29 November 2022

WISDOM ----

   लघु कथा ---- सुबह -सुबह  एक  लोहार  घर  से  बाहर  निकला  l  रास्ते  में  उसे  लोहे  के  दो  टुकड़े  मिल  गए  , उसने    उन्हें   उठा  लिया  और  घर  लौटने  पर   लोहार  ने  एक  टुकड़े  से  तलवार  बनाई  और  दूसरे  को  ढाल  बना  दिया  l  कुछ  दिनों  बाद  एक  योद्धा  आकर  तलवार  और  ढाल  खरीदकर  ले  गया  l  उस  योद्धा  ने  कई  युद्धों  में   उनका  उपयोग  किया  l  एक  युद्ध  में  तलवार  टूट  गई  लेकिन  ढाल  ज्यों की त्यों  सलामत  रही  l  टूटी   तलवार   को  योद्धा  घर  ले  आया   और  तलवार  व  ढाल  दोनों  को  पास -पास  रख  दिया  l  रात  में  जब  सब  सो  गए  , तब  तलवार  कराहती  हुई  ढाल  से  बोली  --- बहिन  , देखो  मेरी  कैसी  दुर्दशा  हो  गई   और  एक  तू  है  जो  ज्यों -की -त्यों  सुरक्षित  है  l  ढाल  ने  कहा ---हम  दोनों  में  एक  फर्क  जो  है  l  वह  क्या  ?  तलवार  पूछ  बैठी  l    ढाल  ने  कहा --- तू  सदैव  किसी  को  मारने -काटने  का  काम  करती   रही  है   और  मैं  बचाने  का  l  यह  ख्याल  रखो  कि  मारने  वाले  से  बचाने  वाले  की  आयु  ज्यादा  है  l 

28 November 2022

WISDOM ---

   श्रीमद् भगवद्गीता   में  भगवान  कहते  हैं --- मेरे  भक्त  का  कभी  नाश  नहीं  होता  l किसी  भी  स्थिति  में  उसका  कोई  अहित  नहीं  होता  l  मैं  सदा  उसके  साथ  रहता  हूँ  l  जो  सच्चे  ईश्वर  भक्त  हैं  उनके  मन  में  सतत  विश्वास  रहता  है   कि  जब  प्रभु  साथ  हैं  तो  कुछ  भी  अन्यथा  नहीं  होगा  l  एक  कथा  है ---- एक  सेठ जी  थे  , ईश्वर विश्वासी  थे  l  ईमानदारी  से   व्यापार    करते  और   और  काम  करने  के  साथ  मन  में  निरंतर  भगवान  का  नाम स्मरण  करते  l  उनके  रुई  के  कई  गोदाम  थे  l  एक  दिन  उनका  मुनीम   अचानक  दौड़ता  हुआ  उनके  कक्ष  में  पहुंचा   और  बोला --- " सेठ जी  ! बड़ी  बुरी  खबर  है  l  तार  आया  है  कि  हमारे  गोदामों  में  आग  लग  गई  , संभवतः  लाखों  का  नुकसान   हो  गया  हो  l "  यह  सुनकर  सेठ जी  जरा  भी  विचलित  नहीं  हुए    और  बोले --- " जैसी  प्रभु  की  इच्छा  , वैसा  ही  होगा  l "  मुनीम  को  ऐसा  देखकर  बड़ा  आश्चर्य  हुआ  l  l  एक  घंटे  बाद  मुनीम   फिर  से  सेठजी  के  कमरे  में  दौड़ा  आया   और  बोला --- " सेठ जी  !  अभी -अभी  खुशखबरी  आई  है  l  हमारे  सारे  गोदाम  सुरक्षित  हैं  l  पहला  वाला  तार  हमें  गलती  से  मिल  गया  था  l  सेठजी  ने  फिर  वही  शांत  भाव  से  उत्तर  दिया --- " जैसी  प्रभु  की  इच्छा  होती  है  , वैसा  ही  होता  है  l " मुनीम  को  समझ  में  आ  गया   जो  सब  कुछ  ईश्वर  की  इच्छा  मानकर  उन  पर  छोड़  देते  हैं वे   मन:स्थिति  में  शांत  रहते  हैं   l  

27 November 2022

WISDOM ----

  वस्तुओं  के  प्रति  आकर्षण  का , अतृप्त  इच्छाओं  का  नाम  तृष्णा  है  l  तृष्णा  प्राय:  अपनी  स्थिति  से  अधिक  ऊँची  सामर्थ्य  वाली   वस्तुओं  के  लिए  हुआ  करती  है  l  पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं --- " वासना  और  तृष्णा  की  खाई  इतनी  चौड़ी  और  गहरी  है  कि  उसे  पाटने  में   कुबेर  की  सम्पदा  और  इंद्र  की  सामर्थ्य  भी   कम  पड़ती  है  l   तृष्णा  कभी  तृप्त  नहीं  होतीं  l  उन्हें  व्रत , संकल्प  और  प्रतिरोध  की  छड़ी  से  ही  काबू  में  लाया  जा  सकता  है  l "  एक  कथा  है ------  एक  राजा  ने  एक  बकरी  पाली   और  प्रजाजनों  की  परीक्षा  लेने  का   निर्णय  किया  l  यह  घोषणा  की  गई  कि  जो  इस  बकरी  को  तृप्त  कर  देगा   उसे  सहस्त्र  स्वर्ण  मुद्राएँ  उपहार  में  मिलेंगी  l   परीक्षा  की  अवधि  पंद्रह  दिन  रखी  गई  और  बकरी  घर  ले  जाने  की  छूट  दे  दी  l   जो  ले  जाते  वे  पंद्रह  दिन  तक  उसका  पेट  भली  प्रकार  भर  देते  l  इतने  पर  भी  जब  वह  दरबार  में  पहुँचती  तो   अपनी  आदत  के  अनुरूप  वहां  रखे  हुए  हरे  चारे   में   मुंह  मारती  l  प्रयत्न  असफल  चला  जाता  l  इस  प्रकार  कितनों  ने  ही  प्रयत्न  किया  ,  पर  वे  सभी  निराश  होकर  लौट  गए  l   एक  बुद्धिमान  उस  बकरी  को  ले  गया   , वह  पीछे  छुपकर  बकरी  को  चारा  डाल  देता  , उसका  पेट  भर  देता  लेकिन  जब  वह  सामने  से   आता  , उसके  हाथ  में  चारा  होता  तब  वह  बकरी  की  छड़ी  से  अच्छी  खबर  लेता  l  उसे  देखते  ही  बकरी  खाना  भूल  जाती   और   मुंह   फेर  लेती  l  यह  नया  अभ्यास  जब  पक्का  हो  गया  तो  वह  बकरी  को  लेकर   दरबार  में  पहुंचा  l  छड़ी  हाथ  में  थी  l  उसके  सामने  हरा  चारा  रखा  गया   तो  छड़ी   को  ऊँची  उठाते  ही   बकरी  ने  मुंह  फेर  लिया  ,  राजा  समझ  गया  कि  वह  पूर्ण  तृप्त  हो  गई   और  उस  बुद्धिमान  को  इनाम  मिल  गया  l  इस  रहस्य  का  उद्घाटन   करते  हुए   राजपुरोहित  ने  बताया  कि  तृष्णायें   बकरी  के  सद्रश  हैं  l  वे  कभी  तृप्त  नहीं  होतीं  l  उन्हें  व्रत , संकल्प  और  प्रतिरोध  की   छड़ी  से  ही  काबू  में  लाया  जा  सकता  है   l  

25 November 2022

WISDOM -----

     पं. श्रीराम  शर्मा  आचार्य जी  लिखते  हैं ---- " दूसरों  का  सहारा  लेकर  बहुत  ऊँचे  पहुंचे  हुए  लोगों  में   वो  साहस  और  द्रढ़ता  नहीं  होती   जो  अपने  आप  विकसित  हुए   व्यक्ति  में  स्थायी  रूप  से  होती  है  l  सफलता  की  मंजिल  भले  ही  देर  से  मिले   पर  अपने  पैरों  की  गई  यात्रा  -विकास यात्रा  अधिक  विश्वस्त  होती  है  l  संसार  में  कार्य  करने  के  लिए  स्वयं  का   विश्वासपात्र  बनना  आवश्यक  है  l  आत्म शक्तियों  पर  जो   जितना  अधिक  विश्वास  करता  है  ,  वह  उतना  ही  सफल  और  बड़ा  आदमी  बनता  है  l  "   एक  कथा  है ---- किसी  चिड़िया  ने  चोंच  में  दबाकर   पीपल  का  एक  बीज   नीम  के खोखले  तने  में  डाल  दिया  l  वहां  थोड़ी  मिटटी  , थोड़ी  नमी  थी  l  बीज  उग  आया   और  धीरे -धीरे  उस  वृक्ष  से  ही  आश्रय  लेकर  बढ़ने  लगा  l   सीमित    साधनों  में  वह   पीपल  का  पौधा   थोड़ा   ही  बढ़कर  रह  गया  l   एक  दिन  उसने  बड़े  वृक्ष  को   डांटते  हुए  कहा ---- " दुष्ट  !  तू   स्वयं  तो  आकाश  छूने  जा  रहा  है   और  मुझे  थोड़ा  भी  बढ़ने  नहीं  देता  l  अब  तूने  शीघ्र  ही  मुझे   विकास  के  और  साधन  न  दिए   तो  तेरा  सत्यानाश  कर  दूंगा  l  "  नीम  के  वृक्ष  ने  समझाया  ----" मित्र  !  औरों  की  दया  पर  पलने  वाले   इतना  ही  विकास  कर  सकते  हैं   जितना  तुमने  किया  है  l  इससे  अधिक  करना  हो  तो   नीचे  उतरो   और  अपनी  नींव  आप  बनाओ  ,  अपने  पैरों  पर  खड़े  हो  l  "  पौधे  से  वह  तो  नहीं  बना  ,  हाँ , वह   उसे  कोसने  अवश्य  लगा   लेकिन  नीम  के  वृक्ष  को  इतनी  फुरसत  कहाँ  थी  कि   वह  पीपल  के  पौधे  की  गाली -गलौज  सुनता   l  एक  दिन  हलकी  सी   आंधी  आई  l  नीम  का  वृक्ष  थोड़ा  ही  हिला  था  ,  पीपल  के  पौधे  की  नींव  कमजोर  थी   अत"  वह  धराशायी  होकर  मिटटी  चाटने  लगा  l  उधर  से  एक  राहगीर  निकला   l  उसने   नीम  के  वृक्ष  की  ओर  देखा  और  उसके   खोखले  तने  से  गिरे  हुए    पीपल  के  पौधे  को  देखा   और  धीरे से  कहा --- "  जो  परावलंबी  हैं  ,  औरों  के  आश्रय  में  बढ़ने  की  आशा  करते  हैं  ,  उनकी  अंत  में  यही  गति  होती  है  l "    आचार्य श्री  लिखते  हैं ---- "जो  दूसरों  के  सहारे   उठते  हैं  उन्हें   बात -बात  पर  गिर  जाने  का   भय  बना  रहता  है  l  अपने  आप  बढ़ने  में  सच्चाई  और  ईमानदारी   रहती  है  ,  वह  घबराता  नहीं  , परेशान  भी  नहीं  होता   l  

24 November 2022

WISDOM ----

  एक  कथा  है ---- विधाता  ने  मनुष्य  बनाया   और  उसे  धरती  पर  भेजने  लगे   तो  भेजते  हुए  बोले  ---" पुत्र  ! तू  मानव जीवन  का  उपयोग  आत्म कल्याण  के  लिए  करना   ताकि  मृत्यु  आने  पर  पछताना  न  पड़े  l  "  मनुष्य  ने  कहा -- " जी  प्रभु  ! पर  आप  मृत्यु  आने  से  पूर्व  चेतावनी  जरुर  दे  देना  ,  ताकि  मैं  समय  रहते  संभल  सकूँ  l "  विधाता  ने  हामी  भरी  l  पृथ्वी  पर  आते  ही  मनुष्य  अपने  पथ  से  भटक  गया  और  मात्र  इन्द्रिय  सुखों  में  रस  लेने  लगा  l  जीवन  पूरा  हुआ  और  मृत्यु  के  बाद  वह  कर्मों  का  लेखा -जोखा  के  लिए  विधाता  के  समक्ष  उपस्थित  हुआ  l  उसने  विधाता  से  कहा --- "आपने  वचन  दिया  था  कि  आप   मृत्यु  आने  पर  चेतावनी  देंगे  , पर  मुझे  तो  कोई  ऐसा  संदेश  नहीं  मिला  l "  विधाता  बोले --- "  तेरी  आँखों  से  दीखना , कानों  से  सुनना  कम  पड़ने  लगा  , हाथ   -पैर  कम  काम  करने  लगे   पर  तब  भी  तू  उन्हें  भूलकर   सुखों  में  रस  लेता  रहा   तो  इसमें  किसका  दोष  है   l  यही  तो  तेरे  लिए  चेतावनी  थी  l  सत्य  है  कि  परमात्मा  मनुष्य  को  हर  घड़ी  चेताते  हैं  ,  पर  वह  ही  अपना  बहुमूल्य  जीवन  व्यर्थ  गँवा  देता  है   l

  संसार  में  ऐसे  अनेक  व्यक्ति  हुए    जिन्होंने  मृत्यु  को  स्वीकार  किया  --- जर्मनी  के   प्रसिद्ध   नाटककार   गेटे  अपने  लक्ष्य   में  आजीवन  पूरे  मन  और  निष्ठां  से  लगे  रहे   l  जब  उनकी  मृत्यु  का  समय  आया   तब  भी  उन्हें  नाटक  ही  दीख  रहा  था  l  अंतिम  साँस  छोड़ते  हुए   उन्होंने  उपस्थित  लोगों  से  कहा  --- " लो , अब  पर्दा  गिरता  है  , एक  मजेदार  नाटक  का  अंत  होता  है  l "





23 November 2022

WISDOM -----

  लघु  कथा ----  कुछ  समय  पूर्व  की  बात  है , वर्षा   ऋतु   थी  घनघोर  पानी  बरस  रहा  था  , दूर -दूर  तक  जल  ही  जल  नजर  आता  था  l  ऊपर  उड़ती  दो  बतखों  की  द्रष्टि  एक  कछुए  पर  पड़ी  , जो  एक  पेड़  की  टहनी  मुंह  से  पकड़े  स्वयं  को  बचाने  में  लगा  था  l  बतखों  को  कछुए  पर  दया  आ  गई   और  उसके  पास  जा  कर  बोलीं --- " आओ  कछुए  भाई , तुम  टहनी  पकड़े  रहो   और  हम  तुम्हे  उड़ाकर  सूखी  जमीन  तक  पहुंचा  देते  हैं  l बस , किसी  भी  स्थिति  में  अपना  मुंह  न  खोलना  l  "  कछुए  ने  बिना  सीख  को  समझे  हाँ  कर  दी  l  अब  कछुआ  टहनी  को  मुंह  से  पकड़े  हुए  था  और  दोनों  बतखों  ने  उसे  दोनों  सिरे  से  पकड़  रखा  था   और  आसमान  में  उड़ते  हुए  जा  रहे  थे  l  नीचे  जमीन  पर  खड़े  कुछ  बच्चों  ने   यह  अचरज  भरा  द्रश्य  देखा  और  कछुए  की  ओर  इशारा  कर  के  हँसने  लगे  l  बच्चों  को  अपनी  पर  हँसते  देख  कछुआ  क्रोध  से  भर  उठा   और  पलटकर  चिल्लाने  लगा  l  मुंह  खोलते  ही  टहनी  पर  उसकी  पकड़  ढीली  हो  गई   और  कछुआ  जमीन  पर  आ  गिरा  l   इस  कथा  से  यही  शिक्षा  मिलती  है  कि  अविवेक  के  कारण  व्यक्ति  असमय  मुँह  खोलता  है   जिसका  परिणाम  विनाशकारी  होता  है  l  कभी  मौन  रहकर  भी  समस्या  का  निराकरण  संभव  है  l  

22 November 2022

WISDOM -----

 हम  अपने  कष्टों  के  लिए  हमेशा  दूसरों  को  दोष  देते  हैं   लेकिन  सच   ये  है  कि  व्यक्ति  की  अपनी  ही  कमजोरियां  हैं  जिनकी  वजह  से  वह  कष्ट  भोगता  है  l   ' मोह ' के  कारण  कैसे   व्यक्ति  बंधनों  में  बंध  जाता  है  , इसे  समझाने  के  लिए  आचार्य जी  ने  एक  कथा  कही  है --- ' वैसे  तो  भँवरे  को  सभी  फूलों  से  प्यार  होता  है  , पराग  रस  के  लोभ  में   हर  बाग़  में  प्रत्येक  फूल  पर  मंडराता  घूमता  है  l  यह  भंवरा  सबसे   अधिक    कमल  के  फूल   को  प्यार  करता  है   और   अपने  इस  अतिमोह  में  कभी -कभी  वह  अपने   प्राण  ही  गँवा  देता  है  l  सुबह  से  साँझ  तक   कमल  के  सौन्दर्य  और   स्वाद  में  खोया  हुआ  भँवरा  साँझ  होने  पर  भी   उसके  मोह  से  नहीं  निकल   पाता  l  साँझ  होने  पर  सूर्य अस्त  की  वेला  में   कमल  की  पंखुडियां  बंद  होने  लगती  हैं  ,  पर  कमल  के  मोह  में  बंधा  भंवरा   वही  जस -का -तस  बैठा  रहता  है   और  कमल  के  पूरी  तरह  बंद  होने  पर   वह  भ्रमर  उसी  में  कैद कैद  हो  जाता  है  l  जो  भ्रमर  अपने  पराक्रम  से   कठोर  कष्ट  को  भी   काटकर  चूर -चूर  कर  देता  है  ,  वही  मोह  विवश  होने  पर  कोमल  पंखुड़ियों  को  नहीं  काट  पाता  l  उन्ही  के  बीच  सिकुड़ा  बैठा  रहता  है  l  उसे  प्रतीक्षा  रहती  है  सुबह  होने  की  , परन्तु  वह  सुबह  उसके  जीवन  में  कभी  नहीं  आती  l  कमल  के  अन्दर  प्राणवायु  के  अभाव  में  उसके  प्राण  निकल  जाते  हैं   अथवा  सरोवर  में  स्नान  करने   आए   हाथी  उस  समूची  कमलनाल  को  ही   उखाड़  कर  खा  जाते  हैं  l  उस  भ्रमर  के  भाग्य  में  मृत्यु  के  अलावा  और  कुछ  नहीं  होता  l    इसी  तरह  मनुष्य  मोहजाल  में  फंसकर   अपने    अस्तित्व  को  भुला  बैठता  है  l