8 September 2026

WISDOM -------

     पुराणों   की  कथाएं   मनुष्य  को  जीवन  जीना  सिखाती  हैं  l  मनुष्यों  के  विवेक  को  जाग्रत  करने  के  लिए  ये  कथाएं  हैं  l   एक  कथा  है  ---- समुद्र  मंथन  में  जब  हलाहल  विष  निकला   तो   देवता  और  दानव  सब  के  सामने  यह  बड़ी  समस्या  थी  कि  इस  विष  का  क्या  करें  तब  भगवान  शिव  ने  संसार  के  कल्याण  के  लिए  इस  हलाहल  विष  को  अपने  गले  में धारण  किया  ,  न  उगला  , न  पिया  l  यह  विष  उनके  गले  में  ही  रहा  और  वे  नीलकंठ   कहलाए  l  इस  कथा  का  शिक्षण  यही  है  कि   विषाक्तता  को   न  तो  आत्मसात  करें   और  न  ही  उसे  विक्षुब्ध   होकर  उछालें  l  इसे  हम  सरल  ढंग  से  इस  तरीके  से   समझा  सकते  हैं  कि  जो  कुछ  भी  नकारात्मक  है  उसकी  बार -बार  चर्चा  न  करें   क्योंकि  बुराई  में  आकर्षण  होता  है  इसे  लोग  बहुत  जल्दी  सीख  जाते  हैं  l  आज  संसार  में  इतनी  अशांति , अपराध  , क्रूरता   क्यों  है  ?   क्योंकि  हमने   प्रति  वर्ष  रावण  को  जीवित  किया   l  रावण  के  गुणों  की  , उसकी  विद्वता  की  चर्चा  नहीं  की  ,  उसके  नकारात्मक  पक्ष  की  बार -बार  चर्चा  कर  उसे  जलाने का  नाटक  किया   l  यही  कारण  है  कि  आज  रावण  सारे  संसार  में  लोगों  के  विचारों  में  जीवित  हो  गया  l  रावण  अपने  राक्षसों  को    धरती  के  कोने -कोने  में  आतंक  मचाने  भेजा  करता  था  ,   ये  राक्षस  आतंक  मचाते , लोगों  को  सताते , ऋषियों  के  यज्ञ   आदि  पवित्र  कार्यों  को  नष्ट  कर  देते  थे  l   वही स्थिति  आज  भी  है    , अंतर  केवल  इतना  है  कि  पहले  एक  रावण  था  , अब  बहुत  हैं  l  क्रूरता  भरी  , संवेदनहीन  जितनी  भी  घटनाएँ  संसार  में  घट रहीं  हैं  उनके  पीछे  कोई  न  कोई  रावण  अवश्य  है  l  नकारात्मक विचारों  को  सकारात्मक  विचारों  से  ही  समाप्त  किया  जा  सकता  है  l  जागरूकता  की  जरुरत  है  l  पं . श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं  --- ' विचार  एक  संसाधन  है   जिसे  नियंत्रित  , संयमित  और  उपयोगी  बनाकर   अनेक  चमत्कार  और    आश्चर्यजनक  परिणाम   उत्पन्न  किए  जा  सकते  हैं  l '