29 November 2018

WISDOM -----

       कभी  एक  अवगुण  इतना  भारी  होता  है  कि  वह  सारे  गुणों  को  ढक  देता  है   l  रावण  ने  सीताजी  का अपहरण  किया ,  यह उसका  इतना  बड़ा  दोष  था  जिसने  उसके  सारे  गुणों  को  ढक  दिया  l
 रावण  चारों  वेद   व  शास्त्र  का  ज्ञाता , बलशाली  और   महा तपस्वी  था   l  वह  महान  अर्थशास्त्री  था , तभी  तो  उसकी  सोने  की  लंका  थी   l  राजनीति  व  कूटनीति  में  कुशल  था  l रावण  एक  कुशल  संगठनकर्ता    था   l   उसने  बड़े  ही  असाधारण  ढंग  से  राक्षस , असुर  ,  दानव  आदि  प्रजातियों  को  संगठित  किया  l  इस  संगठन  संरचना  को  उसने    रक्षसंस्कृति  का  नाम  दिया  l  अपने  इस  संगठन  को  उसने  एक  महामंत्र  दिया --- ' वयं  रक्षाम: '  l  -- इसका  अर्थ  है  --- हम  रक्षा  करेंगे '  इसमें  संगठन  के  सभी  सदस्यों  की  सभी  आवश्यकताओं  की  पूर्ति  का  आश्वासन  है   l  सदस्यों   को    रावण  के  व्यक्तित्व   और  विचारों  में  आस्था  थी  l  दशानन  उनके  लिए   केवल  सेनापति  या  राजा  नहीं   था  , बल्कि  वह  उनके  लिए   गुरु  एवं  भगवान  था  l   उसका  यह  संगठन  भावनाओं  के  अटूट  बंधन  से  बंधा  था ,  इसलिए  अति  सुद्रढ़  था   l 
  रावण  के  व्यक्तित्व  के  अध्ययन  से  यही   शिक्षा  है   कि    केवल  एक  ही  अवगुण   मनुष्य  को  पतन  के  गर्त  में  धकेल  देता  है   इसलिए  जीवन  को  बहुत  सावधानी  से  जीना  चाहिए   l  

संत की महिमा

  गुरु  नानक  साहब  मुलतान  पहुंचे  l वहां  के  पीर - फकीरों  ने  उनकी  परीक्षा  ली  कि  यह  व्यक्ति  वास्तव  में  कौन  है  ?   उन  लोगों  ने  एक  दूध  से  लबालब  कटोरा  उनके  पास  भेजा  l  सन्देश  यह  था  कि   इसमें  एक  भी  अतिरिक्त बूंद  की  गुंजाइश  नहीं  है  l मुलतान  शहर  में   कई  पहुंचे  हुए  पीर - फकीर - संत  हैं  ,  उनके  लिए वहां  कोई  जगह  नहीं  है  l 
  गुरु  नानक देव   सब  जानते  थे  l  उनने  दूध  के  कटोरे  में  दो  बताशे  डाल  दिए  और  एक  गुलाब  की पंखुड़ी  डाल  दी   l   आशय  यह  था  कि   बताशा  अपनी  मिठास  से  जिस  तरह  दूध  को  मीठा  कर  देता  है   तथा  फूल  के  रहते   कभी  दूध  बिगड़  नहीं  सकता  ,  उसकी  सुगंध  ही  फैलती  है  ,  उसी  तरह  उनके  यहाँ  आने  से   किसी  को हानि  नहीं  पहुंचेगी  , उलटे  सत्संग  का   और  ज्ञान का  लाभ  ही  होगा  l सन्देश मिला  l  सभी  पीरों  ने जाना  कि   सचमुच  एक  औलिया`  सिद्ध  पुरुष  आया  है  l  सभी  उनसे  मिलने  आये  और  सभी  ने  मिलकर  सत्संग  का  आयोजन  किया   l  

27 November 2018

WISDOM ----- अध्यात्म का प्रथम सोपान ---- कर्मयोग अर्थात निरंतर प्रयास और पुरुषार्थ अनिवार्य है

  स्वामी  विवेकानन्द जब  अमेरिका  गए  तो  वहां   एक   ने  उनसे  सवाल  किया  ----- " क्या  आपने  हिंदुस्तान में  ब्रह्म विद्दा  सिखा ली  ?  हिंदुस्तान  में  ज्ञान  और  धर्म  का  प्रचार  हो  गया  ,  जो  इतना  लम्बा    सफर   कर के  यहाँ  आये   ? " स्वामी  ने  गम्भीरता  से  उत्तर  दिया ------ " हमारा  भारतवर्ष    तमोगुण  में  डूबा  हुआ  है    आप   एक  क्लास  आगे  बढ़  गए  हैं  ,  आप  रजोगुण  में  हैं   इसलिए  आपको  उसके  आगे  -- सतोगुण  का  पाठ  सिखाने  आये  हैं  l  हम  आपको  न  तो  भजन    की   शिक्षा  देने  आये  हैं   और  न  ही   संयम  और  सेवा   की  l  आप  सामर्थ्यवान  हैं    और  सामर्थ्यवान  को   त्याग    की    शिक्षा  दी  जा  सकती  है, ज्ञान , ध्यान  और  प्रेम  की शिक्षा  दी  जा  सकती  है   लेकिन  जहाँ  गरीबी  है  , बेरोजगारी  है  वहां  ध्यान  और  त्याग  की  शिक्षा  कैसे   दे  सकते   हैं   l  "  
  हजारों   वर्षों  की  गुलामी  के  कारण    भारत  अभी  भी  तमोगुण  अर्थात  जड़ता   की  स्थिति  में  है   यहाँ  कर्मयोग  के   शिक्षण  की  जरुरत  है  l
   तुलसीदासजी  ने  भी  लिखा  है ---- ' सकल  पदारथ  हैं  जग  मांहीं,  करमहीन  नए  पावत नाहीं  l 
  कर्मकांड  और  आडम्बर  छोड़कर  आज  लोगों  को  कर्मयोगी  बनने  की  जरुरत  है  l  

26 November 2018

WISDOM ----- वर्तमान अध्यात्म

  पं. श्रीराम शर्मा  आचार्य जी  ने    अपनी  क्रांतिधर्मी पुस्तिका  ' परिवर्तन  के  महान  क्षण  ' में  लिखा  है --- " जो  लोग  धर्म  और अध्यात्म   को   चर्चा - प्रसंगों   में  मान्यता  देते  हैं  ,  वे भी निजी  जीवन   में  प्राय:  वैसे  ही  आचरण    करते  देखे  जाते  हैं  ,  जैसे कि  अधर्मी  और  नास्तिक  करते  देखे  जाते  हैं  l   धर्मोपदेशकों  से  लेकर  धर्म ध्वजियों   के  निजी  जीवन  का   निरीक्षण - परीक्षण     करने   पर   प्रतीत  होता  है   कि  अधिकांश  लोग   उस   स्वार्थपरता   को  ही  अपनाये  रहते  हैं  ,  जो  अधार्मिकता  की  परिधि  में  आती  है   l  आडम्बर , पाखण्ड   और  प्रपंच  एक  प्रकार  से  नास्तिकता  ही  है  , अन्यथा  जो   आस्तिकता   और  धार्मिकता  की  महत्ता  भी  बखानते  हैं   ,  उन्हें  स्वयं  तो  बाहर - भीतर  से  एकरस  होना  चाहिए  था   l  जब  उनकी  स्थिति    आडम्बर  भरी  होती  दीखती  है    तो  प्रतीत  होता  है   कि  लोगों  की  आँखों  में    धूल  झोंकने   या  उनसे  अनुचित  लाभ   उठाने  के लिए  ही   धर्म  का  ढकोसला   गले  से  बाँधा   जा  रहा  है  l ----------  यह  स्थिति भयानक  है   l        ( पृष्ठ  6 एवं 7 )  
  आचार्यजी  का  कहना  है   कि   विज्ञान  की  पराकाष्ठा   के  इस  युग  में   जितनी  तेजी  से  पाखंड  और  आडम्बर  बढ़ा  है  ,  वह  आश्चर्यजनक  ही  नहीं ,  समाज  विज्ञानियों  के  लिए  एक  शोध  का  विषय  भी  हो  गया  है   l   

25 November 2018

WISDOM ----- संसार में सबसे बड़ा कर्तव्य क्या है ?

  एक  राजा  पंडितों , विद्वानों  से प्रश्न   पूछता  था  कि  संसार  में  सबसे  बड़ा  कर्तव्य   क्या  है  ?  विद्वानों  के  उत्तर  से   राजा  संतुष्ट  नहीं  हो सका  l  एक  दिन  राजा  शिकार  के  लिए  जंगल  गया  और  शिकार  का  पीछा  करते  - करते  रास्ता  भटक  गया  l  खोज  करने  पर  एक  आश्रम  दिखाई  दिया  , जहाँ  एक  संत  ध्यानस्थ  थे  l  राजा  प्यास  से  बेहाल  था  ,  संत  को  पुकारते हुए  बेहोश  हो  गया  l  होश  आने  पर  राजा  ने  देखा  कि   संत  उसके  मुंह  पर  पानी  के  छींटे मार रहे  थे  l  राजा  ने  विनम्रता  से  कहा --- " भगवन  !  आप  तो  समाधि  में  लीन  थे  l  आपने  मेरे  लिए  समाधि  क्यों  भंग  की  l  "  संत  ने  राजा  से  कहा ---- " राजन !  आपके  प्राण  संकट  में  थे  l  ऐसे  समय  मेरे  लिए   ध्यान  की  अपेक्षा  आपकी  सहायता  के  लिए  तत्पर  होना  ज्यादा  महत्वपूर्ण  कार्य  था  l  समय  और  परिस्थिति  को  देखते  हुए  ही  कर्तव्य  का  निर्धारण  करना  चाहिए  l  "  संत  के  इस  कथन  से   राजा  को  अपने  प्रश्न  का  उत्तर  भी  मिल  गया  कि    सर्वोपरि  कर्तव्य  का   निर्णय   परिस्थिति  को  देखकर  ही  किया  जा  सकता  है   l  

24 November 2018

WISDOM ---- ईश्वर की शरण में जाने से ही भय से मुक्ति संभव है

 लाओत्से  ने  कहा  है --- अगर  मजे  से  रहना   हो  तो  आखिरी  में  रहना   l  जो  अंतिम  में  खड़ा है  उसे  कोई  धक्का  देने  नहीं  आएगा  l  अगर  प्रथम  होने  की  कोशिश  होगी   तो  फिर  अनेकों  आ  जायेंगे  ,  पीछे  खींचने  के  लिए   l  इसलिए  स्वर्ग  के  राजा  इंद्र  को   हमेशा   बड़ी  बेचैनी  बनी  रहती  है   l  वे  सबसे  अधिक भयभीत  रहते  हैं  l  कोई  भी  तप  से  ऊपर  उठने  की  कोशिश  करे   तो  उन्हें बड़ी  घबराहट होने  लगती  है  l  

23 November 2018

WISDOM ---- नेकी और परोपकार की राह पर चलना ही सच्चा धर्म है ----- गुरु नानक

 गुरु  नानक  ने  कहा  कि    तरह - तरह  के  कर्मकांडों  में  लगे  रहना ,  पूजा - पाठ  का  ढोंग  करना   और  इन  बातों  के  नाम  पर   आपस में  झगड़े,  द्वेष भाव ,  कलह  फैलाना   किसी  प्रकार  का  धर्म  नहीं  कहा   जा   सकता   l  वे  आंतरिक  पवित्रता  को  आवश्यक  मानते  थे   l  उनकी  अधिकतर  शिक्षाएं  ' जप जी ' नामक  गीत  में  बड़े  सुन्दर  ढंग  से  प्रस्तुत  की  गईं  हैं   l मुसलमानों  में  कुरान  को   और  ईसाइयों  में  बाइबिल  को  जो  गौरव  प्राप्त  है   वह  सिख  समाज  में  ' जप जी '  को  है  l 
         ' गुरु  नानक  शाह  फकीर  l
            हिन्दू  का  गुरु  मुसलमान  का  पीर   l