लघु -कथा ----- एक बार अमेरिका की एक पचास मंजिली इमारत का लिफ्ट खराब हो गया l सबसे ऊपरी मंजिल में स्थित एक कार्यालय के कर्मचारी जब सीढियाँ चढ़कर ऊपर जाने लगे तो उन्होंने समय काटने के लिए तय किया कि प्रत्येक बारी -बारी से एक छोटी -छोटी कहानी सुनाता चलेगा l कहानी सुनने का जब दौर चल रहा था , तो एक कर्मचारी बीच में टोकने का बार -बार प्रयत्न करता , किन्तु सब लोग उसे चुप करा देते l मंजिल निकट आने पर जब उसकी बारी आई तो लोगों ने उससे कहा -- " हाँ भाई , अब तू सुना , तब से क्या बीच में टोक रहा था l " उसने बड़ी स गंभीरता से कहा --- " मैं केवल यही कहना चाहता था कि कार्यालय की चाबी तो नीचे कार में ही रह गई है l इतनी देर से कोई मेरी सुनता ही नहीं है l " ----
21 June 2022
20 June 2022
WISDOM ------
हकीम लुकमान कहते थे ---- ' भोजन का असंयम कर मनुष्य अपनी जीभ से अपनी कब्र खोदता है l ' ---एक सेठ जी थे , वे खाँसी से बहुत परेशान थे l वैद्य जी के पास गए , तो वैद्य जी ने उनसे परहेज करने को कहा l सेठ जी ने कहा ---- " आप चाहें तो जितनी कड़वी दवा दें दे, पर मैं परहेज नहीं कर सकता l " वैद्य जी ने कहा --- फिर आप परहेज भी मत कीजिए , दवा भी मत लीजिए , क्योंकि खांसी के तीन लाभ आपको अवश्य ही होंगे l एक लाभ तो यह कि आप रात भर खांसते रहेंगे तो , घर में चोर नहीं आयेंगे l दूसरे आपको कुत्ते नहीं काटेंगे क्योंकि कमजोरी के कारण आप बिना लाठी नहीं चल सकेंगे l तीसरा लाभ यह है कि बुढ़ापा नहीं आएगा , क्योंकि खांसी के कारण जीवन जल्दी ही समाप्त हो जायेगा l यह सुनकर सेठजी को वैद्य जी की बात समझ में आ गई और उन्होंने खाने -पीने पर नियंत्रण कर अपने को स्वस्थ कर लिया l
19 June 2022
WISDOM -----
मोह के कारण मनुष्य की कैसी दुर्गति होती है , इसे बताने के लिए पुराणों में अनेक कथाएं हैं l ऐसी ही एक कथा है ------ एक आदमी बूढ़ा हुआ तो नारद जी उसके पास गए और कहा कि अब जिन्दगी का आखिरी पड़ाव है , भगवान को याद कर लो l शरीर चाहे वृद्ध हो जाये ,इच्छाएं समाप्त नहीं होतीं l वह बोला --- अभी सुख - वैभव भोग लें , नाती -पोते देख लें फिर भगवान को याद करेंगे l कुछ दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई l दूसरी योनि मिलने से पूर्व नारद जी उसके पास गए और कहा -- तुमने अपना जीवन धन कमाने और भोग विलास में बिताया , भगवान को याद नहीं किया , कोई सत्कर्म नहीं किए इसलिए अब तुम्हे बैल का जन्म मिलेगा l बैल का जन्म लेकर भी बेटे - बेटी के यहाँ रहा , उसे पूर्व जन्म की याद थी , खूब दौड़ -दौड़ कर काम करता l नारद जी आए और बोले -अब भगवान का नाम ले लो तो इस योनि से मुक्ति मिल जाएगी l वह बोला -- यह हमारी ही जमीन है , अपने ही बच्चों के लिए काम कर रहे हैं l अब मरा तो कुत्ते की योनि मिली l मोह उसी घर में खींच लाया , अब अपने बच्चों के घर की सुरक्षा करता l नारद जी फिर आए और बोले -- अब तो भगवान को याद कर , मुक्ति मिल जाये जाए l कुत्ता बोला ---- अब नाती -पोते का घर बस जाये l अब मृत्यु हुई तो सांप का जन्म मिला , मोह नहीं छूटा तो अपने गाड़े हुए खजाने की रक्षा करने लगा l बच्चों को खजाने का पता चला तो सब मिलकर उसे मारने लगे जिससे खजाना मिल जाये l अब वह नारद जी से बोला --- हमने आपकी बात मान ली होती तो यह दुर्गति नहीं होती l अब न जाने कौन सी योनि मिलेगी l यह कथा मनुष्य को समझाने के लिए है कि ये मोह कर्तव्य पालन तक सीमित रहे तो ठीक है अन्यथा दुर्गति करा देता है l
18 June 2022
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लुकमान से किसी ने प्रश्न किया कि आपने इतनी शिष्टता कहाँ से सीखी ? लुकमान ने उत्तर दिया --- " भाई , मैंने शिष्ट व्यवहार अशिष्ट लोगों के बीच रहकर ही सीखा है l लुकमान का उत्तर सुनकर लोग अचरज में पड़ गए l लुकमान ने और आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि अशिष्ट लोगों लोगों के बीच रहकर ही मैंने जाना कि अशिष्ट व्यवहार क्या है l मैंने पहले उनकी बुराइयों को देखा l फिर देखा कि कहीं ये बुराइयाँ मुझ में तो नहीं हैं l इस तरह के आत्म निरीक्षण से मैं बुराइयों से दूर होता गया और आत्मसुधार के फलस्वरूप लोग मुझे लुकमान से हजरत लुकमान कहने लगे l
WISDOM --------
एक दिन राजा भोज गहरी निद्रा में सोए हुए थे l उन्हें स्वप्न में एक अत्यंत तेजस्वी वृद्ध पुरुष के दर्शन हुए l भोज ने उससे पूछा ----- " महात्मन ! आप कौन हैं ? " वृद्ध ने कहा ---- " राजन ! मैं सत्य हूँ l तुझे तेरे कार्यों का वास्तविक रूप दिखाने आया हूँ l मेरे पीछे -पीछे चला आ और अपने कार्यों की वास्तविकता को देख l " राजा उस वृद्ध के पीछे -पीछे चल दिए l राजा भोज बहुत दान , पुण्य , यज्ञ , व्रत , तीर्थ , कथा - कीर्तन करते थे , उन्होंने अनेक कुएं , मंदिर , तालाब , बगीचे आदि भी बनवाये थे l राजा के मन में इन कार्यों के कारण बहुत अभिमान आ गया था l वृद्ध पुरुष के रूप में आया सत्य राजा भोज को अपने साथ उसकी कृतियों के पास ले गया l वहां जैसे ही सत्य ने पेड़ों को छुआ , सब एक - एक कर के ठूंठ हो गए l राजा आश्चर्य चकित रह गया l इसके बाद सत्य राजा भोज को मंदिर ले गया l सत्य ने जैसे ही उसे छुआ , वह खंडहर के रूप में परिणत हो गया l वृद्ध पुरुष ने राजा के यज्ञ , तीर्थ , कथा , पूजन , दान आदि के निमित्त बने स्थानों , उपादानों , व्यक्तियों को जैसे ही छुआ , वे सब राख हो गए l राजा यह सब देखकर विक्षिप्त सा हो गया l सत्य ने कहा ---- " राजन ! यश की इच्छा से और अपने किसी स्वार्थ की पूर्ति के लिए जो कार्य किए जाते हैं , वह दिखावा है , उनसे केवल अहंकार की पुष्टि होती है l सच्ची सद्भावना से निस्स्वार्थ होकर कर्तव्य भाव से जो कार्य किए जाते हैं , उन्ही का फल पुण्य रूप में मिलता है l " इतना कहकर सत्य अन्तर्धान हो गया l राजा ने निद्रा टूटने पर स्वप्न पर गहरा विचार किया और सच्ची भावना से कर्म करना प्रारम्भ कर दिया l
17 June 2022
WISDOM
महाभारत में एक प्रसंग है ---- 'शिशुपाल वध ' l शिशुपाल के जन्म के समय ज्योतिषियों ने लक्षणों के आधार पर बताया था कि भगवान कृष्ण के हाथों उसके इस पुत्र का वध होगा l यह सुनकर वह भगवान श्रीकृष्ण के पास गई और उनसे अपने पुत्र के जीवन दान के लिए प्रार्थना की l तब कृष्ण जी ने उसे वचन दिया कि शिशुपाल के सौ गुनाहों को वे माफ करेंगे लेकिन जैसे ही उसने 101 वीं गलती की , उसका वध कर दिया जायेगा l शिशुपाल की माँ आश्वस्त हुईं कि उनका पुत्र इतनी अधिक गलतियाँ नहीं करेगा l कहते हैं ' विनाशकाले विपरीत बुद्धि ' l l राजसूय यज्ञ में भरी सभा में जब शिशुपाल भगवान श्रीकृष्ण को गालियाँ देने लगा तब भगवान गिनते रहे ---- 1 , 2 ------- 97 . ---- 99 , 100 , और इसके बाद जैसे ही उसने एक और गाली दी कि भगवान की उंगली में सुदर्शन चक्र आ गया और फिर शिशुपाल भागता फिरा , उसे किसी ने भी नहीं बचाया , उसका अंत हुआ l शिशुपाल में उद्दंडता का ये दुर्गुण बाल्यकाल से ही था l श्रीकृष्ण तो भगवान थे वे जानते थे कि कलियुग में दुर्बुद्धि के कारण अपराध अपने चरम स्तर पर होंगे इसलिए इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संसार को समझाया कि किसी की गलती को प्रथम कदम पर ही रोक देना चाहिए जिससे वह गलती एक से बढ़कर सौ तक न पहुंचे l अपराध की शुरुआत परिवार में की गई एक छोटी सी गलती से होती है , जिसे उसके माता -पिता और परिवार के बड़े -बुजुर्ग लाड़ -प्यार की वजह से रोकते नहीं , बच्चे को समझाते नहीं l यही गलती उसे आगे जाकर एक बड़ा अपराधी बना देती है और ये अपराधी प्रवृति उस तक सीमित नहीं रहती , उसकी संतानों में संस्कार रूप में आ जाती है , इस तरह अपराध का दायरा बढ़ता ही जाता है l ' बबूल के पेड़ में कभी आम नही लगता l ' पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने कहा है -- विचारों का परिष्कार , संस्कारों में परिवर्तन अनिवार्य है l
16 June 2022
WISDOM-------
लघु -कथा ---- ' क्रोध करने वाला शत्रुओं से पहले अपने को ही नुकसान पहुंचाता है l '------- एक साँप को बहुत गुस्सा आया l उसने फन फैलाकर गरजना और फुफकारना शुरू किया और कहा ---- ' मेरे जितने भी शत्रु हैं , आज उन्हें खाकर ही छोडूंगा l उनमे से एक को भी जिन्दा नहीं रहने दूंगा l ' मेढक , चूहे , केंचुए और छोटे -छोटे जानवर उसके उस गुस्से को देखकर डर गए और छिपकर देखने लगे , देखें आखिर होता क्या है ? साँप दिनभर फुफकारता रहा और दुश्मनों पर हमला करने के लिए दिन भर इधर -उधर बेतहाशा भागता रहा l फुफकारते -फुफकारते उसके गले में दर्द होने लगा l शत्रु तो कोई हाथ नहीं आया , पर कंकर - पत्थरों की खरोंचों से उसकी सारी देह जख्मी हो गई , शाम को थकान से चकनाचूर होकर एक तरफ जा बैठा l ----- ' अनावश्यक आवेश और विशेष व्यक्ति को संत्रस्त करना करना अंतत: दुःख पहुँचाता है l