वास्तविकता बहुत देर तक छिपाये नहीं रखी जा सकती ।व्यक्तित्व में इतने अधिक छिद्र हैं कि उनमे से होकर गंध दूसरों तक पहुँच ही जाती है ।एक दिन एक साहूकार को शक हुआ ,उसके खजाने में कहीं खोटे सिक्के तो नहीं आ गये ।यह जांचने के लिए उसने सब सिक्के एक जगह एकत्रित किये और जाँच -पड़ताल शुरू की ।अच्छे सिक्के तिजोरी में और खराब सिक्के एक तरफ पटके जाने लगे ,तो खोटे सिक्के घबराये ।उन्होंने परस्पर विचार किया 'भाई !अब तो अपने बुरे दिन आ गये ,यह साहूकार अवश्य हम लोगों को छांट -बीनकर तुड़वा डालेगा ,कोई युक्ति निकालनी चाहिए ,जिससे इसकी नजर से बचकर तिजोरी में चले जाएँ ।एक खोटा सिक्का बड़ा चालाक था ।उसने कहा -"भाइयों !हम लोग यदि जोर से चमकने लगें ,तो यह साहूकार पहचान नहीं पायेगा और अपना काम बन जायेगा ।"बात सबको पसंद आई ।सब खोटे सिक्के बनावटी चमकने लगे और सेठ की तिजोरी में पहुँचने लगे ।खोटे सिक्के को अपनी चालाकी पर बहुत अभिमान हुआ ।गिनते -गिनते एक सिक्का जमीन पर गिर पड़ा और नीचे पत्थर से टकराया ।साहूकार चौंका -हैं ये क्या ,चमक तो अच्छी है पर आवाज कैसी थोथी है ।उसे शंका हो गई ।दुबारा उसने सब सिक्के निकाले और पटक -पटक कर उनकी जाँच शुरू की ।फिर क्या था असली सिक्के एक तरफ और नकली सिक्के एक तरफ ।खोटों की दुर्दशा देखकर एक नन्हा सा असली सिक्का हँसा और बोला -मेरे प्यारे खोटे सिक्कों !दिखावट और बनावट थोड़े समय चल सकती है ,खोटाई आखिर इसी तरह प्रकट हो जाती है ।इस लिए कमजोरियों पर गन्दगी का आवरण न डालकर उनके निष्कासन के ,स्वच्छता के प्रयासों में निरत रहना चाहिए ।
7 February 2013
अवसर का यथोचित उपयोग ही मनुष्य जीवन की सफलता का रहस्य है ।बसंत के अंतिम दिनों में तूफानी ठंड के दिन एक घोंघा चैरी के वृक्ष पर मंथर गति से चढ़ रहा था ।पास के वृक्ष पर बैठी चिड़िया उसकी मूर्खता पर हँस रही थी ।वह उसका मजाक करते हुए बोली कि तू इतना भी नहीं जानता कि वृक्ष में कोई फल नहीं हैं ।तू व्यर्थ में ही श्रम कर रहा है ।घोंघे ने बिना रुके ही उत्तर दिया कि बहिन आप ठीक कहती हैं ,लेकिन जब तक मैं पहुचूँगा तब तक फल लग चुके होंगे ।
4 February 2013
असफलताएं खोलतीं हैं सफलताओं के द्वार ।एडिसन का कथन है -"असाधारण प्रतिभासंपन्न मात्र एक प्रतिशत जन्मजात होते हैं ।शेष निन्यानवे प्रतिशत को उनका कठिन परिश्रम और अध्यवसाय की आदत गढ़ती -ढालती एवं बनाती है ।"प्रत्येक असफलता हमें अधिक समझदार बनाती है ।असफलता मात्र एक अवसर है दुबारा बुद्धिमतापूर्ण ढंग से प्रयास करने का ।पनामा नहर की खुदाई चल रही थी ।यह कार्य संकल्प के धनी मेजर जनरल गोथाइल की देख -रेख में चल रहा था ।नहर आधी ही खुद पायी थी कि अचानक एक विशाल भूखंड टूटकर गिर पड़ा व नहर मिट्टी के मलबे से भर गई ।कई माह के कार्य की क्षति हुई ।जनरल के सहायक ने उदासी भरे हताश शब्दों में कहा -"अब क्या करें ?'गोथाइल ने दृढ स्वर से कहा -"पूरे उत्साह के साथ दोबारा खुदाई शुरु करो ।"ऐसा ही किया गया एवं सफलता प्राप्त हुई ।यदि हमारे ह्रदय में अपने लक्ष्य के प्रति अगाध श्रद्धा एवं विश्वास है और प्रत्येक असफलता को हम चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं तो हमारी सफलता उतनी ही सुनिश्चित होगी ,जितना कि लम्बी रात्रि के बाद का उगने वाला अरुणिम सूर्य ।
3 February 2013
एक बार शरीर की सभी इंद्रियों ने हड़ताल कर दी ।उनने कहा -"कमाई हम करते हैं ,हजम सारा पेट कर जाता है ।हाथ ,पाँव ,आंख नाक ,कान आदि ने यूनियन बना ली और कहा कि हम कमाएंगे और हम ही खाएंगे ,अन्यथा काम नहीं करेंगे ।पेट ने सभी को समझाया कि तुम्हारा दिया सब कुछ तुम्हीं को तो लौटा देता हूँ ,ताकि तुम सशक्त रहो ।हड़ताल मत करो ।पर यह बात किसी इंद्रिय की समझ में नहीं आई ।उनने कहा -"तुम पूंजीपति हो ।शोषण करते हो ।जब सब अंगों ने काम करना बंद कर दिया तो भोजन पेट में कैसे पहुँचता ,इसलिए पेट भूखा रह गया ।शरीर के रस सूखने लगे ।सभी अंगों की शक्ति नष्ट होने लगी ।इंद्रियां निष्क्रिय सी हो गईं ।तब मस्तिष्क ने इंद्रियों से कहा -"मूर्खों !तुम्हारा परिश्रम अकेले पेट के पास नहीं रहता ,वह लौटकर तुम्हे ही वापस मिलता है ।दूसरों की सेवा करके हम घाटे में नहीं रहते ,जितना देते हैं ,वह ब्याज सहित वापस लौट आता है ।तुम सभी अपना कर्तव्य करो ।फल तो मिलेगा ही ।'हड़ताली इंद्रियां वापस काम पर लौट आईं ।परोपकार में बुद्धिमानी है ।इसी में हमारा सहअस्तित्व है ।
2 February 2013
दूध ने पानी से कहा -"बंधु !किसी मित्र के अभाव में मुझे सूना -सूना अनुभव होता है ।आओ ,तुम्हीं को ह्रदय से लगाकर मित्र बनाऊं ।"पानी ने उत्तर दिया -"भाई !तुम्हारी बात तो मुझे बहुत अच्छी लगी ,पर यह विश्वास कैसे हो कि अग्नि परीक्षा के समय भी तुम मेरे साथ रहोगे ?दूध ने कहा -"विश्वास रखो ,ऐसा ही होगा ।"और दोनों में मित्रता हो गई ।ऐसी मित्रता कि दोनों के स्वरुप को अलग करना कठिन हो गया ।अग्नि नित्य परीक्षा लेकर पानी को जला देती है पर दूध है कि हर बार मित्र की रक्षा के लिए अपने अस्तित्व की भी चिंता न करते हुए जलने को प्रस्तुत हो जाता है ,यही है सच्ची मित्रता ।
नशा ,नाश की जड़ है ।पिता ने बहुत समझाया -"बेटा !शराब मनुष्य को बरबाद कर देती है "।पर बेटे ने एक न सुनी ,वह नियमित रूप से शराब पीता रहा ।एक दिन उसने अपने मित्र के साथ खूब शराब पी ।उसकी सारी विचार शक्ति नष्ट हो गई ।उसने मित्र से पूछा -क्यों जी !मेरी मृत्यु के बाद क्या होगा ?"होगा यह कि तुम्हारा शरीर कब्र में डाल दिया जायेगा "-साथी ने उत्तर दिया ।लड़का बोला -"अजी यह तो मुझे भी पता है ,तुम उसके बाद की बात बताओ "।मित्र ने कहा -फिर क्या होगा ,तुम्हे मिट्टी से ढक कर कब्र बना दी जाएगी ।"लड़का ठठाकर हँसा और कहने लगा -मूर्ख !इतना तो मुझे भी पता है ,तू यह बता उसके बाद क्या होगा ?मित्र ने हँसकर कहा -"बरसात होगी और पड़ोसी तुम्हें खूब रौंदेगा ।"लड़का चिल्लाया -"अच्छा तो पड़ोसी की यह हिम्मत !और लाठी लेकर दौड़ा ।पकड़ते -पकड़ते उसने पड़ोसी का सिर सीरा बना दिया ।वह तो पुलिस आ गई ,नहीं तो मारकर ही छोड़ता ।पुलिस उसे पकड़ कर ले गई और हवालात में बंद कर दिया ।सुबह उसने पिताजी को संदेश भेजा -"पिताजी !अब मैं समझ गया ,नशा सचमुच मनुष्य से वह सब करा सकता है ,जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती ।"
31 January 2013
जो ईश्वर से भय खाता है उसे दूसरा भय नहीं सताता है ।संकीर्ण स्वार्थ ,वासना और अहं से युक्त अनैतिक जीवन भय का प्रमुख कारण है ।भय का सबसे घ्रणित पहलू अपने स्वार्थ के लिए ,दूसरों पर छाये रहने की भावना से अधीनस्थ लोगों का शोषण करना है ।वैराग्यशतक में भय की स्थिति का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है -भोग में रोग का भय ,धन में चोरी होने का भय ,सत्ता में शत्रुओं का भय ,सौंदर्य में बुढ़ापे का भय ,शरीर में मृत्यु का भय ।इस तरह संसार में सब कुछ भय से युक्त है ।त्याग का मार्ग ही निर्भयता की अवस्था की ओर ले जाता है ।
Subscribe to:
Posts (Atom)