23 April 2021

WISDOM ------

    कहते  हैं  ---- किसी  को  सुख  न  दे  सको  तो  कोई  बात  नहीं ,  लेकिन  किसी  को  दुःखी   न  करो  l '   और  आज    निम्न  और  मध्यम   वर्ग  के  लोगों  के  जीवन  में   जो  दुःख  है  वह   किसी  से  छिपा  नहीं  है  l   बीमारी  तो  हमेशा  से  ही  संसार  में  रहीं  हैं  --- डाइबिटीज , टी. बी. , ------ अनगिनत  बीमारियाँ   हैं  l   सबसे  बड़ी  महामारी  है ---' अमीरी ' l   उनके  खजाने  में  कमी  न  आ  जाये   इसलिए  बीमारी  के   बहाने  से  लोगों  को  काम  से  ही  हटा  दिया  l   युवा  जिनके  जीवन  के  अनेक  सपने  हैं  , वे  कमरे  में  बंद  हैं  l   बच्चे  जो  देश  के  कर्णधार  हैं  ,   उनका  भविष्य   भी  खतरे  में  है   l   संसार  के   कुछ  गिने - चुने  लोगों   ने अपने  सुख , अपनी  महत्वाकांक्षा  के  लिए   एक  बहुत  बड़े  मानव  समुदाय  को  दुःखी   कर  दिया   l    जब  मनुष्य  संवेदनहीन  हो  जाता  है  तब  ऐसी  आपदा   कुछ  को  बहुत  अमीर  बना  देती  है  ,  कुछ  का  जीवन  कठिन  हो  जाता  है  l   मुसीबतों  का  वर्गीकरण  किया  जाए   तो  कुछ  तो  प्राकृतिक  होती  हैं    लेकिन  कुछ  ऐसी  भी  होती  हैं   जिन्हे  शक्ति संपन्न  व्यक्ति     कमजोर  पर  थोप  देते  हैं  l 

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22 April 2021

WISDOM ----

  मनुष्य  जब  अपने  अहंकार  , अपनी  महत्वाकांक्षा  की  पूर्ति  के  लिए  प्रकृति  से  छेड़छाड़  करता  है   तो   उसकी  प्रतिक्रियास्वरूप  विभिन्न  समस्याएं  आती   हैं  l   संसार  के  धन - वैभव  और  शक्ति  संपन्न  व्यक्ति   जब  प्रकृति  पर  नियंत्रण  करने  के  लिए  विभिन्न  योजनाएं  बनाते  हैं  और  उन्हें  इसी  उद्देश्य  से  लागू   करते  हैं   कि   अब  वे  ही  इस  संसार  के  कर्ता -धर्ता  हैं   तो  संसार  में  ऐसी  आपदाएं  आना  स्वाभाविक  है  l   प्रकृति  स्वयं  में  संतुलित  है   l   ऐसे  पदार्थ  जो  प्राणीमात्र   के  लिए  , पर्यावरण  के  लिए  घातक  हैं  ,  वे  धरती  में  बहुत  गहराई  में  छिपे  हैं   लेकिन  स्वयं  को  ज्ञानी  समझने  वाले  मनुष्य  ने  उनको   उतनी  गहराई  से  बाहर  निकाल  लिया  l   एक  कहावत  है  ---जब  कोई  काम  न  हो  तो  ' आओ  पड़ोसन  लड़ें '  l   और  लड़ने  के  लिए  हथियार  चाहिए  ---  घातक  हथियार  बनाना , उनका  प्रयोग  करना  , पूरे   वातावरण   को जहरीला  बना  देता  है  l   इसी  तरह  विकास  की  दौड़  एक  सीमा  तक  ही  उचित  है   ,  विज्ञान   ने  पूरे   आकाश  को  सेटेलाइट  से  भर  दिया  l   धरती  से  आसमान   तक सब  प्रदूषित  हो  गया  l   यह  चिंतन  का  विषय  है    आखिर  यह  आपदा  किसकी  देन   है   l   मनुष्य  ने  स्वयं  को  विकसित  नहीं  किया   केवल  साधनों  को  ही  विकसित  किया  l   पहले  ' मन  की  शक्ति ' से  संदेश    दूर - दूर  तक  पहुँच  जाते  थे  ,  लेकिन  अब  मन , भावनाएं   सब  मर  चुकी  हैं  l  हमारा   सूचना   और  संचार  तंत्र   कितना शक्तिशाली  हो  जाये   , इसने  अनेक  पक्षियों   को लुप्त  कर  दिया  l   पक्षियों  की  लुप्त  होती  प्रजातियाँ   हमें  एक  संदेश   दे  रही  हैं  , जिसे  समझना  जरुरी  है   l 

21 April 2021

WISDOM ----

   आज  संसार  में  धनपतियों  में  संसार  का  सबसे  अधिक  अमीर  बनने  की  होड़  है  l   इस  अंधी  प्रतियोगिता  के  कारण  ही   वे  सब  तरीके  अपनाये  जाते  हैं  जो  मानव  जाति   के  लिए  हानिकारक  हैं  l   कर्मफल  को  माने  या  न  मानें  लेकिन  यह  तो  सच  है   कि   उम्र  ढलने  पर    अपने  कमरे (ROOM )  में  एक  स्थान  से  दूसरे  स्थान  पर  जाना   कठिन  होता  है  ,  बड़े - बड़े  महल   का  कोई  अर्थ  ही  नहीं  रहता  ,  छप्पन  व्यंजन  भी  हों   तो  शरीर  में  उनको  हजम  करने  की  शक्ति  नहीं  रहती  l   सुख  के  सब  साथी  दुःख  में    न कोय  l   इतना  शोषण  ,  इतना  अन्याय  किसके  लिए  करते  हैं  l   दान  भी  करते  हैं  , तो  उसके  पीछे  अपने  स्वार्थ   को पूरा  करते  हैं   या  अपने  अनैतिक ,  अमर्यादित  कार्यों  पर  कोई  ऊँगली  न  उठाए ,  इसलिए  सबका   मुंह   बंद  करने  के  लिए  l    यह  सत्य  व्यक्ति  स्वयं  जानता   है  कि   उसे  चैन  की  नींद   आती   भी  है  या  नहीं   l 

20 April 2021

WISDOM -----

 ' मनुष्य  की  एक   मुट्ठी  में  स्वर्ग   और   दूसरी   में नरक  है  l   वह  अपने  लिए  इन  दोनों  में  से   किसी  को  भी  खोल  सकने   के लिए    स्वतंत्र है   l '        हम  क्या  चुनते  हैं  यह  हमारे  विवेक  पर  निर्भर  है  l   या  तो  हम  आधुनिक  सुख - सुविधाओं   में  जीवन  व्यतीत  करें  ,  जिसमे  विज्ञानं  द्वारा  प्रदत्त  साधनों  से  निकलने  वाली  तरंगे  हमारे  स्वास्थ्य  को  प्रभावित  करती  हैं   और  हमारी  प्रतिरोधक  शक्ति  को  कम  करती  हैं  ,---- या  हम   सीमित   मात्रा  में    सुविधाओं  का  उपभोग  करते  हुए   प्राकृतिक  जीवन  जिएं   l   आज  की  स्वास्थ्य  संबंधी   अधिकांश  समस्याएं  विज्ञान   की  देन   l    जब  संसार  के  बुद्धिजीवी  , विचारशील  व्यक्ति  आगे  बढ़कर   वैज्ञानिक  प्रगति  की  सीमा , एक  मर्यादा  निर्धारित  कर  देंगे   तभी  संसार  विभिन्न  आपदाओं  से  सुरक्षित  रह  पायेगा   l 

19 April 2021

WISDOM ------

    संसार  का  इतिहास  युद्धों  का  इतिहास  है   l  युद्ध  के   हथियार  बदलते  गए   लेकिन  परिणाम     होता  है  --- जन - धन  की  हानि  l   इसलिए  जब  भी   विशाल  पैमाने  पर  जन - धन  की  हानि  हो   तो  वह  युद्ध   का  ही  एक  रूप  है   l   वर्तमान  स्थिति  में  सभी  देश  इस  महामारी  से  ग्रस्त  हैं  तो  यह  एक  प्रकार  का  विश्व  युद्ध  है  l    यह  युद्ध  छद्म  युद्ध  है  , इसमें  न  तो  वार  करने  वाला  दिखाई  देता  है   और  न  ही  कोई  हथियार  दिखाई  देता  है  l   बस  !  मनुष्य  भयग्रस्त  होकर    इधर  से  उधर  भाग  रहा   है  l  पहले  युद्ध  होने  पर  ' ब्लैक  आउट '  होता  था  ,  सड़कों  पर  सन्नाटा  छा  जाता  था  ,  लोग  बम  के  भय  से  घरों  में  दुबके  रहते  थे   l   ठीक  वही  स्थिति  आज  भी  है    l   भयभीत  होना  एक  प्रकार  की  मृत्यु  ही  है  l   भयग्रस्त  व्यक्ति  की  चेतना  मूर्छित  हो  जाती  है   और  वह   सही  निर्णय  नहीं  ले  पाता  ,  अपने  जीवन  को  बचाने  की   चाह     में  वह  मृत्यु  को  आमंत्रित  कर  लेता  है   l   भय  के  कारण  जब  सोचने - समझने  की  शक्ति  नहीं  रहती    तब  वह  ' भेड़ - चाल  '  चलता  है   और  अपने  हाथों  अपना  अहित  करता  है  l'  भय '  भी   एक  प्रकार  का  हथियार  है  ---   मनुष्य       अपनी    बुद्धि   का  दुरूपयोग  करता  है   तब  अपने  लालच , स्वार्थ  और  अहंकार   के  कारण  वह  रावण  की  तरह   भय  का   कारोबार  करता  है  l   रावण  का  भय  दसों   दिशाओं  में  व्याप्त  था  l   यह  मानव  जाति   का  दुर्भाग्य  है  कि   हमने  रावण  की  बुराइयों  को  अपना  लिया   और   उसके  गुणों  को  नहीं  अपनाया  l   ऐसा  कर  के  मनुष्य  ने  अपने  ही  अस्तित्व  पर  संकट  उपस्थित  कर  लिया  l 

18 April 2021

WISDOM -------

  मनुष्य  की  मुसीबतों  का  सबसे  बड़ा  कारण  है  कि   आज  मनुष्य  नास्तिक  हो  गया  है  l  विज्ञानं  ने  जो  प्रगति  की  है    उसका  अहंकार  मनुष्य  को  हो  गया  है   और  वह  स्वयं  को  भगवान  समझने  लगा  है  l  यही  कारण  है  आज  समाज  में  तनाव , आत्महत्या ,  आतंक , अपराध , अकाल मृत्यु ,  बीमारी , महामारी ,  आपदाएं  बढ़  गई   हैं   l '  भगवान '  का  अर्थ  है  ---- सद्गुणों  का  सम्मुच्य  '  l   लेकिन    वैज्ञानिक    आविष्कार  यदि  मानव  समाज  को  नुकसान  पहुंचा  रहे  हैं  ,    तो  हमें  यह   समझना  होगा     कि   हम  अब  भगवान  किसे  माने  क्योंकि  ईश्वर   की  प्रत्येक  देन   पवित्र  है  l   ईश्वर  ने  हमें  शुद्ध  हवा  दी  है   यदि  हम  उसे  न  लेकर   मानव  निर्मित   किसी  डिब्बे  से  हवा  लेंगे  तो  यह  हमारा  कुसूर  है  l   माँ  ,  चाहे   वह  इनसान   हो  या  पशु - पक्षी  ,  जब  वह  बच्चे  को  अपना  दूध  जो  ईश्वरीय  देन     है  , पिलाती  है  तभी  बच्चा  स्वस्थ  रहता  है  l   यदि  मानव  निर्मित  डिब्बे  का  दूध  पिलायेंगे  तो  बच्चा   उतना स्वस्थ  नहीं  होगा  l   ईश्वर  की   यह  देन   कितनी  आश्चर्यजनक  है   कि   एक  से  एक  गरीब , भूखी - प्यासी  रहने  वाली  माताओं  के  स्तन  में  बच्चे  को  पिलाने  के  लिए  दूध  आ  जाता  है    लेकिन  अनेक  ऐसी  माताएं  भी  हैं   जो  बहुत  अमीर  हैं  ,  खाने - पीने  की  कोई  कमी  नहीं  है   ,  वे    ईश्वर   की   इस   देन   से  वंचित  रह  जाती  हैं   फिर  उन्हें   अन्य  उपायों  का  सहारा  लेना  पड़ता  है   l  संसार  में  आज  जितनी  समस्याएं  हैं   उसका  कारण  अमीरों  की  तृष्णा  है   जो  कभी  पूरी  नहीं  होती  ---  नशा  बेचने  वाला  चाहेगा   कि   उसका   ज्यादा  से ज्यादा  माल   बिक  जाये  जिससे   उसकी अमीरी  बढ़  जाए ,  हथियार   का व्यापारी   चाहेगा कि   खूब  दंगे - फसाद  हो  ,   युद्ध का खतरा  रहे  ताकि  माल  बिके ,   दवा  विक्रेता  चाहेगा   अधिक   से अधिक  लोग  बीमार  पड़ें  ताकि   दवाई  बिकेँ ,  फिल्म   वाले चाहेंगे  कि   कितने   अपराध के   और अश्लील  दृश्य  डालें   कि   करोड़ों  की  आमदनी  हो  जाये  ,  रासायनिक  खाद  वाले  चाहेंगे  कि   चाहे  लोगों  का  शरीर  जहरीला  हो  जाये    उनकी खाद  और  कीटनाशक  बिक  जाएँ  l   यह  सब  इसलिए  है  क्योंकि  आम   जनता जागरूक  नहीं  है   और  चतुर  लोग  मनुष्य  की  कमजोरी   का फायदा  उठाना  जानते  हैं  l   सुख - शांति  से  जीवन  जीने  का  एक  ही  रास्ता  है    कि   हम  ईश्वरविश्वासी  ( आत्मविश्वासी ) बनें  और  सद्बुद्धि   की प्रार्थना  करें   l 















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         उउउउप['

   एक  गाँव  की  कहानी  है  --- वहां  एक  सूदखोर   जो  लोगों  को  धन  उधार  देता   रहता  था  l   वह  चाहता    बहुत  धनवान  हो  जाये   जिससे  बहुत  बड़े  क्षेत्र  में  धन  उधार   दे  सके   और  उसका  ब्याज  इतना  अधिक  आए   कि   वह  उससे  फिर   और   उधार  दे  l   इस  क्षेत्र  में  उसका  खूब  नाम  हो  l  वह  चाहता  था  कि   कोई  ऐसा  तरीका  हो  जिससे  वह  शीघ्र  धनवान  हो  जाये  l   इसके  लिए   उसने बहुत  साहित्य  का , धर्मग्रंथों  का  अध्ययन  किया  l   वह  मनुष्य  की  कोई   ऐसी  कमजोरी  जानना  चाहता  था    जो  सम्पूर्ण  मानव  समाज  की  हो  l  बहुत  अध्ययन  के  बाद  समझ  में  आया  कि   प्रत्येक  मनुष्य   चाहे  वह  अमीर  हो  या  गरीब , ऊंच  हो  या  नीच  , सब  जीना   चाहते हैं   l   बहुत  बड़ी  आयु  तक  भी  सुख -भोग  भोगना  चाहते  हैं  l   अब  उसे  रास्ता  मिल  गया  l   उसने  साधु  का  वेश  धरा  और  अपने  अनेक  चतुर  साथियों  को  गाँव - गाँव  में  भेजा  l   उन्होंने  प्रचार - प्रसार  किया  कि   हमारे  साधु  बाबा   के  पास  ' अक्षय पात्र ' है   उसमे  से   उनके  दिए  जल  को  पीने  से  व्यक्ति  की  आयु  सौ   वर्ष  और  बढ़  जाएगी  तथा  वह    स्वस्थ होकर  दीर्घ  अवधि  तक   आनंद   से  रहेगा   l   अब    उसके  दरवाजे  पर  भीड़  लगने  लगी  l   उस  सूदखोर  साधु  के  साथ  एक  छोटा  लड़का  था   , वह  लोगों  के  सामने  उस  छोटे  लड़के  के  हाथ , गर्दन  या  माथे  पर  एक  कीप   लगाकर     कुछ  बुदबुदाता  तो  कीप  में   पता  नहीं  कहाँ  से  पानी  गिरने  लगता  जिसे  वह  अक्षय पात्र  में  रखता   और  इच्छुक  लोगों  को  पिलाता  l   अब  क्या   था  धंधा  चल  निकला  l   वह  कहता   ---सौ   वर्ष  आयु   में  वृद्धि  करनी  है  तो  कुछ  कष्ट  तो  सहन  करना  ही  पड़ेगा  , इसके  लिए  वह  तरह - तरह   की दवाइयां  देता  l   वह  धनवान  होता   गया  और  लोग   बीमार , बुझे  हुए  चेहरे  और  अमानवीय  लक्षणों   से ग्रस्त  होने  लगे  l   अपनी  अज्ञानता  के  कारण  और  दवाइयां  उससे  लेते  और  अपने  शरीर   को गलाकर   उस  सूदखोर  को  और  अमीर  बनाने   में अपना  भरपूर  योगदान  देते   l    उसी  गाँव  का  एक  नवयुवक  जो  अध्ययन  के  लिए   दूर  किसी  नगर  में  गया  था  ,  जब  लौटा  तो  उसने  देखा   चारों  ओर   मौत  का  सन्नाटा  है  , खुशियां  जैसे  ख़त्म  हो   गईं ,  लोगों  के  चेहरे  अजीब  से  हो  गए  l   लोगों  से  पूछा  तो   उन  अज्ञानी  लोगों  ने   उस  बाबा  की   बहुत तारीफ  की   कि   वह  हमें  दवाई  भी  देता  है ,  धन  उधार  भी   देता है  ,  इस  गाँव  पर   कोई प्रकोप  हो  गया  

WISDOM ------- मन से दुर्भावनाएं दूर न हुईं तो फिर गंगा स्नान किस काम का ?

     कबीर दास  जी  के  जीवन  का  प्रसंग  है  ---- प्रात:  का  समय  था  l  भक्त  लोग  स्नान  कर  रहे  थे  l   कुछ  ब्राह्मण  भी  गंगा  स्नान  करने  आए  l   पानी  काफी  गहरा   था इसलिए  घुसकर  स्नान  करने  का  साहस  नहीं  हो  रहा  था   l   एक  किनारे  पर  संत  कबीर  स्नान  कर  रहे  थे  l    उन्होंने  देखा  तो  अपना  लोटा  मांज - धोकर   एक  व्यक्ति  को  दिया   और  कहा  कि   जाओ , ब्राह्मणों  को  दे  आओ   ताकि  वे  भी  सुविधा  से  स्नान  कर  सकें   l   कबीर  का  लोटा  देखकर   ब्राह्मण  चिल्ला  उठे  --- " अरे  !  जुलाहे  के  लोटे  को  दूर  रखो   l  "  कबीर  बोले  --- " इस  लोटे  को  कई  बार  मांजा   और  गंगाजल  से  धोया   फिर  भी  पवित्र  नहीं  हुआ  ,  तो  यह  मानव  शरीर   जो  दुर्भावनाओं  से  भरा  है  ,  गंगाजी  में  स्नान  करने  से  कैसे  पवित्र  होगा   ? "  कबीर  के  ये  शब्द  सुनकर   ब्राह्मण  बड़े  लज्जित  हुए    और  एक  दूसरे  का  मुंह  ताकने  लगे   l