16 June 2022

WISDOM-------

   स्वर्ग  में  किसी  की  शोभा  यात्रा  निकल  रही  थी  l   किसी  ने  पूछा ----- ' इस  पालकी  में  कौन  बैठा  है   ? '  उत्तर  मिला ----- '  एक   शेर   बैठा  है  l '  प्रश्नकर्ता  ने  पूछा ---- " उसे  स्वर्ग  का  वैभव  कैसे  प्राप्त  हो  गया   ? "  उत्तर  मिला ----- " एक  रात  को  बहुत   आँधी , तूफान  व  बरसात  होने  लगी  थी   l   शेर  अपनी  गुफा  को  लौट  रहा  था  l   उसे  गंध  से  मालूम  पड़ा  कि  उसकी  अँधेरी  गुफा  में  एक  बकरी  आकर  बैठ  गई  है  l  शेर  ने  विचार  किया  कि  बकरी  अगर  मुझे  देख  लेगी   तो  भयभीत  हो  जाएगी  ,  इसलिए  वह  बाहर  ही  बैठ  गया  l  वह  रात  भर  पानी  में  भीगता  रहा   और  बकरी  को  कष्ट  न  हो  ,  इसलिए  स्वयं  कष्ट  उठाता  रहा   l  बकरी  के  प्राण  बचाने  के   पुण्य  के  फलस्वरूप   ही  उसको  स्वर्ग  मिला  है  l  "  परोपकार  कभी  व्यर्थ  व्यर्थ  नहीं  जाता  l 

15 June 2022

WISDOM -------

 पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- ' वास्तविकता  बहुत  देर  तक  छिपाए  नहीं नहीं  रखी   जा  सकती  l  व्यक्तित्व  में  इतने  अधिक  छिद्र  होते  हैं   कि  उनमे  से  होकर  गंध   दूसरों  तक  पहुँच  ही  जाती  है   l   अपने  को  सभ्य   कहने  वाला  मनुष्य   आज  कितना  बनावटी  हो  चला  है  ,  बात -बात  पर   अभिनय  करने  वाला , समय - समय  पर   भिन्न -भिन्न  मुखौटे  ओढ़ने   की   विडम्बना  में  फँसा  हुआ  है   l      एक  लघु - कथा  है  ----------------- एक  जंगल  में  एक  सियार  रहा  करता  था   l  एक  दिन  वह  मार्ग  भटक  कर   इनसानों  की  बस्ती  में  जा  पहुंचा  l  उसे  वहां  देखते  ही  नगर  के  कुत्ते  उसके  पीछे   पड़    गए  l  सियार  जान  बचाकर  भागने  लगा  कि  रास्ते  में  एक  रंगरेज  का  घर  पड़ा  l   घर  के  पिछवाड़े  रंगरेज  ने   नीला  रंग  बरतन  में  रखा  था   और  भागता  हुआ  सियार  उसी  में  गिर  पड़ा   l  रंगा  हुआ  सियार   जब  वापस  जंगल  पहुंचा   तो  नीले  रंग  के  सियार  को  देखकर   जंगल  में  सभी  जानवर   उससे  डरने  लगे   l  अब  क्या  था  , सियार  के  दिमाग  में  एक  कुटिल  तरकीब   आई  l  एक  बड़े  से  पत्थर  पर  चढ़कर  वह  जोर  से  चिल्लाया  --- " जंगल  के  निवासियों  !  मैं  तुम्हारा   नया  राजा  हूँ   l  मुझे  भगवान  ने  दर्शन  देकर   नीला  रंग  दिया  है  ,  ताकि  मैं  नए  राजा  के  रूप  में  तुम्हारी  रक्षा  कर  सकूँ  l "  जानवर  भयभीत  थे  ,  उसकी  बात  को  सच  मानकर  उसे  अपना  राजा  मान  लिया  ,  अब   रंगे    सियार  के  दिन  सुख  से  बीतने  लगे   l  एक  दिन  जब  वह  सभा  कर  रहा  था   टी,  उसी  समय  दूर  से  सियारों   के  एक  झुण्ड  से   ' हुआ -हुआँ  '  की  आवाज  आई  l  रंगे  सियार  के  मुंह  से  भी   स्वाभाव वश  वही  आवाज  निकली   और  उसे  सुनते  ही  उसकी  असलियत  सबके  सामने  आ  गई   l  अब  सब  उसे  मारने  दौड़े  ,  बड़ी  मुश्किल  से  वह  अपनी  जान  बचाकर  उस  जंगल  से  ही  भाग  गया   l    इस  कथा  से  यह  शिक्षा  मिलती  है  कि  ----- केवल  बाह्य  परिवेश  बदल  लेने  से   कुछ  नहीं  होता  ,  यदि  चिन्तन  और  चरित्र  में   श्रेष्ठता  नहीं  आती   तो  एक  दिन  सच्चाई  सबके  सामने   आकर  रहती  है    l   

14 June 2022

WISDOM ----

   '  सफलता  जिस  ताले  में  बंद  रहती  है   वह  दो  चाबियों  से  खुलता  है  --- एक  परिश्रम  और  दूसरा  सत्प्रयास  l  कोई  भी  ताला  यदि  बिना  चाबी  के  खोला  गया   तो  आगे  उपयोगी  नहीं  रहेगा   l  इसी  प्रकार  यदि   परिश्रम  और  प्रयास   नहीं  किया  गया   तो  कोई  भी  थोपी  गई  सफलता  टिक  न  सकेगी   l    परिश्रम  और  प्रयास  के  साथ  जरुरी  है  ' मनोयोग '   --  जो  समस्त  सफलताओं  की  कुंजी  है   l   ----------  रवीन्द्रनाथ  टैगोर   अपने  कमरे  में  बैठे   कविता  लिखने  में  व्यस्त  थे   कि  इतने  में  छुरा  लिए  हुए   एक  गुंडे  ने  उनके  कमरे  में  प्रवेश  किया   l  उसे  किराये  पर  हत्या  करने  के  लिए  किसी  ईर्ष्यालु  ने  भेजा  था   l   उन्होंने  आँख  उठाकर  उसकी  तरफ  देखा  और  सारा  मामला  भांप  लिया  l  उनने  उंगली  का  इशारा  कर  के   शांत  भाव  से   चुपचाप   एक  कोने  में  पड़े  स्टूल  पर  बैठ  जाने  को  कहा   और  बोले --- ' देखते  नहीं  मैं  कितना  जरुरी  काम  कर  रहा  हूँ  l '   और  फिर  वे  एकाग्रचित्त  अपना  काम  करने  लग  गए   l  हत्यारा  सकपका  गया   l  इतना  निर्भीक  और  संतुलित  व्यक्ति   उसने   अपने  जीवन  में  पहले  कभी  नहीं  देखा  था   l  वह  कुछ  देर  तो  बैठा  रहा   लेकिन  फिर  बहुत  घबरा  गया  और  उलटे  पैरों  भाग  खड़ा  हुआ   l 

13 June 2022

WISDOM ------

   लघु -कथा ---  एक  दिन  किसी  की  जेब  से   एक  सोने  का  सिक्का   गंदे  चीथड़े  के  पास  गिर  पड़ा  ,  चिथड़े   को  देख  कर  सोने  का  सिक्का  बोला  ---- " ओ  गंदे  चिथड़े  ! जरा  दूर  हट  जा  ,  देखता  नहीं  मैं  सोने  का  सिक्का  हूँ   , जिसे  पाने  के  लिए  राजा  से   लेकर   रंक    तक   दिन -रात  यत्न  करते  हैं   l  "  यह  बात  चिथड़े  को  बहुत  अखरी  ,  किन्तु  कर  ही  क्या  सकता  था   l       दिन  पलटे   और  चिथड़े  के  भी  कायाकल्प  के  दिन  आए   l  कचड़ा  बीनने  वाले  ने  उसे  उठा  लिया   और  कागज   के  कारखाने  में   बेच  दिया  ,  उससे  जो  कागज  तैयार  हुआ   वह  करेंसी  नोट  -दस  स्वर्ण  मुद्राओं   के  बराबर  मूल्य  का  आँका  गया   l   एक  दिन   जब  वह   अपने  कार्य स्थल  पर  था   तब  उसका  सामना  सोने  के  सिक्के  से  हुआ   l   उसने  सोने  के  सिक्के  को  पहचान  लिया   और  बोला  ---- " भैया  !  उस  दिन  तो  तुम  मुझे  दुत्कार  रहे  थे  ,  किन्तु    आज   मैं  तुमसे  अधिक  कीमत  का  बन   गया  हूँ   l  तुम  जैसे  लोग  दूसरों  की   निरर्थक  निंदा  करते  रहते  हो   और  जब  वे  बड़े  बन  जाते  हैं  तो  या  तो  उनसे  ईर्ष्या  करने  लगते  हो     लेकिन  यदि  उनसे  कोई  स्वार्थ  सिद्ध  होता  है   तो  उनकी  पूजा  करने  दौड़  पड़ते  हो   l  "  सोने  का  सिक्का  अपनी  अहंता   पर  लज्जित  था  l  

WISDOM------

   लघु -कथा ----   ' व्यक्ति  का  जैसा  स्वभाव -चिंतन  होता  है  , उसे  वैसी  ही  दुनिया  दिखाई  देती  है  l '    ---      एक  चित्रकार  ने  बड़ी  मेहनत  से  एक  भूखे - गरीब  आदमी  का   बड़ा  सा   चित्र  बनाया  l   चित्र  इतना   प्राकृतिक  लगता  मानो  आदमी  की  पीड़ा   उभरकर   कैनवस  पर  रख  दी  हो   l  दर्द  से  कराहता ,  झुर्रियां  पड़ी  हुईं  l  कपड़े  चीथड़े ,  तार -तार  दर्शाए  गए  थे   l  चित्र  को  देखकर  लोगों  के  मन  में   दुःख  के  चिन्ह  उभरते   l   लोग  अपनी - अपनी  मनोवृति  के  अनुसार   अटकलें  लगाते , चित्र  का  वर्णन  करते   l  चित्रकार  के  एक  डॉक्टर  मित्र  ने   चित्र  को  देखा   और  बड़ी  देर  तक  चित्र  को  देखता  ही  रहा  l   अंत  में  उसकी  प्रशंसा  करते  हुए  बोला ---- " लगता  है  इस  आदमी  के  पेट  में  तकलीफ  है  l  वही  अपने  इस  चित्र  में  बताई  है   l  "  दुनिया  अपने  चिंतन  के  अनुरूप  ही  दिखाई  पड़ती  है   l  

12 June 2022

WISDOM------

  लघु -कथा -------  जंगल  में  खरगोशों  की  सभा  बुलाई  गई  l  सभा  का  उद्देश्य  अपनी -अपनी  पीड़ा  व्यक्त  करना  था  l  भोजन  के  अभाव  से  लेकर   शिकारी  जानवरों  द्वारा  द्वारा  पीछा  करना   तक   आदि  बहुत  से  विषयों  पर  चर्चा  हुई  l   अंत  में  निष्कर्ष  यह  निकला  कि  उनकी  व्यथा  का  मूल  कारण विधाता  ही  हैं  ,  जिन्होंने  उन्हें  इतना  छोटा  ,  दुर्बल  और  असहाय  बना  दिया   है  कि  वे  निरीह  माने  जाते  हैं   l  सबने  निर्णय  किया  कि  ऐसी  परिस्थिति  में   सामूहिक  आत्महत्या  के  अतिरिक्त   और  कोई  विकल्प  ही  नहीं  बचता  l      इसी  संकल्प  के  साथ  वे  सब  तालाब  को  चले   कि  वहां  जाकर  डूब  मरेंगे  l  तालाब  के  किनारे  मेढ़क  बैठे  थे  ,  वे  खरगोशों  को  देखकर  डर  कर  भागे   l  यह  देखकर  एक  समझदार  खरगोश  बोला ----- " मित्रों  !  अब  हमें   आत्महत्या  करने   आवश्यकता  नहीं   है  l  इस  संसार  में   हमसे  दुर्बल  अनेकों  जीव  हैं   l  हमें  विधाता  ने  जो  दिया  है  ,  उसी  पर  संतोष  करना  चाहिए   l  "   विषम  परिस्थितियों  में  भगवान  को  कोसने  के  बजाय   उन    विशेषताओं  पर  गर्व  करना  चाहिए  ,    जिन  से    सुसज्जित    कर  भगवान  ने  हमें   मनुष्य  रूप के  रूप  में  धरती  पर  भेजा  है  l     

11 June 2022

WISDOM ------

   किसी  व्यक्ति  के  जीवन  में  या  राष्ट्र  में  जो  भी  घटनाएँ  घटती  हैं  वे  हमें  कुछ  सिखाने  के  लिए  आती  हैं  ,  हम  उनसे  कुछ  शिक्षा  लेते  हैं  या  नहीं  ये  हमारे  विवेक  पर  निर्भर  है   , जैसे  हम  अपनी  आपसी  फूट  और  मतभेदों  की  वजह  से  युगों  तक  गुलाम  रहे  l  अब  यह  हमारे  विवेक  पर  निर्भर  है  कि  हम   अपनी  गलती  सुधारते  हैं  या  उसे  दोहराते  हैं   l  इसी  सत्य  को  समझाने  वाली  एक  कथा  है ---------  बहेलिया  जाल  फैलाता   बटेरों  का  समूह  उसे  उठाता  ,  झाड़ी  में  उलझाता   और  निकल  भागता  l   बहेलिया  नित्य   खाली  हाथ  घर  वापस  लौट  जाता   l   पत्नी  ने  कहा --- ' आज  भी   खाली  हाथ  लौट  आए  l l '  उसने  कहा ---- ' पक्षियों    में  संगठन  ही  ऐसा  है   कि  जाल  डालता  हूँ  ,  वे  उसे  उठाकर  ,  झाड़ी  में  उलझाकर   निकल  भागने  में  सफल  हो  जाते  हैं  l   '  पत्नी  ने  कहा ---- " धैर्य  रखो  !   उनमे  फूट  पड़ने  का  इंतजार  करो   l  देखना  सब  फँसेंगे  l  " एक  दिन  हुआ  भी  ऐसा  ही   l  बहेलिया  ने  दाना  डाला   और  जाल  फैलाया   l  बटेरों  का  झुंड  आया  और  सभी  दाना  चुगने  में  लग  गए   l  भूल  से   एक  बटेर  ने   दूसरे  के  सिर  पर  पैर  रखकर  कुलाँच  मारी  l  विवाद  शुरू  हो  गया   l  विवाद  बढ़ते -बढ़ते   नौबत  मारामारी  की  आ  गई   l  दूसरा  बोला ---लगता  है   जैसे  जाल  तू  ही  उठाता  है   l  पहले  ने  पलट  कर  जवाब  दिया  -- और  क्या  तू  उठाता  है   l   ' यदि  मैं  न  उठाऊं    तो  तेरी  क्या  बिसात   !  बस  विवाद  बढ़ता  ही  गया   l  एक   दूसरे   के  समर्थन  में   झुंड  दो  दलों  में   विभाजित  हो  गया  l  बहेलिया  समझ  गया  कि  अब  काम  होने  वाला  है   l  बटेर  विवाद  में  उलझे  रहे   और  जाल  उठाना  भूलकर   एक -एक  कर  जाल  में  उलझते  गए   l  जब  सब  जाल  में  फँस  गए   तो  बहेलिए  ने  जाल  समेटा  और  चल  दिया   l  अब  बटेर  पछता  रहे  थे   कि  व्यर्थ  के  विवाद  और  झगड़े  में  पड़कर   वे  सब  जाल  में  फँस  गए  l  बहेलिए  को  पत्नी  की  बात  याद  आ  गई   कि   विवाद  होने  तक  इंतजार  करो  ,  संगठन  जरुर  बिखरेगा  l