईमानी , भ्रष्टाचार , मिलावट , कालाबाजारी , धोखा , अपराध का बाजार गर्म हो , तब अपने जीवन के लिए , उखड़ती साँसों के लिए बदहवास होकर भागना --------- ? मृत्यु से कोई नहीं बचा है , जितनी श्वास ईश्वर ने हमें दी हैं उसे कोई छीन नहीं सकता l ' लेकिन यह कथन तभी सत्य सिद्ध होगा जब हम जागरूक होंगे , परिस्थिति , वातावरण को समझ कर विवेकपूर्ण निर्णय लेंगे l जब - जब धर्म का नाश हुआ तब ईश्वर ने अवतार लिया , अपने आचरण से शिक्षण दिया l अत्याचारी , पापियों का, अधर्म का नाश किया , न्याय और धर्म की स्थापना की l इससे हमारी आदत बन गई कि भगवान आएंगे , अत्याचार , अन्याय का अंत होगा l लेकिन नहीं ! भगवान कहते हैं हम कहाँ तक अवतार लें , मनुष्य जागरूक ही नहीं होता l विज्ञान का ही दूसरा नाम -भस्मासुर है , जिसमे विवेक नहीं था , संवेदना नहीं थी , अपने धन और शक्ति के बल पर संसार को और शिवलोक को जीतना चाहता था , दुनिया को अपने तरीके से चलाना चाहता था l हमें समझना होगा कि अब विष्णु भगवान मोहिनी रूप रख कर उसका अंत नहीं करेंगे , हमें ही जागरूक और संगठित होकर विवेकपूर्ण तरीके से भस्मासुर को हर सिर पर हाथ रखने से रोकना होगा , अपने भीतर के देवत्व को जगाना होगा ताकि भस्मासुर स्वयं अपने ही सिर पर अपना हाथ रख ले l
3 May 2021
WISDOM ------
एक प्रेरणाप्रद दृष्टांत है ----- ' यूनान के शाह का स्वास्थ्य दिन - प्रतिदिन ख़राब होता जा रहा था , बचने के आसार नहीं थे l अंत में सभी हकीमों ने यह निश्चय किया कि निर्धारित लक्षणों वाले किसी व्यक्ति का पित्ताशय प्राप्त हो सके तो शाह को बचाया जा सकता है l शासकीय कर्मचारी निकल पड़े और एक बालक को पकड़ लाए l काजी से इस संबंध में परामर्श लिया गया तो उसने भी कह दिया कि राजा की प्राण रक्षा के लिए यदि कुछ व्यक्तियों को अपना बलिदान देना पड़े तो वह अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा l निश्चित समय पर वह लड़का राजा के सम्मुख लाया गया l सभी हकीम तैयारी के साथ वहां थे , राजा ने जल्लाद को उस बालक का काम तमाम करने की आज्ञा दी l जल्लाद ने जैसे ही तलवार उठाई , वह बालक ऊपर आकाश की और देखकर हँसने लगा l मृत्यु के मुख में जाते बालक को हँसते देख राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ , उसने संकेत से जल्लाद को रुकने को कहा और बालक से हँसी का कारण पूछा l बालक ने कहा ---- ' आज मैंने देखा कि माता - पिता जिस संतान के लिए प्राण देते हैं , उन्होंने उसे पैसों के लोभ में बेच दिया l काजी जो धर्म और मर्यादा की रक्षा करने वाला कहा जाता है , उसने राजा को खुश करने के लिए धर्म के सिद्धांत को ही बदल दिया और राजा के जीवन को बचाने के लिए भले ही किसी के प्राण लिए जाएँ , पर धर्म उसे अपराध और पाप की दृष्टि से मान्य करने को तैयार नहीं है l प्रजा का रक्षक बादशाह ही भक्षक बना जा रहा है , उस समय ईश्वर के अलावा व्यक्ति को सहारा देने वाला और कौन हो सकता है ? अत: मुझे उस परम पिता को याद कर के हँसी आ रही है कि यहाँ तो ऐसा अंधेर मचा हुआ है , देखें सबका रक्षक क्या करता है ? बालक की बात सुनकर राजा को समझ आ गई , उसने अपनी भूल स्वीकार कर बालक को मुक्त किया l
1 May 2021
WISDOM ---- आ अब लौट चलें ----- प्रकृति की ओर
हम हमेशा समस्याओं पर चर्चा न कर के समाधान खोजें l विज्ञानं ने हमें जितना सुख नहीं दिया उतना दुःखी कर दिया l सम्पूर्ण मानव समुदाय को मृत्यु के मुख में धकेल दिया l तनावग्रस्त जीवन जीने और उससे उत्पन्न समस्याओं से जूझने को विवश कर दिया l समाधान के लिए सबका मुँह ताकने से बेहतर है कि जो कुछ हमारे वश में है हम वह करें l अंधकार को मिटाने के लिए एक दिया जलाएं l सर्वप्रथम हम विज्ञानं द्वारा दी गई सुविधाओं को अलविदा कहें l फ्रिज , ए.सी. को विदा करें l जब अंग्रेजी दवाइयाँ , इंजेक्शन आदि नहीं थे तब लोग प्रकृति के संरक्षण में रहते थे और बहुत स्वस्थ थे l महाराणा प्रताप का कवच , भाले आदि शस्त्र इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं l हम प्रकृति पर और आयुर्वेद पर निर्भर रहें , इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते l जिन दवाइयों और इंजेक्शन के पीछे लोग भाग रहे हैं , वे शरीर को बीमारियों का घर बना देते हैं l कैसी विडंबना है मनुष्य अपने शरीर को खोखला कर के इस दवाई बनाने वालों को अरबपति बना देता है l यही दुर्बुद्धि है l
WISDOM ------
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने लिखा है --- " बुद्धिजीवी विचारशील वर्ग पर भगवान ने समाज रूपी बगिया के माली का भार सौंपा है l यदि वह अपनी जिम्मेदारी को निभाने में प्रमाद करते हैं तो किसी न किसी समय , किसी न किसी तरह उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा l " आचार्य श्री का कहना है --- आज के युग की सभी समस्याओं का एकमात्र हल ' सद्बुद्धि ' है l समय कितना बदल गया , बीमारी , महामारी पहले भी संसार में थीं लेकिन पहले किसी ने घोषणा नहीं की थी कि ' हैजा आने वाला है ' अब ' प्लेग आने वाला है ' l ' हैजा , प्लेग या चेचक की दूसरी , तीसरी लहर आने वाली है ' l ये सब बीमारी अचानक बिना घोषणा के होती थीं और साधन - सुविधाओं की कमी के कारण इनका रूप विकराल हो जाता था l अब माना विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है , यदि वैज्ञानिक , किसी महामारी की घोषणा करते हैं कि अब इसकी दूसरी या तीसरी लहर आएगी तो इसका अर्थ है कि वे सम्मानित जन इसका कारण भी जानते हैं कि उनके किन्ही प्रयोगों , कोई नई तकनीक की टेस्टिंग आदि किन्ही कारणों से धरती और आकाश में कोई ऐसा कम्पन हो रहा है जिससे वातावरण जहरीला हो गया है l कभी - कभी स्वार्थ , शक्तिशाली लोगों का दबाव या कोई मज़बूरी बड़े - बड़े समर्थ लोगों को भी गलत दिशा में चलने को विवश कर देती है और ऐसे में वे अपना ही नहीं सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व को दांव पर लगा देते हैं l हम सम्पूर्ण संसार के लिए ईश्वर से सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करें कि महामारी के इलाज से पहले उसके कारण को समाप्त करें l
30 April 2021
WISDOM -----
लालच ---- चाहे धन का हो , सत्ता का हो ,सम्पूर्ण समाज को जर्जर कर देता है क्योंकि इसकी पूर्ति के लिए व्यक्ति समाज का शोषण करता है l लालच का कोई अंत नहीं है , यदि ये दुर्गुण उच्च पद पर बैठे व्यक्ति से लेकर एक सामान्य व्यक्ति में भी हो तब इस श्रंखला को तोड़ना बड़ा कठिन है और तब इसका परिणाम ऐसा घातक होता है कि चारों ओर हाहाकार मच जाता है l लालच का सबसे पहला आक्रमण स्वाभिमान पर होता है l मनुष्य अपनी असीमित कामनाओं और वासना की पूर्ति के लिए दूसरों की गुलामी को भी स्वीकार कर कर लेता है l